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Maharajganj News: फर्जी बिल बनाकर किया जा रहा रिफंड का फर्जीवाड़ा
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छापा और समन तक ही सिमट कर रह जा रही है कार्रवाई
दस्तावेज किराए पर देकर उठा रहे 15 से 30 हजार रुपए महीना, बन रहे सरकार का कर्जदार
नौतनवा। जीएसटी के कागजातों में हेराफेरी कर फर्जी रिफंड वसूलने के मामले इन दिनों लगातार सामने आ रहे हैं। सिस्टम को चकमा देने वाले जालसाजों की फेहरिस्त भी लंबी होती जा रही है लेकिन कार्रवाई और लगाम कसने के नाम पर सिर्फ जांच चल रही है। छापेमारी के दौरान एक के बाद दूसरे फर्म का नाम सामने आ रहे हैं। विभागीय सक्रियता के दावों के बीच ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
सीए अशोक पटेल बताते हैं कि कागजातों में हेराफेरी कर फर्जी रिफंड वसूलने वाले धंधेबाज कागजी कबड्डी खेलकर बड़े ही सलीके से सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह धंधेबाज न केवल फर्जी बिल बना रहे हैं बल्कि दूसरों के दस्तावेज किराए पर लेकर उसका इस्तेमाल कर रहे हैं। और बदले में तय किराया उपलब्ध करा रहे हैं। विभाग की कार्रवाई सिर्फ छापेमारी और समन सौंपने तक ही सिमट कर रह जा रही है। गत दिनों केंद्रीय जीएसटी विभाग की टीम द्वारा ताबड़तोड़ कई घरों और दुकानों पर की गई छापेमारी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि एक नंबर के पंजीकृत फर्म के माध्यम से फर्जी रिफंड का खेल खेला जा रहा है। इतना ही नहीं इस एक नंबर के फर्म को विभाग में रजिस्टर्ड कराने के लिए दूसरे के आधार और पेन कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को किराए पर लेने का मामला भी सामने आया है।
नियम अनुरूप कार्य करने वाले व्यापारियों की भी समस्या बढ़ा रहे शातिर
सीए अशोक पटेल ने बताया कि फर्जी रिफंड वसूलने वाले शातिर सरकार की मंशा के अनुरूप पूरे नियम और ईमानदारी से कार्य करने वाले व्यापारियों की भी समस्या बढ़ा रहे हैं। इस खेल में कुछ सीए भी शामिल हैं। व्यापारी जब रिटर्न फाइल करने की कागजी प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए संबंधित दस्तावेज सौंपते हैं तो शातिर उन दस्तावेजों को सुरक्षित कर लेते हैं और मौका देख उन्हीं के आधार पर खरीद व बिक्री कर रिफंड वसूली के खेल को अंजाम देते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ लोग 10 हजार का सामान भेजकर 50 हजार रुपये का बिल दे देते हैं और इसी आधार पर जीएसटी रिफंड के लिए अप्लाई कर देते हैं। रिफंड के लिए अप्लाई करने के बाद जब भुगतान के लिए जांच होती है जब जीएसटी चोरी का खेल पकड़ में आ जाता है। सीए अशोक पटेल ने बताया कि जीएसटी रिफंड के लिए दस्तावेज देने वाले कुछ व्यक्ति तो इस खेल से पूरी तरह अंजान हैं लेकिन कुछ दस्तावेजों के बदले प्रतिमाह 15 से 30 हजार रुपये किराया वसूलते हैं।
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फर्जी निर्यात के नाम पर होती है रिफंड वसूली
भारत से नेपाल को निर्यात होने वाले सामग्रियों को जीएसटी (कर) मुक्त की श्रेणी में रखा गया है। धंधेबाज इसी नियम का फायदा उठाने में लगे रहते हैं। बताया जाता है कि इस कारोबार में संलिप्त लोगों की ओर से पंजीकृत फर्म पर नेपाल में निर्यात के लिए लाखों की सामग्री का बिल बाउचर बनवा लिया जाता है और जिम्मेदारों की सांठगांठ से कथित सामग्रियां कागजों में ही नेपाल भी पहुंच जाती हैं। विभाग के जिम्मेदार भी संबंधित फर्म के रिफंड की अनुमति रिपोर्ट अग्रसारित कर देते हैं। जबकि नेपाल को निर्यात के लिए जाने वाले सामग्रियों का विभाग के जिम्मेदारों द्वारा भौतिक सत्यापन करने के बाद ही अपनी रिपोर्ट अग्रसारित करने का नियम है। ऐसे में सवाल है कि बिना सामान नेपाल पहुंचे किस आधार पर संबंधित फर्म को रिफंड मिल जा रहा है? संवाद
