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Maharajganj News: रोहिन बैराज तैयार...हाईवे का काम हुआ तेज
Thu, 20 Mar 2025 01:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 20 Mar 2025 01:05 AM IST
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महराजगंज। 148 करोड़ की लागत से बॉर्डर के करीब रोहिन बीयर बैराज बनकर तैयार हो चुका है। इसके उद्घाटन की तैयारी की जा रही है। दूसरी ओर ठूठीबारी हाईवे पर तेजी से काम चल रहा है। 35 जगह पुल बनाए जा रहे हैं। वहीं महराजगंज में 500 मीटर हाईवे आज तक पूरा नहीं हो सका है। रोहिन बैराज का निर्माण अक्तूबर 2022 से शुरू हुआ था।
नौतनवा तहसील क्षेत्र के रतनपुर के मिश्रौलिया में रोहिन नदी का डिजिटल बैराज का निर्माण पूरा हो गया है। रंगाई-पुताई हो चुकी है। वहां काम करने कर्मियों ने बताया कि सभी जरूरी काम पूरे हो चुके हैं। अंदर छोटे-मोटे काम शेष गए हैं, वह भी जल्द पूरा हो जाएगा। बैराज बन जाने के बाद क्षेत्र में सिंचाई की समस्या दूर हो जाएगी।
1947 में रतनपुर के मिश्रौलिया में रोहिन नदी में बीयर गेट बनाकर रोहिन नहर प्रणाली की नहरों में पानी की आपूर्ति की जाती थी। अगस्त 2005 में आई भीषण बाढ़ से रोहिन का बीयर गेट टूट गया, जिससे नहरों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई। किसानों की सिंचाई की समस्या को देखते हुए सिंचाई विभाग ने नदी में अस्थाई कच्चा बांध बनाकर पानी आपूर्ति शुरू की, लेकिन बरसात आने से पहले बाढ़ से बचाव के लिए विभाग द्वारा बांध काट दिया जाता था। इससे किसानों को केवल रबी की फसल की ही सिंचाई की सुविधा मिल पाती थी।
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नौतनवा तहसील क्षेत्र के रतनपुर के मिश्रौलिया में रोहिन नदी का डिजिटल बैराज का निर्माण पूरा हो गया है। रंगाई-पुताई हो चुकी है। वहां काम करने कर्मियों ने बताया कि सभी जरूरी काम पूरे हो चुके हैं। अंदर छोटे-मोटे काम शेष गए हैं, वह भी जल्द पूरा हो जाएगा। बैराज बन जाने के बाद क्षेत्र में सिंचाई की समस्या दूर हो जाएगी।
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1947 में रतनपुर के मिश्रौलिया में रोहिन नदी में बीयर गेट बनाकर रोहिन नहर प्रणाली की नहरों में पानी की आपूर्ति की जाती थी। अगस्त 2005 में आई भीषण बाढ़ से रोहिन का बीयर गेट टूट गया, जिससे नहरों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई। किसानों की सिंचाई की समस्या को देखते हुए सिंचाई विभाग ने नदी में अस्थाई कच्चा बांध बनाकर पानी आपूर्ति शुरू की, लेकिन बरसात आने से पहले बाढ़ से बचाव के लिए विभाग द्वारा बांध काट दिया जाता था। इससे किसानों को केवल रबी की फसल की ही सिंचाई की सुविधा मिल पाती थी।
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