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एकजुट होकर ही हिंदू संस्कृति की रक्षा संभव : नागेंद्र
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फरेंदा क्षेत्र के रतनपुर गांव के एक मैरिज हॉल में आयोजित हुआ हिंदू सम्मेलन
फरेंदा। क्षेत्र के रतनपुर में हिन्दू सम्मेलन का आयोजन सोमवार को किया गया। सम्मेलन में बंगलादेश में हाे रहे हिंदूओं पर बर्बरता पर दुख प्रकट करते हुए एकजुट होने का आह्वान किया गया। सम्मेलन के मुख्य वक्ता नागेंद्र रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कपिलदेव ने की।
मुख्य वक्ता नागेंद्र ने कहा कि एकजुट होकर ही भारतीय संस्कृति की रक्षा संभव है। बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि समाज को सजग एवं जागरूक रहने का की जरूरत है। हमारे ऋषि-मुनियों एवं विद्वानों द्वारा संस्कृति की रक्षा हेतु किए गए कार्य अद्वितीय एवं अनुकरणीय हैं। कपिलदेव ने कहा कि राजनीति राष्ट्रहित में होनी चाहिए। हमारे संस्कार सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय हों जिससे मिशनरी सभ्यता का प्रभाव हमारे बच्चों पर न पड़े। हमारे बच्चे भारतीय संस्कृति से युक्त हों और उनका जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पित हो। प्रेम नारायण पांडेय ने कहा कि “राष्ट्र प्रथम” हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। एक समय था जब लोगों को स्वयं को हिन्दू कहने में संकोच होता था, किंतु आज हिन्दू समाज में व्यापक जागरण आया है। इसके बावजूद हमें विरोधी शक्तियों से सतर्क रहने की आवश्यकता है। मंच संचालन रामसरन गुप्ता ने किया। इस दौरान हिमांशु, सुनील पांडेय, प्रशांत मणि,नवीन सोनकर, शिवम जायसवाल, कमल यादव, चंद्रशेखर, राकेश मणि मौजूद रहे।
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फरेंदा। क्षेत्र के रतनपुर में हिन्दू सम्मेलन का आयोजन सोमवार को किया गया। सम्मेलन में बंगलादेश में हाे रहे हिंदूओं पर बर्बरता पर दुख प्रकट करते हुए एकजुट होने का आह्वान किया गया। सम्मेलन के मुख्य वक्ता नागेंद्र रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कपिलदेव ने की।
मुख्य वक्ता नागेंद्र ने कहा कि एकजुट होकर ही भारतीय संस्कृति की रक्षा संभव है। बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि समाज को सजग एवं जागरूक रहने का की जरूरत है। हमारे ऋषि-मुनियों एवं विद्वानों द्वारा संस्कृति की रक्षा हेतु किए गए कार्य अद्वितीय एवं अनुकरणीय हैं। कपिलदेव ने कहा कि राजनीति राष्ट्रहित में होनी चाहिए। हमारे संस्कार सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय हों जिससे मिशनरी सभ्यता का प्रभाव हमारे बच्चों पर न पड़े। हमारे बच्चे भारतीय संस्कृति से युक्त हों और उनका जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पित हो। प्रेम नारायण पांडेय ने कहा कि “राष्ट्र प्रथम” हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। एक समय था जब लोगों को स्वयं को हिन्दू कहने में संकोच होता था, किंतु आज हिन्दू समाज में व्यापक जागरण आया है। इसके बावजूद हमें विरोधी शक्तियों से सतर्क रहने की आवश्यकता है। मंच संचालन रामसरन गुप्ता ने किया। इस दौरान हिमांशु, सुनील पांडेय, प्रशांत मणि,नवीन सोनकर, शिवम जायसवाल, कमल यादव, चंद्रशेखर, राकेश मणि मौजूद रहे।
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