फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Side effects of video games... shouting 'kill me, kill me' in sleep

Maharajganj News: वीडियो गेम का दुष्प्रभाव... नींद में चिल्ला रहे मारो-मारो

Tue, 10 Feb 2026 01:39 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 10 Feb 2026 01:39 AM IST
विज्ञापन
Side effects of video games... shouting 'kill me, kill me' in sleep
विशेषज्ञों ने चेताया, बच्चों का मानसिक ढांचा परिपक्व नहीं होता
विज्ञापन

भावनात्मक रूप से फंसाने वाले गेम्स उनके लिए जानलेवा साबित हो सकते
महराजगंज। बच्चों के मस्तिष्क पर वीडियो गेम का प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। केएमसी मेडिकल कॉलेज के मनोरोग अनुभाग में इस समस्या से पीड़ित बच्चे आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर ऐसे बच्चे शामिल हैं जो रात में सोते समय अचानक जागकर मारो-मारो चिल्लाने लगते हैं।
केएमसी मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ डॉक्टरों का कहना है कि अगर कोई ऑनलाइन गेम बच्चों को आत्मघाती कदम तक ले जा रहा है, तो यह बेहद गंभीर और खतरनाक संकेत है। विशेषज्ञों ने चेताया कि बच्चों का मानसिक ढांचा परिपक्व नहीं होता है। ऐसे में टास्क आधारित, मानसिक दबाव पैदा करने वाले या भावनात्मक रूप से फंसाने वाले गेम्स उनके लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। सोमवार को केएमसी मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की ओपीडी में वीडियो गेम से प्रभावित 12 साल से 17 साल के किशोर काउंसिलिंग कराने आए। अभिभावकों संग आए इन किशोरों की कहानी सुनकर हर कोई सन्न रह गया।
विज्ञापन

जयप्रकाश नगर के एक व्यक्ति का बेटा 15 साल का है। वह प्राइवेट नौकरी करते हैं। उनके बेटे को वीडियो गेम खलने की लत लग गई और छूट नहीं रही है, इससे वह काफी परेशान हैं। उन्होंने बताया कि रात में सोने के दौरान बेटा अचानक उठ जाता है। मारो-मारो चिल्लाने लगता है। अचानक यह सुनकर परिवार के लोग परेशान हो जाते हैं। मनाेरोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष दास ने काउंसिलिंग करने के बाद जरूरी सुझाव दिया। ओपीडी में इन दिनों आठ से 10 किशोर इस समस्या से पीड़ित होकर आ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

चौक थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति दिल्ली में सेल्समैन का काम करते हैं। साथ में पत्नी व बच्चे भी रहते हैं। परिवार करीब एक माह से महराजगंज स्थित घर पर हैं। उनकी बेटी 10 साल की है। वह भी वीडियो गेम खेलती है। उसकी मनोवृति में बदलाव दिखने पर वह केएमसी मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। उन्होंने बताया कि बेटी अचानक बचाओ-बचाओ चिल्लाने लगती है। इसी तरह से अलग-अलग तरीके से पीड़ित बच्चों के बीमारियों की गंभीरता सामने आ रही है। कुछ लोग तो ऐसे में मिले, जिनके बच्चों ने मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलने के दौरान बैंक खाता ही खाली करा दिया।
बच्चे परेशानी नहीं बताते
केएमसी मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डाॅ. आशुतोष दास ने कहा कि ऑनलाइन गेम्स और स्क्रीन की वजह से बच्चों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं। उनके व्यवहार में बदलाव आ रहा है और ये स्थिति तेजी से गंभीर हो रही है। कुछ समय पहले ब्लू व्हेल्स जैसे गेम की वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों में दुर्घटनाएं हुईं थीं। बच्चे हमेशा बोलकर अपनी परेशानी नहीं बताते लेकिन उनके व्यवहार में बदलाव आते हैं। गेम में हारना उनके आत्मसम्मान को तोड़ देता है। वर्चुअल दुनिया में वे अपनी पहचान बनाते हैं लेकिन असल जिंदगी में अकेले रह जाते हैं। बच्चे विड्रॉल सिम्पटम्स दिखाते हैं। इसमें फोन छीनने पर गुस्सा, नींद की कमी, स्कूल से भागना या दोस्तों से दूर होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
मोबाइल ने घर में बातचीत खत्म कर दी
माता रानी रूमाली देवी महिला महाविद्यालय नदुआ की समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. पूनम वर्मा ने बताया कि मौजूदा समय की भाग-दौड़ वाली जिंदगी में नौकरी और मोबाइल ने घर में बातचीत खत्म कर दी है। न्यूक्लियर फैमिली में अभिभावक बच्चों को सुविधाएं तो देते हैं लेकिन समय नहीं। व्यस्त बच्चा-सुरक्षित बच्चा का भ्रम उन्हें संकेतों को नजरअंदाज करने पर मजबूर करता है। पड़ोसियों से मिलना-जुलना कम हो गया है जिससे बच्चे और अकेले पड़ जाते हैं। व्यस्त अभिभावक शुरुआती संकेत जैसे ज्यादा स्क्रीन टाइम या मूड चेंज को मिस कर देते हैं। स्कूलों में परामर्शदाता की कमी है। ज्यादातर स्कूलों में मोबाइल पॉलिसी नहीं है और टीचर्स को मानसिक संकेत पहचानने की ट्रेनिंग नहीं मिलती।
बच्चे से खुलकर बातचीत करें
केएमसी मेडिकल कॉलेज के डॉ. डीसी कुशवाहा ने बताया कि मोबाइल की लत दूर करने के लिए माता-पिता को सबसे पहले बच्चे के साथ खुलकर बातचीत करनी चाहिए। बच्चों को समझाना जरूरी है कि मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल उनकी सेहत, पढ़ाई और मानसिक विकास पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। समय-सीमा तय करना, मोबाइल के लिए विशेष समय निर्धारित करना और अन्य मनोरंजक एक्टिविटी की ओर बच्चों को आकर्षित करना मददगार होता है। परिवार के साथ खेल, बाहर घूमना, पढ़ाई और हॉबी के काम मोबाइल से ध्यान हटाने में मदद करते हैं।
केस नंबर एक
15 साल का एक किशोर एक माह पहले अपने पापा के मोबाइल से गेम खेल रहा था। इस बीच खाते से दो-चार दिन के अंतराल में तीन से चार रुपये कटने लगे। शुरूआत में ध्यान नहीं दिए, लेकिन बाद में निगरानी की तो खाते इसी तरह से करीब 10 हजार रुपये कट चुके थे। उन्होंने ऑनलाइन अकाउंट बंद कराने के बाद साइबर थाने में सूचना दी।


-----------------
केस नंबर दो
10 साल के बच्चे को वीडियो गेम खेलने की लत लग गई है। वह हर बात पर आक्रोशित हो जाता है। इकलौता बेटा होने के कारण मां-बाप भी परेशान हैं। मनोचिकित्सक से उसकी काउंसिंलिंग कराने के साथ ही दवा हो रही है। एक सप्ताह बीतने के बाद भी अभी कुछ फायदा नहीं हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed