फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Same production, increased supply...no guarantee of purity

Maharajganj News: उत्पादन वही, आपूर्ति बढ़ी...शुद्धता की गारंटी नहीं

Tue, 07 Jan 2025 12:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Tue, 07 Jan 2025 12:53 AM IST
विज्ञापन
Same production, increased supply...no guarantee of purity
महराजगंज। शहर में दूध की खपत बढ़ रही है। ऐसे में मिलावट करने वाले अपना धंधा चमका रहे हैं। मिलावट के इस खेल में सेहत को सुरक्षित रख पाना मुश्किल है। लोग रकम खर्च करने के बाद भी शुद्ध दूध नहीं पा रहे हैं।
विज्ञापन

दूध में पानी तो मिला ही रहे थे, अब पाउडर से बना दूध बेच रहे हैं। जिले में दूध उत्पादन से खपत अधिक है, ऐसे में शुद्धता की गारंटी होना संभव नहीं है।
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 3000 लीटर रोजाना दूध का उत्पादन होता है। विभागीय योजनाओं से 21 डेयरी का संचालन होता है। दूध और पनीर की बढ़ती खपत और घटते उत्पादन धंधेबाजों को लाभ का अवसर दे रहा है। मिलावटी दूध पीने से सेहत भी प्रभावित हो रही है। बढ़ती मिलावट को देखते हुए अब तो डॉक्टर भी छह माह से अधिक उम्र के बच्चों को पाउडर वाला दूध पिलाने की सलाह दे रहे हैं। इसका असर है कि बाजार में बच्चों वाले पाउडर दूध का कारोबार हर महीने 30 लाख रुपये से ऊपर का हो गया है।
विज्ञापन

एक अनुमान के अनुसार शहर में दुकानों से लेकर घरों में करीब तीन लाख लीटर दूध की खपत प्रत्येक दिन होती है। मांग के हिसाब से यह घटता बढ़ता है। त्योहार व अन्य विशेष अवसरों पर खपत चार लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। जबकि पशुपालक से लगभग एक लाख लीटर दूध की ही आपूर्ति कर पाते हैं। वहीं पैकेज्ड दूध का कारोबार करने वाली कंपनियां भी करीब एक लाख लीटर दूध की आपूर्ति कर रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

शेष बचे एक लाख लीटर दूध की आपूर्ति मिलावट से होती है। : धंधेबाज गाय-भैंस के 10 लीटर दूध के साथ पाउडर से बना दूध भी लगभग उतनी ही मात्रा में मिला देते हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से एक साल में दूध के 55 नमूने लिए गए थे। इसमें से 32 की रिपोर्ट आई, 24 अधोमानक मिले। यानी दूध में मानक के अनुसार तत्व नहीं मिले।
साइकिल से दूध पहुंचाने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि कहां से इतना दूध लाया जाएगा। दुकानों पर पाउडर वाले दूध की खपत हो जाती है, लेकिन घरों में गाय का दूध 50 तो भैंस का 60 रुपये प्रति लीटर दिया जाता है। पानी के अलावा कुछ नहीं मिलाया जाता है। रेट भी समय के हिसाब से घटता बढ़ता रहता है। अब पशु कोई रखना नहीं चाह रहा है तो पर्याप्त दूध कहां से होगा।
अच्छी कंपनी का पाउडर वाला दूध पिलाने की सलाह : बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल चौधरी कहते हैं कि ओपीडी में कुछ ऐसे बच्चे भी इलाज के लिए आते हैं, जिनकाे दूध से समस्या होती है। ऐसे बच्चे डायरिया, एलर्जी आदि से पीड़ित होते हैं। यही कारण है कि अच्छी कंपनी का पाउडर वाला दूध पिलाने की सलाह दी जाती है।

छह माह से कम उम्र के बच्चों को केवल मां का ही दूध पिलाने की सलाह दी जाती है। मिलावटी दूध पीने से लिवर और किडनी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में दूध का सेवन करते समय सचेत रहने की जरूरत है। जांच परख करके ही दूध खरीदें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed