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बार्डर सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण की बाधा दूर, रजिस्ट्री शुरू
महराजगंज (ब्यूूूराो)
Updated Thu, 21 Dec 2017 12:01 AM IST
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समस्या
- फोटो : amarujala
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महराजगंज। भारत-नेपाल बार्डर सड़क के लिए चार साल से रुकी बाधा दूर हो गई और मंगलवार से फिर जमीन रजिस्ट्री शुरू हो गया। सर्वर की समस्या के बीच चार किसानों से रजिस्ट्री कराई गई। रजिस्ट्री कराने के लिए खुद किसान अब रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचने लगे हैं। इससे अब सीमा सड़क के निर्माण का रास्ता साफ होता दिख रहा है। विदित रहे कि ई-पेमेंट में पहली अक्टूबर से सड़क के लिए अधिग्रहित होने वाली भूमि की रजिस्ट्री ठप थी। यह अब शुरू हो गई।
सीमा की सुरक्षा और एसएसबी की लगातार पेट्रोलिंग के लिए इंडो-नेपाल बार्डर पर 67 किमी सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2013 में मंजूरी मिली। मगर चार बीत जाने के बाद भी बमुश्किल 12 किमी सड़क का निर्माण हो सका। कारण कि पहले किसानों से सर्किल रेट के चार गुना मुआवजा की मांग करने लगे थे। इस बीच जब सूबे में योगी की सरकार बनी तो किसानों की शर्त मान ली और चार गुना मुआवजा सरकार देने के लिए राजी हो गई। फलत: कुछ किसानों से रजिस्ट्री कराई गई। जिससे श्यामकाट पुल का एप्रोच बन रहा है। मगर बाद में ई-पेमेंट से भुगतान करने की फरमान पर पहली अक्टूबर से रजिस्ट्री ठप हो गई। इस बीच विभाग ने ई-पेमेंट की व्यवस्था देकर मंगलवार से किसानों से भूमि की रजिस्ट्री शुरु करा दी है। मंगलवार को फरेंदा तहसील क्षेत्र के ग्राम खैराघाट निवासी शाहआलम, महेश, चंदन तथा मैनुदीन से रजिस्ट्री कराई गई। रजिस्ट्री का काम लगातार होगा। इसके लिए विभागीय स्तर से व्यवस्था की गई है।
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मार्च तक हो जाएगा 700 किसानों से 15 हेक्टेअर भूमि की रजिस्ट्री
इंडो-नेपाल बॉर्डर निर्माण खंड एक के सहायक अभियंता जेपी वालिया ने कहा कि मार्च 2018 तक खैराघाट से जोगियाबारी गांव के बीच सड़क बनाने को 700 किसानों से 15 हेक्टेअर भूमि अधिग्रहीत करने को रजिस्ट्री पूरी करा ली जाएगी। इसके लिए 10 करोड़ की रकम उपलब्ध है।
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सर्वर डाउन तथा किसानों के बाहर होने से आ रही दिक्कत
इंडो-नेपाल बार्डर निर्माण खंड-एक के अधिशासी अभियंता एके गुप्ता ने कहा कि कभी कभी सर्वर डाउन होने तथा कुछ किसानों के बाहर रहने की वजह से भी कुछ समस्याएं आ रही है। मगर रजिस्ट्री तेजी से कराने में विभाग लगा हुआ है।
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सीमा की सुरक्षा और एसएसबी की लगातार पेट्रोलिंग के लिए इंडो-नेपाल बार्डर पर 67 किमी सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2013 में मंजूरी मिली। मगर चार बीत जाने के बाद भी बमुश्किल 12 किमी सड़क का निर्माण हो सका। कारण कि पहले किसानों से सर्किल रेट के चार गुना मुआवजा की मांग करने लगे थे। इस बीच जब सूबे में योगी की सरकार बनी तो किसानों की शर्त मान ली और चार गुना मुआवजा सरकार देने के लिए राजी हो गई। फलत: कुछ किसानों से रजिस्ट्री कराई गई। जिससे श्यामकाट पुल का एप्रोच बन रहा है। मगर बाद में ई-पेमेंट से भुगतान करने की फरमान पर पहली अक्टूबर से रजिस्ट्री ठप हो गई। इस बीच विभाग ने ई-पेमेंट की व्यवस्था देकर मंगलवार से किसानों से भूमि की रजिस्ट्री शुरु करा दी है। मंगलवार को फरेंदा तहसील क्षेत्र के ग्राम खैराघाट निवासी शाहआलम, महेश, चंदन तथा मैनुदीन से रजिस्ट्री कराई गई। रजिस्ट्री का काम लगातार होगा। इसके लिए विभागीय स्तर से व्यवस्था की गई है।
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मार्च तक हो जाएगा 700 किसानों से 15 हेक्टेअर भूमि की रजिस्ट्री
इंडो-नेपाल बॉर्डर निर्माण खंड एक के सहायक अभियंता जेपी वालिया ने कहा कि मार्च 2018 तक खैराघाट से जोगियाबारी गांव के बीच सड़क बनाने को 700 किसानों से 15 हेक्टेअर भूमि अधिग्रहीत करने को रजिस्ट्री पूरी करा ली जाएगी। इसके लिए 10 करोड़ की रकम उपलब्ध है।
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सर्वर डाउन तथा किसानों के बाहर होने से आ रही दिक्कत
इंडो-नेपाल बार्डर निर्माण खंड-एक के अधिशासी अभियंता एके गुप्ता ने कहा कि कभी कभी सर्वर डाउन होने तथा कुछ किसानों के बाहर रहने की वजह से भी कुछ समस्याएं आ रही है। मगर रजिस्ट्री तेजी से कराने में विभाग लगा हुआ है।