फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Rain proved beneficial for smugglers, Chinese are crossing the border

Maharajganj News: तस्करों के लिए मुफीद बनी बारिश, चीनी कर रहे सरहद पार

Tue, 24 Jun 2025 12:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Tue, 24 Jun 2025 12:44 AM IST
विज्ञापन
Rain proved beneficial for smugglers, Chinese are crossing the border
सोनौली। चीनी की तस्करी फिर तेज हो गई है। बारिश का फायदा भी तस्कर उठा रहे हैं। बीते दिनों लक्ष्मीपुर क्षेत्र से 70 बोरी चीनी बरामद हुई थी। क्षेत्र में तस्कर चीनी का अवैध गोदाम में भंडारण कर रहे हैं। इस समय सीमा पर चीनी तस्करी जोरों पर है।
विज्ञापन

भारतीय क्षेत्र में 44-45 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी नेपाल पहुंचते ही 70-80 रुपये प्रति किलो में बेची जा रही है, जिससे तस्करों को बड़ा मुनाफा हो रहा है। सूत्रों की माने तो मोहर्रम पर्व के मद्देनजर हाल के दिनों में चीनी की तस्करी बढ़ी है, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
विज्ञापन

सूत्रों के अनुसार, एक बोरी चीनी की तस्करी पर करीब 1400 रुपये का लाभ होता है। रोजाना 50 से अधिक तस्कर साइकिल से 50 किलो के बोरों को पगडंडियों के रास्ते नेपाल पहुंचा रहे हैं। सोनौली सीमा के पास स्थित दो नंबर, तीन नंबर गलियों से कैरियर चीनी के बोरे पार कर रहे हैं। भारतीय क्षेत्र में पिकअप और अन्य वाहनों से चीनी की खेप लाई जाती है, जिसे बॉर्डर पार कराने के लिए कैरियरों को 200 से 300 रुपये तक दिए जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

सूत्र बताते हैं कि नेपाल से सटे ठूठीबारी, लक्ष्मीपुर, झुलनीपुर, माधवरामनगर, सोनौली, कैलासनगर, खनुवा और कोल्हुई थाना झेत्र के जोगियाबारी के निकट सीमावर्ती गांव सहित दर्जनों सीमावर्ती गांव तस्करी के प्रमुख ठिकाने बने हुए हैं, जहां चीनी डंप की जाती है और मौका मिलते ही नेपाल भेज दी जाती है। भारत सरकार की ओर से चीनी के निर्यात पर रोक लगाए जाने के कारण इसकी तस्करी तेजी से बढ़ी है।
सीमावर्ती बाजार नौतनवा, सोनौली, ठूठीबारी और सिसवा में जीएसटी बिल पर चीनी की खेप मंगवाई जाती है और असली बिल के साथ सीमावर्ती गांवों तक पहुंचाई जाती है। वहां इसे गोदामों में जमा करने के बाद बिल को सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए रखा जाता है। फिर साइकिलों से नेपाल भेजा जाता है। उसके बाद बिल को रद्द कर दिया जाता है। सीमावर्ती कस्बा नौतनवा, सोनौली, ठूठीबारी, सिसवा और निचलौल तक चीनी आसानी से आ जाती है।

क्षेत्राधिकारी नौतनवा जय प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि कड़ी निगरानी की जा रही है। पगडंडियों पर विशेष नजर है। मामला संज्ञान में आते ही त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
2023 से चीनी निर्यात पर है भारत ने लगा रखी है रोक
नेपाल में चीनी महंगी होने के चलते भारत से तस्करी की जा रही है। भारत सरकार द्वारा चीनी नेपाल निर्यात पर 2023 से रोक लगाई गई है। इसके लिए भारत सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया था जिसमे यह निर्देशित था कि अगले आदेश तक चीनी नेपाल नहीं जाएगी। सीमावर्ती बाजारों से पांच किलो चीनी प्रत्येक चक्कर में प्रतिदिन 100 एमटी चीनी नेपाल आसानी से चली जा रही है। इसके साथ ही साइकिल दो पहिया वाहनों से चीनी की बोरियों की तस्करी की जा रही है।


टैक्स इनवॉइस की जगह डिलेवरी चालान का उपयोग
नेपाल सामानों की मांग के अनुसार तस्करी शुरू हो जाती है। इधर मोहर्रम पर्व निकट है। इसको लेकर जनपद में चीनी तस्कर सक्रिय हो गए हैं। तस्कर बहुत ही गोपनीय तरीके से काम करते हैं। यह काला कारोबार बहुत ही गुप्त तरीके से किया जा रहा है, न बिल और न कोई कागजात। कहा जा रहा है। मिलों से पहले चीनी नौतनवा, सोनौली, ठूठीबारी निचलौल और सिसवा में मंगवाई जाती है। फिर असली बिल पर पिकअप से सिंगल मार्ग से चीनी सीमावर्ती गांव पहुंच रही है। ठिकाने पर पहुंचने के बाद बिल को फाड़ दिया जाता है। 50 हजार के कम मूल्य के हाथ वाले डिलेवरी चालान बनाए जाते हैं, जबकि इसके लिए टैक्स इंवॉइस जारी करना अनिवार्य है। थोक कारोबारी इसके लिए अनिवार्य ईवे-बिल नहीं बनाते। इसके बाद फिर उसी बिल पर दिन भर सीमावर्ती गांव में चीनी को गोदाम में डंप कर साइकिल कैरियर से नेपाल पहुंचा रहे है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed