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Maharajganj News: रामू और पतिराज ने एक साथ शुरू की थी ड्यूटी, दोनों की हादसे में गई जान

Wed, 05 Aug 2026 01:42 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 05 Aug 2026 01:42 AM IST
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Ramu and Patiraj started their duties together, but both died in an accident.
जुलाई में दोनों ने एक साथ शुरू किया था टैंकर पर काम
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आजमगढ़ में मालटारी-मिर्जापुर मार्ग स्थित विद्युत उपकेंद्र के पास देर रात हुए हादसे का मामला, दमकल की छह गाड़ियों ने आग पर पाया काबू
आजमगढ़/महराजगंज। फरेंदा क्षेत्र के गढ़वा गांव के रामू यादव (20) अपने माता-पिता के इकलाैते बेटे थे। दिसंबर में उसकी शादी होने वाली थी। पति राज और रामू ने एक साथ ही काम शुरू किया था। अब दोनों की एक साथ ही मौत भी हो गई।
परिजन के अनुसार, रामू की शादी दिसंबर में तय थी और घर में तैयारियां शुरू हो चुकी थीं। हादसे की सूचना मिलते ही खुशियों का माहौल मातम में बदल गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। फरेंदा थाना क्षेत्र के चौतरवा गांव के पतिराज प्रसाद (25) पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए पतिराज ने हाल ही में टैंकर पर खलासी का काम शुरू किया था।
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परिजन ने बताया कि रामू यादव और पतिराज प्रसाद ने जुलाई में ही टैंकर पर एक साथ काम शुरू किया था। दोनों साथ ही ड्यूटी करते थे और दुर्भाग्य से एक ही हादसे में दोनों की एक साथ जिंदा जलकर मौत हो गई। घटना से दोनों परिवारों में मातम पसरा है और गांव में शोक का माहौल है।
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आग इतनी भीषण थी कि टैंकर से तीनों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला
मालटारी-मिर्जापुर स्थित विद्युत उपकेंद्र के पास पेट्रोल से भरे टैंकर में लगी आग इतनी विकराल थी कि उसमें सवार चालक, खलासी और पेट्रोल पंप कर्मचारी को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल सका।
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि टैंकर पलटते ही तेज धमाके के साथ आग की लपटें उठने लगीं और कुछ ही मिनटों में पूरा टैंकर आग का गोला बन गया। आसपास मौजूद लोग चाहकर भी मदद नहीं कर सके। दमकल की गाड़ियां पहुंचने तक टैंकर पूरी तरह आग की चपेट में आ चुका था।

भीखमपुर गांव के प्रदीप कुमार (26) पिछले पांच साल से बिलरियागंज के अंडाखोर स्थित श्रेया फिलिंग स्टेशन पर काम करते थे। मालटारी के पास हुए हादसे में उनकी जलकर मौत हो गई। शव की पहचान जली हुई शर्ट के आधार पर भाई ने की। प्रदीप पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर थे और उनकी दो बहनें हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

30 से अधिक गांवों की बिजली गुल
टैंकर की टक्कर से ट्रांसफार्मर लगा बिजली का पोल क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे मालटारी-मिर्जापुर विद्युत उपकेंद्र से जुड़े 30 से अधिक गांवों की बिजली आपूर्ति 20 घंटे तक ठप रही। अंजान शहीद, नदौरा, देवापार, पारीपट्टी, राजूपट्टी, गडेरीपट्टी, पकवाइनार, पतार, बगवार, नूरुद्दीनपुर और छतरपुर समेत कई गांवों में पूरी रात अंधेरा छाया रहा। उमस भरी गर्मी में लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। छोटे उद्योग-धंधे भी प्रभावित हुए। मंगलवार को बिजली विभाग ने नया खंभा और ट्रांसफार्मर लगाने का कार्य शुरू कराया। जले टैंकर को क्रेन की मदद से सड़क से हटाया गया।
11.30 घंटे तक बंद रहा जीयनपुर-बिलरियागंज मार्ग
सगड़ी। सोमवार रात करीब 10.30 बजे हुए हादसे के बाद जीयनपुर-बिलरियागंज मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप रहा। टैंकर में लगी आग बुझाने के लिए दमकल की छह गाड़ियां रात से मंगलवार सुबह तक लगी रहीं। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने मार्ग को बंद कर वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा। मंगलवार सुबह करीब 9:30 बजे क्रेन से जले टैंकर को हटाने के बाद सड़क की साफ कराई गई और करीब 10 बजे यातायात सामान्य हो सका। इस तरह करीब 11:30 घंटे तक दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।
रातभर डटे रहे पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी
सगड़ी। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। एसडीएम सगड़ी संजीव कुमार राय, तहसीलदार नवीन निश्चल त्रिपाठी, नायब तहसीलदार आदर्श सिंह, हल्का लेखपाल समरजीत यादव, सीओ सगड़ी भूपेश पांडेय तथा जीयनपुर कोतवाल संजय सिंह और बिलरियागंज थाना प्रभारी अमित कुमार मिश्रा पुलिस बल के साथ मंगलवार सुबह तक मौके पर डटे रहे। अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी की, भीड़ को घटनास्थल से दूर रखा और यातायात व्यवस्था को सुचारू कराने में जुटे रहे। दमकल के छह वाहनों के साथ पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान संचालित किया। संवाद

बुरी तरह जले शव की पहचान में उलझे परिजन

आजमगढ़। भीषण आग में तीनों शव इस कदर झुलस गए थे कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया। परिजन लंबे समय तक शवों की पहचान को लेकर असमंजस में रहे। मृतकों के कपड़ों और अन्य उपलब्ध संकेतों के आधार पर पहचान कराने का प्रयास किया गया। मेंहनगर के भीखमपुर निवासी प्रदीप कुमार की पहचान उसके भाई ने जली हुई शर्ट से की। अन्य दो मृतकों की पहचान कराने में भी पुलिस और परिजनों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कभी परिजन कहते कि यह मेरे बच्चे का शव है, तो कभी कहते कि यह मेरे बच्चे का शव है। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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