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Maharajganj News: श्रवण कुमार को पाने के लिए उनके माता-पिता ने दे दी थी आंखों की रोशनी
Thu, 30 Jan 2025 06:31 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 30 Jan 2025 06:31 PM IST
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परतावल। क्षेत्र के धरमौली में आयोजित शतचंडी महायज्ञ के छठवें दिन कथा व्यास हलचल बाबा ने श्रवण कुमार लीला की कथा सुनाई। हलचल बाबा ने कहा कि श्रवण कुमार को गुरु वशिष्ठ ने बताया कि तुम्हारे माता-पिता जन्म से अंधे नहीं हैं, बल्कि तुम्हें प्राप्त करने के लिए उन्हें अंधा होना पड़ा था।
श्रवण कुमार यह सुनकर परेशान हो जाते हैं और अपने माता-पिता की आंखों की रोशनी वापस लाने के लिए गुरु वशिष्ठ से उपाय पूछते हैं। गुरु वशिष्ठ उन्हें बताते हैं कि यदि तुम अपने माता-पिता को चार धाम की यात्रा कराओगे तो उनकी आंखों की रोशनी फिर से आ जाएगी। श्रवण कुमार अपने बूढ़े मां बाप को कांधे पर कावड़ में बैठाकर चार धाम की यात्रा पर निकल जाते हैं। यात्रा के दौरान श्रवण के माता-पिता को प्यास लगती है तो वह उन्हें पेड़ के नीचे बैठाकर सरयू नदी से जल लेने के लिए जाते है। अयोध्या के राजा दशरथ शिकार करने के लिए उस समय वनों में घूमते रहते हैं। सरयू नदी से जल भरते हुए श्रवण कुमार को जंगली जानवर समझकर वह तीर मार देते हैं। दशरथ को पता लगता है कि मैंने किसी जानवर को तीर नहीं मारा बल्कि बूढ़े मां-बाप का सहारा श्रवण कुमार को तीर मारा है तो वह बेहद परेशान होते हैं।
श्रवण कुमार से अपनी अंतिम इच्छा पूछते हैं वह कहता है कि आप केवल इतना कर दें कि मेरे बूढ़े मां-बाप को प्यास लगी है आप उन्हें पानी पिला दें। श्रवण कुमार दम तोड़ देते हैं। बूढ़े मां-बाप के पास राजा दशरथ पानी लेकर पहुंचते हैं और उन्हें सारा वृतांत बताते हैं तो श्रवण के मां-बाप तड़पते हैं और राजा दशरथ को श्राप देते हैं कि जिस प्रकार पुत्र के वियोग में तड़प रहे हैं। उसी प्रकार तुम भी पुत्र के वियोग में तड़प-तड़प कर प्राण दोगे। इस दौरान रमाकांत गुप्ता, मनोज कुमार गुप्ता, शत्रुध्न कन्नौजिया, चंदन तिवारी, बजरंगी तिवारी मौजूद रहे।
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श्रवण कुमार यह सुनकर परेशान हो जाते हैं और अपने माता-पिता की आंखों की रोशनी वापस लाने के लिए गुरु वशिष्ठ से उपाय पूछते हैं। गुरु वशिष्ठ उन्हें बताते हैं कि यदि तुम अपने माता-पिता को चार धाम की यात्रा कराओगे तो उनकी आंखों की रोशनी फिर से आ जाएगी। श्रवण कुमार अपने बूढ़े मां बाप को कांधे पर कावड़ में बैठाकर चार धाम की यात्रा पर निकल जाते हैं। यात्रा के दौरान श्रवण के माता-पिता को प्यास लगती है तो वह उन्हें पेड़ के नीचे बैठाकर सरयू नदी से जल लेने के लिए जाते है। अयोध्या के राजा दशरथ शिकार करने के लिए उस समय वनों में घूमते रहते हैं। सरयू नदी से जल भरते हुए श्रवण कुमार को जंगली जानवर समझकर वह तीर मार देते हैं। दशरथ को पता लगता है कि मैंने किसी जानवर को तीर नहीं मारा बल्कि बूढ़े मां-बाप का सहारा श्रवण कुमार को तीर मारा है तो वह बेहद परेशान होते हैं।
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श्रवण कुमार से अपनी अंतिम इच्छा पूछते हैं वह कहता है कि आप केवल इतना कर दें कि मेरे बूढ़े मां-बाप को प्यास लगी है आप उन्हें पानी पिला दें। श्रवण कुमार दम तोड़ देते हैं। बूढ़े मां-बाप के पास राजा दशरथ पानी लेकर पहुंचते हैं और उन्हें सारा वृतांत बताते हैं तो श्रवण के मां-बाप तड़पते हैं और राजा दशरथ को श्राप देते हैं कि जिस प्रकार पुत्र के वियोग में तड़प रहे हैं। उसी प्रकार तुम भी पुत्र के वियोग में तड़प-तड़प कर प्राण दोगे। इस दौरान रमाकांत गुप्ता, मनोज कुमार गुप्ता, शत्रुध्न कन्नौजिया, चंदन तिवारी, बजरंगी तिवारी मौजूद रहे।
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