{"_id":"69a72246581672601702b6f7","slug":"prashasti-app-will-certify-21-types-of-disabilities-maharajganj-news-c-206-1-go11002-172712-2026-03-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: 21 प्रकार के दिव्यांगता का प्रमाणित करेगा प्रशस्ति एप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: 21 प्रकार के दिव्यांगता का प्रमाणित करेगा प्रशस्ति एप
विज्ञापन
एनसीईआरटी का एआई फीचर लैस है 2.0 एप
महराजगंज। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की दिव्यांगता अब समय से प्रमाणित होगी। नए शिक्षा सत्र से इसके लिए एनसीईआरटी ने एआई फीचर लैस प्रशस्ति 2.0 एप विकसित कराया है। इसकी सहायता से 21 प्रकार की दिव्यांगता का प्रमाणीकरण हो सकेगा। साथ ही विशिष्ट आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की सहूलियत बढ़ेगी।
एनसीईआरटी का प्रशस्ति एप 21 प्रकार की दिव्यांगता की पहचान के लिए विकसित कराया गया है। इससे विशिष्ट आवश्यकता वाले विद्यार्थियों का हक सामान्य विद्यार्थी नहीं ले सकेंगे। एप को विकसित करने का उद्देश्य दिव्यांग छात्रों के त्वरित प्रमाणन, समावेशन और बेहतर शैक्षिक सहयोग को बढ़ाना है।
1500 से अधिक परिषदीय स्कूलों का संचालन
जिले में बेसिक के 1500 से अधिक विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में करीब दो लाख बच्चे पंजीकृत हैं। अब इन सभी बच्चों की स्क्रीनिंग शिक्षकों के जरिये की जाएगी। इसके लिए प्रशस्ति 2.0 एप समग्र शिक्षा अभियान के तहत विकसित किया गया है। एआई फीचर का यह एप दिव्यांगता से जुड़ी प्रारंभिक जांच कर विस्तृत रिपोर्ट अपडेट करता है। इससे समय पर जरूरी सहायता, संसाधन और योजनाओं का लाभ बेसिक के विद्यार्थी त्वरित रूप से प्राप्त कर सकेंगे। इससे बच्चों की पढ़ाई में आने वाली बाधाओं को कम करने में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
मौजूदा सत्र में 1200 की संख्या
बेसिक में समकेतिक शिक्षा के जिला समन्वयक केके सिंह ने बताया कि मौजूदा शिक्षा सत्र में 1200 विद्यार्थी बेसिक के स्कूलों में विशिष्ट आवश्यकता वाले चिह्नित हैं। स्कूल शिक्षा महानिदेशक के निर्देश पर प्रशस्ति एप परिषदीय विद्यालयों, सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के लिए अनिवार्य किया गया है। एप के माध्यम से बच्चों के व्यवहार, सीखने की क्षमता, शारीरिक गतिविधियों और संज्ञानात्मक विकास से जुड़ी जानकारियों का प्रमाणन हो सकेगा। पहले दिव्यांगता की पहचान और प्रमाणन की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती थी। नए शिक्षा सत्र में इससे सहूलियत बढ़ेगी।
वर्जन
विशिष्ट आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए समकेतिक शिक्षा व समग्र शिक्षा के सहयोग से उत्कृष्टता के प्रयास हो रहे हैं। इसमें एनसीईआरटी का प्रशस्ति 2.0 एप सहयोगी बनेगा और योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। नए शिक्षा सत्र में इसका प्रशिक्षण डायट की तरफ से दिया जाएगा।
-रिद्धि पांडेय, बीएसए, महराजगंज
विज्ञापन
महराजगंज। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की दिव्यांगता अब समय से प्रमाणित होगी। नए शिक्षा सत्र से इसके लिए एनसीईआरटी ने एआई फीचर लैस प्रशस्ति 2.0 एप विकसित कराया है। इसकी सहायता से 21 प्रकार की दिव्यांगता का प्रमाणीकरण हो सकेगा। साथ ही विशिष्ट आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की सहूलियत बढ़ेगी।
एनसीईआरटी का प्रशस्ति एप 21 प्रकार की दिव्यांगता की पहचान के लिए विकसित कराया गया है। इससे विशिष्ट आवश्यकता वाले विद्यार्थियों का हक सामान्य विद्यार्थी नहीं ले सकेंगे। एप को विकसित करने का उद्देश्य दिव्यांग छात्रों के त्वरित प्रमाणन, समावेशन और बेहतर शैक्षिक सहयोग को बढ़ाना है।
विज्ञापन
1500 से अधिक परिषदीय स्कूलों का संचालन
जिले में बेसिक के 1500 से अधिक विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में करीब दो लाख बच्चे पंजीकृत हैं। अब इन सभी बच्चों की स्क्रीनिंग शिक्षकों के जरिये की जाएगी। इसके लिए प्रशस्ति 2.0 एप समग्र शिक्षा अभियान के तहत विकसित किया गया है। एआई फीचर का यह एप दिव्यांगता से जुड़ी प्रारंभिक जांच कर विस्तृत रिपोर्ट अपडेट करता है। इससे समय पर जरूरी सहायता, संसाधन और योजनाओं का लाभ बेसिक के विद्यार्थी त्वरित रूप से प्राप्त कर सकेंगे। इससे बच्चों की पढ़ाई में आने वाली बाधाओं को कम करने में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
मौजूदा सत्र में 1200 की संख्या
बेसिक में समकेतिक शिक्षा के जिला समन्वयक केके सिंह ने बताया कि मौजूदा शिक्षा सत्र में 1200 विद्यार्थी बेसिक के स्कूलों में विशिष्ट आवश्यकता वाले चिह्नित हैं। स्कूल शिक्षा महानिदेशक के निर्देश पर प्रशस्ति एप परिषदीय विद्यालयों, सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के लिए अनिवार्य किया गया है। एप के माध्यम से बच्चों के व्यवहार, सीखने की क्षमता, शारीरिक गतिविधियों और संज्ञानात्मक विकास से जुड़ी जानकारियों का प्रमाणन हो सकेगा। पहले दिव्यांगता की पहचान और प्रमाणन की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती थी। नए शिक्षा सत्र में इससे सहूलियत बढ़ेगी।
वर्जन
विशिष्ट आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए समकेतिक शिक्षा व समग्र शिक्षा के सहयोग से उत्कृष्टता के प्रयास हो रहे हैं। इसमें एनसीईआरटी का प्रशस्ति 2.0 एप सहयोगी बनेगा और योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। नए शिक्षा सत्र में इसका प्रशिक्षण डायट की तरफ से दिया जाएगा।
-रिद्धि पांडेय, बीएसए, महराजगंज