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Maharajganj News: रामग्राम को मिलेगा पहचान, उत्खनन से उम्मीदों को मिल रहा बल

Tue, 17 Dec 2024 12:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Tue, 17 Dec 2024 12:50 AM IST
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Ramgram will get recognition, hopes are getting strengthened due to excavation
रामग्राम में उत्खनन में दिवाल की आकृति।
महराजगंज। चौक बाजार क्षेत्र में रामग्राम टीले पर उत्खनन कार्य चल रहा है। इससे उम्मीदों को बल मिल रहा है। पहले जिन तथ्यों का उल्लेख किया था, उससे जुड़ी सामाग्री मिलने से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में रामग्राम को पहचान जरूरी मिलेगी। बताया जाता है कि महात्मा बुद्ध का आठवां अस्थि कलश यहीं है। उत्खनन के बाद मिले तथ्यों से इसका प्रमाण मिल गया तो जिले का नाम विश्व पटल पर आ जाएगा। क्षेत्र में पर्यटन विकास के साथ ही रोजगार की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
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इतिहासकारों के अनुसार, महात्मा बुद्ध के कुशीनगर में निर्वाण प्राप्त करने के बाद उनके अनुयायी राजा वहां पहुंचे। बुद्ध की अस्थियों को अपने साथ ले जाने की बात पर उनके बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई। इसी दौरान किसी ने सुझाया कि अस्थियों को आठ हिस्सों में बांटकर हर किसी को एक-एक हिस्सा सौंप दिया जाए। अस्थियों के आठवें हिस्से को कोलिय वंश के राजा महाकाल अपने साथ ले आए और रामग्राम में उसके ऊपर धातु स्तूप का निर्माण कराया।
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कुषाण व गुप्त कालखंड में इसे विस्तृत आकार दिया गया। बाद में बौद्ध धर्म ग्रहण करने के बाद सम्राट अशोक ने बुद्ध की अस्थियों के सातों हिस्सों को निकवाकर सैकड़ों हिस्सों में बांटा और देश-दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भेजवाकर बौद्ध धर्म का प्रचार किया। कहा जाता है कि सम्राट अशोक अस्थियों के लिए रामग्राम भी पहुंचा था, लेकिन यहां जंगली जानवरों को अस्थि स्तूप की परिक्रमा करते देख वह आश्चर्यचकित रह गया और अस्थियों का कुछ हिस्सा यहां से निकलवाने का विचार त्याग दिया। ऐसे में रामग्राम स्तूप ही वह स्थान है जहां भगवान बुद्ध की अस्थियों के आठ हिस्सों में से एक हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित है। इन्हीं बिंदुओं की प्रमाणिकता के लिए उत्खनन हो रहा है।
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जिले को बौद्ध भूमि के रूप में दुनिया में मिलेगी नई पहचान

सैन्य विज्ञान के पूर्व विभागाध्यक्ष, डॉ. परशुराम गुप्त ने बताया कि मेरी पुस्तक जनपद महराजगंज के बौद्ध स्थल देवदह-रामग्राम-कुंवरवर्ती स्तूप’ में महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख है। आने वाले दिनों में जिले को बौद्ध भूमि के रूप में दुनिया में नई पहचान मिलेगी। सम्राट हर्षवर्द्धन के शासन काल में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने महत्वपूर्ण बौद्ध स्थलों का भ्रमण किया था।

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मिट्टी के टूटे बर्तन मिलने पर पुरातत्व विभाग की टीम उत्साहित

महराजगंज। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से उत्खनन में सोमवार को 24वें दिन दो ब्लाॅकों की खोदाई बंद करा दी गई है। तीसरे ब्लाॅक की खोदाई शुरू की गई है, जिसमें सोमवार की सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक कि खोदाई में 20 सेमी गहरी खोदाई हुई। इसमें छोटे-छोटे चपटे ईंट व भुरभुरी मिट्टी मिली है। पुरातत्वविद आफताब हुसैन ने बताया कि पहले ब्लॉक में 169 सेमी व दूसरे ब्लॉक में 450 सेमी खोदाई कर बंद कर दिया गया है, जिसमें से मिट्टी के टूटे बर्तन मिलने पर पुरातत्व विभाग की टीम उत्साहित है। बड़ी संख्या में सजावटी ईंटें और ईंटों की एक अलंकारित दीवार भी मिली है। किसी प्राचीन भवन का खंडहर प्रतीत होता है।
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