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Maharajganj News: कजरी में बही सुपोषण की बयार, कुपोषण हो रहा दूर

Sun, 29 Jan 2023 05:00 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 29 Jan 2023 05:00 AM IST
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problem erased of malnutrition in kajari village
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को सम्मानित करते सीडीपीओ अनुराग त्रिपाठी। - फोटो : MAHARAJGANJ
कजरी में बही सुपोषण की बयार, कुपोषण हो रहा दूर
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ग्रोथ चार्ट से केंद्र पर पंजीकृत 140 बच्चों के नियमित फॉलोअप की वजह से केवल दो बच्चे कुपोषित की श्रेणी में रह गए
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। लक्ष्मीपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत कजरी में सुपोषण की बयार बह रही है। ग्रोथ चार्ट से केंद्र पर पंजीकृत 140 बच्चों के नियमित फॉलोअप की वजह से आंगनबाड़ी केंद्र पर केवल दो बच्चे कुपोषित की श्रेणी में रह गए हैं। एक भी बच्चा अति कुपोषित की श्रेणी में नहीं है।
सुपरवाइजर पतासी देवी ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र कजरी पर पंजीकृत बच्चों में छह माह से तीन साल के 71 तथा तीन से छह साल के 69 बच्चे शामिल हैं। केंद्र पर 16 गर्भवती और 12 धात्री महिलाएं पंजीकृत हैं। गर्भवती को जहां समय-समय पर चेकअप और टीकाकरण के लिए प्रेरित किया जाता है, वहीं, धात्री महिलाओं को समूह में बैठाकर स्तनपान कराने का तरीका भी बताया जाता है। कभी-कभी डेमो के जरिए भी स्तनपान कराने का भी तरीका बताया जाता है।
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सीमा ने बताया कि लाभार्थियों को केंद्र के माध्यम से मिलने वाले सूखा राशन ( पोषाहार) से विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर सेवन करने के लिए बताया जाता है। गर्भवती को पौष्टिक आहार लेते रहने की सलाह दी जाती है। कारण यह कि उसका असर बच्चे पर भी पड़ता है। मां अगर सेहतमंद होगी तो बच्चा भी स्वस्थ होगा।
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धात्री महिलाओं को छह माह तक सिर्फ और सिर्फ स्तनपान कराने तथा छह माह बाद पूरक आहार के साथ दो साल तक स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया बीते नवंबर व दिसंबर माह में केंद्र के तीन अति कुपोषित बच्चों को सुपोषित किया गया।
पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया
सुपोषित हुए रितेश (32 माह) की मां विंद्रावती ने बताया कि जब उनका बच्चा सात माह का था, उसे हमेशा बुखार रहता था और उल्टी-दस्त भी होता था। बच्चा हमेशा सुस्त रहता था। गांव के चिकित्सकों से दवा कराती थीं, लेकिन कोई फायदा नहीं होता था। एक दिन गृह भ्रमण के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर पर आईं । बच्चे को देखीं। वजन और लम्बाई ली। पांच अक्तूबर 2022 को एनआरसी पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया। वहां दो सप्ताह रहने के बाद छुट्टी मिली। अब रितेश पूरी तरह से ठीक है।

कोट
उत्कृष्ट कार्यों की वजह से कजरी गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सीमा मौर्य को सम्मानित किया गया। विभागीय स्तर पर समीक्षा में भी इनका कार्य बेहतर रहा। बच्चों को सुपोषित बनाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है।
-अनुराग मणि त्रिपाठी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, लक्ष्मीपुर
इन बिंदुओं पर किया गया प्रयास
गर्भवती को पौष्टिक आहार लेने और धात्री महिलाओं को स्तनपान कराने की देती हैं सलाह।
केंद्र पर पंजीकृत 140 बच्चों की ग्रोथ चार्ट से करती हैं मॉनीटरिंग।
धात्री महिलाओं को समूह में बैठाकर स्तनपान कराने का तरीका भी बताया।
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