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Maharajganj News: दशहरा पर्व मनाने 40 वर्ष बाद अपने गृहनगर पहुंचे पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष
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दशहरा पर्व मनाने 40 वर्ष बाद अपने गृहनगर पहुंचे पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष
बोले, धार्मिक पर्यटन स्थलों को नेपाल द्वारा प्रचारित रामायण और शिव सर्किट से जोड़कर शुरू किया जाना चाहिए
आचार्य बालकृष्ण सोनौली सीमा के रास्ते अपने दो सौ अनुयायी के साथ नेपाल पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। दशहरा पर्व मनाने 40 वर्ष बाद अपने गृहनगर पहुंचे पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष आचार्य बालकृष्ण ने पाल्पा के बसंतपुर में कामाख्या देवी मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने कहा कि नेपाल बुद्ध, पशुपतिनाथ, मुक्तिनाथ, जानकी मंदिर और वाल्मीकि की भूमि है। सुझाव देते हुए कहा कि इन धार्मिक पर्यटन स्थलों को नेपाल द्वारा प्रचारित रामायण और शिव सर्किट से जोड़कर शुरू किया जाना चाहिए।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि 40 साल बाद पहली बार गृह जिले स्यांगजा में दशहरा उत्सव मनाने का मौका मिला और साथ ही कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन कर काफी खुशी हुई है। उन्होंने कहा कि नेपाल भारतीय पर्यटकों के लिए एक आसान गंतव्य है। नेपाल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आवाजाही में आसानी, भाषाई, धार्मिक और सांस्कृतिक समानताओं के कारण भारतीय पर्यटकों के लिए आसान है। भारतीय नागरिक बिना पासपोर्ट, बिना अनुमति के नेपाल में कहीं भी जा सकते हैं। दोनों देशों के बीच सनातन संस्कृति, वैदिक परंपरा है। भाषाई, धार्मिक, सांस्कृतिक समानता और व्यापारिक संबंध भी आसान है। उत्तर प्रदेश से जुड़े रूपनदेही में बनी लुंबिनी केबल कार भारतीय पर्यटकों के लिए एक आकर्षक स्थल बन सकती है।
उन्होंने कहा कि भारत की पतंजलि योग पीठ ने नेपाल में फार्मास्युटिकल उद्योग स्थापित करके और योग केंद्र चलाकर दोनों देशों के बीच लोगों के बीच संबंधों को मजबूत किया है। रूपनदेही के ढकधई में एक अरब की लागत से जड़ी-बूटियों के प्रसंस्करण और आयुर्वेदिक दवा और कॉस्मेटिक उत्पाद बनाने का उद्योग स्थापना के अंतिम चरण में है और इस उद्योग में कम से कम 500 लोगों को रोजगार मिलेगा।
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आचार्य बालकृष्ण सोनौली सीमा के रास्ते अपने दो सौ अनुयायी के साथ नेपाल पहुंचे, जहां रास्ते में उनका स्वागत किया गया।
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आचार्य बालकृष्ण सोनौली सीमा के रास्ते अपने दो सौ अनुयायी के साथ नेपाल पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। दशहरा पर्व मनाने 40 वर्ष बाद अपने गृहनगर पहुंचे पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष आचार्य बालकृष्ण ने पाल्पा के बसंतपुर में कामाख्या देवी मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने कहा कि नेपाल बुद्ध, पशुपतिनाथ, मुक्तिनाथ, जानकी मंदिर और वाल्मीकि की भूमि है। सुझाव देते हुए कहा कि इन धार्मिक पर्यटन स्थलों को नेपाल द्वारा प्रचारित रामायण और शिव सर्किट से जोड़कर शुरू किया जाना चाहिए।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि 40 साल बाद पहली बार गृह जिले स्यांगजा में दशहरा उत्सव मनाने का मौका मिला और साथ ही कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन कर काफी खुशी हुई है। उन्होंने कहा कि नेपाल भारतीय पर्यटकों के लिए एक आसान गंतव्य है। नेपाल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आवाजाही में आसानी, भाषाई, धार्मिक और सांस्कृतिक समानताओं के कारण भारतीय पर्यटकों के लिए आसान है। भारतीय नागरिक बिना पासपोर्ट, बिना अनुमति के नेपाल में कहीं भी जा सकते हैं। दोनों देशों के बीच सनातन संस्कृति, वैदिक परंपरा है। भाषाई, धार्मिक, सांस्कृतिक समानता और व्यापारिक संबंध भी आसान है। उत्तर प्रदेश से जुड़े रूपनदेही में बनी लुंबिनी केबल कार भारतीय पर्यटकों के लिए एक आकर्षक स्थल बन सकती है।
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उन्होंने कहा कि भारत की पतंजलि योग पीठ ने नेपाल में फार्मास्युटिकल उद्योग स्थापित करके और योग केंद्र चलाकर दोनों देशों के बीच लोगों के बीच संबंधों को मजबूत किया है। रूपनदेही के ढकधई में एक अरब की लागत से जड़ी-बूटियों के प्रसंस्करण और आयुर्वेदिक दवा और कॉस्मेटिक उत्पाद बनाने का उद्योग स्थापना के अंतिम चरण में है और इस उद्योग में कम से कम 500 लोगों को रोजगार मिलेगा।
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आचार्य बालकृष्ण सोनौली सीमा के रास्ते अपने दो सौ अनुयायी के साथ नेपाल पहुंचे, जहां रास्ते में उनका स्वागत किया गया।