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Maharajganj News: भिवानी में सीखी बाक्सिंग, राहुल ने गरीबी को हराया
Sun, 13 Jul 2025 12:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 13 Jul 2025 12:06 AM IST
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महराजगंज। बागापार के 23 वर्षीय राहुल ने हरियाणा के भिवानी क्लब में बाॅक्सिंग प्रशिक्षण लेकर अपने साथ परिवार की गरीबी को भी पराजित किया है। उन्होंने 2017 के नेशनल जूनियर बाॅक्सिंग चैंपियनशिप में प्रतिभाग कर सिल्वर अपने नाम किया। अब वह बीपीएड के साथ नेशनल में गोल्ड को लक्ष्य बनाकर गुजरात से प्रशिक्षण ले रहे हैं।
सदर तहसील क्षेत्र के बागापार राहुल चौरसिया के पिता रामप्रीत गुजरात की एक कपड़ा फैक्ट्री में मजदूर हैं। राहुल अपनी मां रमावती के साथ घर रहकर प्राथमिक शिक्षा पूरी कर रहे थे। बताया कि 14 वर्ष की आयु में वह जब 8वीं उत्तीर्ण हुए तो खेल में आगे बढ़ने की ठानी। क्योंकि बाॅक्सिंग के प्रति रुचि बचपन से थी। मैंने प्रशिक्षण के लिए पिता जी से कहा तो उन्होंने कहा कि घर कैसे चल रहा यह देख रहे हो मजदूर के बेटे हो इसलिए वही सोच रखो जो मैं पूरा कर सकूं।
बाहर भेजकर प्रशिक्षण देने की व्यवस्था कैसे होगी। मुझे पिताजी की बात ठीक तो लगी, लेकिन मैं सोचता रहा कि क्या मजदूर का बेटा ऊंचे सपने नहीं देख सकता। मैंने मां से कहा तो उन्होंने हौसला दिया और गोरखपुर एक जानने वाले का पता दिया, जिनकी गोरखपुर में काॅपी-किताब की दुकान थी।
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मैं दिन में उनकी दुकान का काम करता था और सुबह-शाम 10 बजे से पहले रीजनल स्टेडियम में प्रशिक्षण लेता था। लगभग आठ महीने तक प्रशिक्षण लेकर मैं हरियाणा के भिवानी चला गया जहां का द्रोणाचार्य बाॅक्सिंग क्लब मशहूर है। वहां रहकर मैंने पार्ट टाइम तलाश कर प्रशिक्षण लेना शुरू किया।
2017 जूनियर बाॅक्सिंग में मैं गोरखपुर मंडल से चुना गया तो स्टेट व इसी वर्ष दिल्ली तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित नेशनल जूनियर चैंपियनशिप में पहुंचा और मैंने नेशनल में सिल्वर जीता। सीनियर नेशनल गोल्ड मेरा लक्ष्य है, जिसके लिए मैं इस समय गुजरात रहकर बीपीएड की शिक्षा के साथ प्रशिक्षण भी ले रहा हूं।
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सदर तहसील क्षेत्र के बागापार राहुल चौरसिया के पिता रामप्रीत गुजरात की एक कपड़ा फैक्ट्री में मजदूर हैं। राहुल अपनी मां रमावती के साथ घर रहकर प्राथमिक शिक्षा पूरी कर रहे थे। बताया कि 14 वर्ष की आयु में वह जब 8वीं उत्तीर्ण हुए तो खेल में आगे बढ़ने की ठानी। क्योंकि बाॅक्सिंग के प्रति रुचि बचपन से थी। मैंने प्रशिक्षण के लिए पिता जी से कहा तो उन्होंने कहा कि घर कैसे चल रहा यह देख रहे हो मजदूर के बेटे हो इसलिए वही सोच रखो जो मैं पूरा कर सकूं।
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बाहर भेजकर प्रशिक्षण देने की व्यवस्था कैसे होगी। मुझे पिताजी की बात ठीक तो लगी, लेकिन मैं सोचता रहा कि क्या मजदूर का बेटा ऊंचे सपने नहीं देख सकता। मैंने मां से कहा तो उन्होंने हौसला दिया और गोरखपुर एक जानने वाले का पता दिया, जिनकी गोरखपुर में काॅपी-किताब की दुकान थी।
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मैं दिन में उनकी दुकान का काम करता था और सुबह-शाम 10 बजे से पहले रीजनल स्टेडियम में प्रशिक्षण लेता था। लगभग आठ महीने तक प्रशिक्षण लेकर मैं हरियाणा के भिवानी चला गया जहां का द्रोणाचार्य बाॅक्सिंग क्लब मशहूर है। वहां रहकर मैंने पार्ट टाइम तलाश कर प्रशिक्षण लेना शुरू किया।
2017 जूनियर बाॅक्सिंग में मैं गोरखपुर मंडल से चुना गया तो स्टेट व इसी वर्ष दिल्ली तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित नेशनल जूनियर चैंपियनशिप में पहुंचा और मैंने नेशनल में सिल्वर जीता। सीनियर नेशनल गोल्ड मेरा लक्ष्य है, जिसके लिए मैं इस समय गुजरात रहकर बीपीएड की शिक्षा के साथ प्रशिक्षण भी ले रहा हूं।