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Maharajganj News: मासूमों के लिए संजीवनी नवजात शिशु देखभाल इकाई
Mon, 30 Sep 2024 02:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 30 Sep 2024 02:15 AM IST
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महराजगंज। जिला अस्पताल का नवजात शिशु देखभाल इकाई मासूमों के लिए संजीवनी है। यहां भर्ती होने वाले बच्चों को स्वस्थ होने का रिकार्ड बेहतर है। सरकारी से अधिक निजी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चे यहां भर्ती हुए हैं। जन्म के बाद तुरंत बीमार होने वाले बच्चों को यहां भर्ती किया जाता है। तीमारदारों को नवजात शिशु देखभाल इकाई पर भरोसा है।
जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, नवजात शिशु देखभाल इकाई में आठ माह में 2771 बच्चों को भर्ती किया गया। इसमें जिला अस्पताल में जन्म लेने वाले बीमार बच्चे केवल 356 रहे, लेकिन बाहर से आए हुए बीमार बच्चों की संख्या 2415 रही। जिला अस्पताल से बाहर जन्म लेने वाले बच्चों के तीमारदारों ने भी जिला अस्पताल के इलाज पर अपना भरोसा जताया।
जनवरी माह में 301, फरवरी में 285, मार्च 229, अप्रैल 355, मई 304, जून 350, जुलाई 364, अगस्त 483, बीमार बच्चों का जिला अस्पताल में इलाज हुआ। इलाज की सुविधा बेहतर होने के कारण क्षमता से अधिक बच्चे अक्सर भर्ती रहते हैं।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल चौधरी ने बताया कि 36 बेड के नवजात शिशु देखभाल इकाई में जन्म के तुरंत बाद बीमार होने वाले बच्चे भर्ती होते हैं। जन्म के तुरंत बाद बच्चा नहीं रोता है, तो उसे इस वार्ड में भर्ती किया जाता है। खून की कमी, मुंह में खराब पानी जाने सहित अन्य बीमार बच्चे भी भर्ती होते हैं। नवजात शिशु देखभाल इकाई में टीम देखभाल करती है। यहां बेहतर सुविधा उपलब्ध है।
वर्तमान में 36 बेड नवजात शिशु देखभाल में इकाई में है। डॉक्टरों की टीम बेहतर ढंग से इलाज करती है। वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों में बेहतर ढंग से इलाज करने का प्रयास जारी है।
-डॉ. एपी भार्गव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, नवजात शिशु देखभाल इकाई में आठ माह में 2771 बच्चों को भर्ती किया गया। इसमें जिला अस्पताल में जन्म लेने वाले बीमार बच्चे केवल 356 रहे, लेकिन बाहर से आए हुए बीमार बच्चों की संख्या 2415 रही। जिला अस्पताल से बाहर जन्म लेने वाले बच्चों के तीमारदारों ने भी जिला अस्पताल के इलाज पर अपना भरोसा जताया।
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जनवरी माह में 301, फरवरी में 285, मार्च 229, अप्रैल 355, मई 304, जून 350, जुलाई 364, अगस्त 483, बीमार बच्चों का जिला अस्पताल में इलाज हुआ। इलाज की सुविधा बेहतर होने के कारण क्षमता से अधिक बच्चे अक्सर भर्ती रहते हैं।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल चौधरी ने बताया कि 36 बेड के नवजात शिशु देखभाल इकाई में जन्म के तुरंत बाद बीमार होने वाले बच्चे भर्ती होते हैं। जन्म के तुरंत बाद बच्चा नहीं रोता है, तो उसे इस वार्ड में भर्ती किया जाता है। खून की कमी, मुंह में खराब पानी जाने सहित अन्य बीमार बच्चे भी भर्ती होते हैं। नवजात शिशु देखभाल इकाई में टीम देखभाल करती है। यहां बेहतर सुविधा उपलब्ध है।
वर्तमान में 36 बेड नवजात शिशु देखभाल में इकाई में है। डॉक्टरों की टीम बेहतर ढंग से इलाज करती है। वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों में बेहतर ढंग से इलाज करने का प्रयास जारी है।
-डॉ. एपी भार्गव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक