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Maharajganj News: अधिवक्ता संशोधन विधेयक के विरोध में प्रदर्शन
Fri, 21 Feb 2025 05:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 21 Feb 2025 05:36 PM IST
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महराजगंज। अधिवक्ता संशोधन विधेयक के खिलाफ शुक्रवार को जनपद के अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया। इसके बाद राष्ट्रपति को संबोधित मांग पत्र डीएम को सौंपा। उधर, तहसील में भी अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया।
सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष करुणाकरपति त्रिपाठी ने कहा कि सरकार अधिकार देने की जगह छीनकर स्वायत्त संस्थाओं पर कब्जा चाहती है, जिसे किसी कीमत पर पूरा नहीं होने दिया जाएगा। अधिवक्ताओं ने प्रस्तावित विधेयक की प्रतियों को प्रतीकात्मक रूप में जलाकर प्रदर्शन किया।
शुक्रवार को जनपद के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे और सिविल के अलावा कलक्ट्रेट व टैक्स बार एसोसिएशन के बैनर तले विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए। टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया में केंद्र सरकार अपने तीन सदस्य शामिल करना चाहती है, जिससे अधिवक्ताओं के मामलों में सरकार का नियंत्रण हो जाए जो हमें कमजोर करने की साजिश और न्यायतंत्र के निजीकरण का प्रयास है।
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कलक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जीतेंद्र लाल श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार को अधिवक्ताओं को पेंशन, बीमा और स्टार्टअप फंड देकर उन्हें अधिकार देने की जगह जो अधिकार हैं उसे भी छीनने का प्रयास कर रही है। सिविल बार एसोसिएशन के महामंत्री अनूप सिंह ने कहा कि यह संशोधन विधेयक अधिवक्ताओं के मौलिक अधिकारों के विरुद्ध है। यदि अधिवक्ता की विधिक सेवाएं स्वतंत्र नहीं रहेंगी तो वह सरकार के विरुद्ध मुकदमों की पैरवी कैसे करेगा।
संशोधन विधेयक के माध्यम से सरकार देश की अन्य संस्थाओं की भांति न्यायिक सेवा पर भी अपने राजनीतिक लाभ के लिए नियंत्रण करना चाह रही है। विरोध प्रदर्शन में रविशंकर त्रिपाठी, गिरिजेश मिश्रा,उमेश तिवारी, आफताब अंसारी, अजय चौधरी, अजय वर्मा, पूर्व अध्यक्ष शंभू शरण पांडेय, इंद्रासन सिंह, हमीदुल्लाह खान, राघवेंद्र सिंह, चंदन केडिया आदि मौजूद रहे। रेवेन्यू बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अष्टभुजा वर्मा व महामंत्री परमात्मा सिंह भी शामिल रहे।
फरेंदा प्रतिनिधि के अनुसार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के आह्वान पर सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन फरेंदा के अधिवक्ताओं ने शुक्रवार को अधिवक्ता संशोधन विधेयक 2025 के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर कलम बंद हड़ताल किया। साथ ही मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी मुकेश कुमार सिंह को सौंपा।
इस मौके पर अध्यक्ष रविंद्र नाथ उपाध्याय, महामंत्री अनिल पासवान, अरविंद मिश्र, सुधेश मोहन श्रीवास्तव, मनोज मिश्र, डीएन चतुर्वेदी, रामसहाय गुप्ता, स्कंद श्रीवास्तव मौजूद रहे। इसी क्रम में रेवन्यू बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता अधिनियम 1961 के संशोधन प्रस्तावित बिल के विरोध में प्रदर्शन कर तहसीलदार वशिष्ठ वर्मा को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर अध्यक्ष अष्टभुजा वर्मा, मंत्री परमात्मा सिंह, सेराज अहमद, राघवेंद्र तिवारी, संजय मिश्रा मौजूद रहे।
निचलौल व नौतनवा प्रतिनिधि के अनुसार, तहसील परिसर में अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। उसके बाद अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं का कहना है कि 21 फरवरी को भारत सरकार की ओर से अधिवक्ता अधिनियम से संबंधित कानून में संशोधन कर अधिवक्ताओं के अधिकार का हनन करने का प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संगम पांडेय, विजय तिवारी, विरेंद्र तिवारी, हरिश्चंद्र पांडेय, नवीन मिश्रा, त्रिपुरेश पांडेय, सुनील चौधरी मौजूद रहे।