वर्जन
कुछ व्यापारी बिना बिल का माल बेचते हैं। प्राइवेट ट्रांसपोर्ट के माध्यम से यह माल बाहर तक भेजा जाता है। बिल में हेराफेरी कर जीएसटी में चोरी करते हैं। यह इसलिए पकड़ में नहीं आते क्योंकि प्राइवेट ट्रांसपोर्ट पर विभाग की नजर कम होती है। इसलिए ट्रांसपोर्टर निकल जाते हैं। सरकारी वाहनों में डिटेल देना होता है इसलिए इसमें चोरी नहीं की जा सकती। कुछ व्यापारी प्राइवेट ट्रांसपोर्ट से माल मंगा लेते हैं इसलिए वह पकड़ में नहीं आते और जीएसटी चोरी की आशंका बनी रहती है।
-कपिल देव, जीएसटी अधिवक्ता
दो माह के अंदर दो व्यक्तियों के चार ठिकानों पर हुई छापेमारी
केस-1
गत 25 फरवरी को वाराणसी से आई केंद्रीय जीएसटी की टीम ने कस्बे के घंटाघर चौक पर स्थित एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) के कार्यालय एवं आवास पर छापेमारी की थी। घंटों छापेमारी के बाद देर शाम अधिकारी सीए का लैपटॉप, हार्ड डिस्क समेत विभिन्न दस्तावेजों को जब्त कर उन्हें समन देकर तलब किया था। लेकिन आज तक सीए जीएसटी कार्यालय नहीं पहुंचे।
केस-2
गत 30 अप्रैल को जांच के दायरे में आने पर नौतनवा कस्बे के एक कपड़ा व्यवसायी के गौतमबुद्ध नगर वार्ड स्थित घर एवं जानकी नगर वार्ड स्थित दुकान में छापेमारी की गई। दस्तावेजों के मिलान और पूछताछ में मामला फर्जीवाड़ा से जुड़ा हुआ सामने आने पर अधिकारियों ने उक्त फर्म से संबंधित स्वामी को भी समन देकर तलब किया है।
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दस्तावेज किराए पर देकर उठा रहे 15 से 30 हजार रुपए महीना, बन रहे सरकार का कर्जदार
नौतनवा। जीएसटी के कागजातों में हेराफेरी कर फर्जी रिफंड वसूलने के मामले इन दिनों लगातार सामने आ रहे हैं। सिस्टम को चकमा देने वाले जालसाजों की फेहरिस्त भी लंबी होती जा रही है लेकिन कार्रवाई और लगाम कसने के नाम पर सिर्फ जांच चल रही है। छापेमारी के दौरान एक के बाद दूसरे फर्म का नाम सामने आ रहे हैं। विभागीय सक्रियता के दावों के बीच ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
सीए अशोक पटेल बताते हैं कि कागजातों में हेराफेरी कर फर्जी रिफंड वसूलने वाले धंधेबाज कागजी कबड्डी खेलकर बड़े ही सलीके से सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह धंधेबाज न केवल फर्जी बिल बना रहे हैं बल्कि दूसरों के दस्तावेज किराए पर लेकर उसका इस्तेमाल कर रहे हैं। और बदले में तय किराया उपलब्ध करा रहे हैं। विभाग की कार्रवाई सिर्फ छापेमारी और समन सौंपने तक ही सिमट कर रह जा रही है। गत दिनों केंद्रीय जीएसटी विभाग की टीम द्वारा ताबड़तोड़ कई घरों और दुकानों पर की गई छापेमारी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि एक नंबर के पंजीकृत फर्म के माध्यम से फर्जी रिफंड का खेल खेला जा रहा है। इतना ही नहीं इस एक नंबर के फर्म को विभाग में रजिस्टर्ड कराने के लिए दूसरे के आधार और पेन कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को किराए पर लेने का मामला भी सामने आया है।
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नियम अनुरूप कार्य करने वाले व्यापारियों की भी समस्या बढ़ा रहे शातिर