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सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष करुणाकरपति त्रिपाठी ने कहा कि सरकार अधिकार देने की जगह छीनकर स्वायत्त संस्थाओं पर कब्जा चाहती है, जिसे किसी कीमत पर पूरा नहीं होने दिया जाएगा। अधिवक्ताओं ने प्रस्तावित विधेयक की प्रतियों को प्रतीकात्मक रूप में जलाकर प्रदर्शन किया।
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शुक्रवार को जनपद के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे और सिविल के अलावा कलक्ट्रेट व टैक्स बार एसोसिएशन के बैनर तले विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए। टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया में केंद्र सरकार अपने तीन सदस्य शामिल करना चाहती है, जिससे अधिवक्ताओं के मामलों में सरकार का नियंत्रण हो जाए जो हमें कमजोर करने की साजिश और न्यायतंत्र के निजीकरण का प्रयास है।
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कलक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जीतेंद्र लाल श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार को अधिवक्ताओं को पेंशन, बीमा और स्टार्टअप फंड देकर उन्हें अधिकार देने की जगह जो अधिकार हैं उसे भी छीनने का प्रयास कर रही है। सिविल बार एसोसिएशन के महामंत्री अनूप सिंह ने कहा कि यह संशोधन विधेयक अधिवक्ताओं के मौलिक अधिकारों के विरुद्ध है। यदि अधिवक्ता की विधिक सेवाएं स्वतंत्र नहीं रहेंगी तो वह सरकार के विरुद्ध मुकदमों की पैरवी कैसे करेगा।
संशोधन विधेयक के माध्यम से सरकार देश की अन्य संस्थाओं की भांति न्यायिक सेवा पर भी अपने राजनीतिक लाभ के लिए नियंत्रण करना चाह रही है। विरोध प्रदर्शन में रविशंकर त्रिपाठी, गिरिजेश मिश्रा,उमेश तिवारी, आफताब अंसारी, अजय चौधरी, अजय वर्मा, पूर्व अध्यक्ष शंभू शरण पांडेय, इंद्रासन सिंह, हमीदुल्लाह खान, राघवेंद्र सिंह, चंदन केडिया आदि मौजूद रहे। रेवेन्यू बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अष्टभुजा वर्मा व महामंत्री परमात्मा सिंह भी शामिल रहे।
फरेंदा प्रतिनिधि के अनुसार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के आह्वान पर सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन फरेंदा के अधिवक्ताओं ने शुक्रवार को अधिवक्ता संशोधन विधेयक 2025 के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर कलम बंद हड़ताल किया। साथ ही मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी मुकेश कुमार सिंह को सौंपा।
इस मौके पर अध्यक्ष रविंद्र नाथ उपाध्याय, महामंत्री अनिल पासवान, अरविंद मिश्र, सुधेश मोहन श्रीवास्तव, मनोज मिश्र, डीएन चतुर्वेदी, रामसहाय गुप्ता, स्कंद श्रीवास्तव मौजूद रहे। इसी क्रम में रेवन्यू बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता अधिनियम 1961 के संशोधन प्रस्तावित बिल के विरोध में प्रदर्शन कर तहसीलदार वशिष्ठ वर्मा को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर अध्यक्ष अष्टभुजा वर्मा, मंत्री परमात्मा सिंह, सेराज अहमद, राघवेंद्र तिवारी, संजय मिश्रा मौजूद रहे।
निचलौल व नौतनवा प्रतिनिधि के अनुसार, तहसील परिसर में अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। उसके बाद अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं का कहना है कि 21 फरवरी को भारत सरकार की ओर से अधिवक्ता अधिनियम से संबंधित कानून में संशोधन कर अधिवक्ताओं के अधिकार का हनन करने का प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संगम पांडेय, विजय तिवारी, विरेंद्र तिवारी, हरिश्चंद्र पांडेय, नवीन मिश्रा, त्रिपुरेश पांडेय, सुनील चौधरी मौजूद रहे।