सीए अशोक पटेल ने बताया कि फर्जी रिफंड वसूलने वाले शातिर सरकार की मंशा के अनुरूप पूरे नियम और ईमानदारी से कार्य करने वाले व्यापारियों की भी समस्या बढ़ा रहे हैं। इस खेल में कुछ सीए भी शामिल हैं। व्यापारी जब रिटर्न फाइल करने की कागजी प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए संबंधित दस्तावेज सौंपते हैं तो शातिर उन दस्तावेजों को सुरक्षित कर लेते हैं और मौका देख उन्हीं के आधार पर खरीद व बिक्री कर रिफंड वसूली के खेल को अंजाम देते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ लोग 10 हजार का सामान भेजकर 50 हजार रुपये का बिल दे देते हैं और इसी आधार पर जीएसटी रिफंड के लिए अप्लाई कर देते हैं। रिफंड के लिए अप्लाई करने के बाद जब भुगतान के लिए जांच होती है जब जीएसटी चोरी का खेल पकड़ में आ जाता है। सीए अशोक पटेल ने बताया कि जीएसटी रिफंड के लिए दस्तावेज देने वाले कुछ व्यक्ति तो इस खेल से पूरी तरह अंजान हैं लेकिन कुछ दस्तावेजों के बदले प्रतिमाह 15 से 30 हजार रुपये किराया वसूलते हैं।
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फर्जी निर्यात के नाम पर होती है रिफंड वसूली
भारत से नेपाल को निर्यात होने वाले सामग्रियों को जीएसटी (कर) मुक्त की श्रेणी में रखा गया है। धंधेबाज इसी नियम का फायदा उठाने में लगे रहते हैं। बताया जाता है कि इस कारोबार में संलिप्त लोगों की ओर से पंजीकृत फर्म पर नेपाल में निर्यात के लिए लाखों की सामग्री का बिल बाउचर बनवा लिया जाता है और जिम्मेदारों की सांठगांठ से कथित सामग्रियां कागजों में ही नेपाल भी पहुंच जाती हैं। विभाग के जिम्मेदार भी संबंधित फर्म के रिफंड की अनुमति रिपोर्ट अग्रसारित कर देते हैं। जबकि नेपाल को निर्यात के लिए जाने वाले सामग्रियों का विभाग के जिम्मेदारों द्वारा भौतिक सत्यापन करने के बाद ही अपनी रिपोर्ट अग्रसारित करने का नियम है। ऐसे में सवाल है कि बिना सामान नेपाल पहुंचे किस आधार पर संबंधित फर्म को रिफंड मिल जा रहा है? संवाद
वर्जन
कुछ व्यापारी बिना बिल का माल बेचते हैं। प्राइवेट ट्रांसपोर्ट के माध्यम से यह माल बाहर तक भेजा जाता है। बिल में हेराफेरी कर जीएसटी में चोरी करते हैं। यह इसलिए पकड़ में नहीं आते क्योंकि प्राइवेट ट्रांसपोर्ट पर विभाग की नजर कम होती है। इसलिए ट्रांसपोर्टर निकल जाते हैं। सरकारी वाहनों में डिटेल देना होता है इसलिए इसमें चोरी नहीं की जा सकती। कुछ व्यापारी प्राइवेट ट्रांसपोर्ट से माल मंगा लेते हैं इसलिए वह पकड़ में नहीं आते और जीएसटी चोरी की आशंका बनी रहती है।
-कपिल देव, जीएसटी अधिवक्ता
दो माह के अंदर दो व्यक्तियों के चार ठिकानों पर हुई छापेमारी
केस-1
गत 25 फरवरी को वाराणसी से आई केंद्रीय जीएसटी की टीम ने कस्बे के घंटाघर चौक पर स्थित एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) के कार्यालय एवं आवास पर छापेमारी की थी। घंटों छापेमारी के बाद देर शाम अधिकारी सीए का लैपटॉप, हार्ड डिस्क समेत विभिन्न दस्तावेजों को जब्त कर उन्हें समन देकर तलब किया था। लेकिन आज तक सीए जीएसटी कार्यालय नहीं पहुंचे।
केस-2
गत 30 अप्रैल को जांच के दायरे में आने पर नौतनवा कस्बे के एक कपड़ा व्यवसायी के गौतमबुद्ध नगर वार्ड स्थित घर एवं जानकी नगर वार्ड स्थित दुकान में छापेमारी की गई। दस्तावेजों के मिलान और पूछताछ में मामला फर्जीवाड़ा से जुड़ा हुआ सामने आने पर अधिकारियों ने उक्त फर्म से संबंधित स्वामी को भी समन देकर तलब किया है।