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Maharajganj News: लगातार कोहरे से आलू पर गहराया पाला का खतरा, किसान चिंतित
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लगातार कोहरा व शीतलहर बिगाड़ रहे हालात
2200 हेक्टेयर में आलू तो 1000 हेक्टेयर में बोई गई है सब्जी की फसल
महराजगंज। लगातार पड़ रहा कोहरा व सर्द पछुआ हवा से आलू की फसल पर पाला का खतरा गहराने लगा है। फसल के नुकसान की आशंका में किसान चिंतित हैं। प्रगतिशील किसान अनिरुद्ध चौधरी और विशंभर चौधरी ने बताया कि हर दो दिन में सिंचाई के बाद भी आलू के फसल के नुकसान की आशंका गहराती जा रही है।
उद्यान विभाग के मुताबिक, इस बार 2200 हेक्टेयर में जहां आलू की फसल बोई गई है। लगभग एक हजार हेक्टेयर में फूल गोभी, पत्ता गोभी, ब्रोकली, शिमला मिर्च, टमाटर व बैंगन की फसल इन दिनों मौसम का दुष्प्रभाव झेल रही है। जिला उद्यान अधिकारी संजय कुमार रस्तोगी ने बताया कि आलू व सब्जियों में झुलसा रोग सबसे पहले जमीन के पास की पुरानी पत्तियों पर दिखाई देता है। पत्तियों पर छोटे-छोटे गोल गहरे भूरे धब्बे बनते हैं, जिनके भीतर गोल-गोल छल्लेदार रेखाएं नजर आती हैं। धीरे-धीरे धब्बे आपस में मिलकर पूरी पत्ती को झुलसा देते हैं, जिससे पत्तियां भूरी होकर गिर जाती हैं या तने से चिपक जाती हैं। पौधों के निचली सतह पर सफेद रूई जैसी फफूंद उग आती हैं। रोग बढ़ने पर पूरा पौधा मुरझाकर गिर जाता है। पाला से फसल को बचाने के लिए हर दो दिन पर हल्की सिंचाई करें।
वर्जन
फसल को पाले के प्रभाव से बचाने के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 फीसदी, डब्ल्यूपी 2.5 किग्रा, मैंकोजेब 64 फीसदी 600 से 700 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।
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-संजय कुमार रस्तोगी, जिला उद्यान अधिकारी।
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2200 हेक्टेयर में आलू तो 1000 हेक्टेयर में बोई गई है सब्जी की फसल
महराजगंज। लगातार पड़ रहा कोहरा व सर्द पछुआ हवा से आलू की फसल पर पाला का खतरा गहराने लगा है। फसल के नुकसान की आशंका में किसान चिंतित हैं। प्रगतिशील किसान अनिरुद्ध चौधरी और विशंभर चौधरी ने बताया कि हर दो दिन में सिंचाई के बाद भी आलू के फसल के नुकसान की आशंका गहराती जा रही है।
उद्यान विभाग के मुताबिक, इस बार 2200 हेक्टेयर में जहां आलू की फसल बोई गई है। लगभग एक हजार हेक्टेयर में फूल गोभी, पत्ता गोभी, ब्रोकली, शिमला मिर्च, टमाटर व बैंगन की फसल इन दिनों मौसम का दुष्प्रभाव झेल रही है। जिला उद्यान अधिकारी संजय कुमार रस्तोगी ने बताया कि आलू व सब्जियों में झुलसा रोग सबसे पहले जमीन के पास की पुरानी पत्तियों पर दिखाई देता है। पत्तियों पर छोटे-छोटे गोल गहरे भूरे धब्बे बनते हैं, जिनके भीतर गोल-गोल छल्लेदार रेखाएं नजर आती हैं। धीरे-धीरे धब्बे आपस में मिलकर पूरी पत्ती को झुलसा देते हैं, जिससे पत्तियां भूरी होकर गिर जाती हैं या तने से चिपक जाती हैं। पौधों के निचली सतह पर सफेद रूई जैसी फफूंद उग आती हैं। रोग बढ़ने पर पूरा पौधा मुरझाकर गिर जाता है। पाला से फसल को बचाने के लिए हर दो दिन पर हल्की सिंचाई करें।
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वर्जन
फसल को पाले के प्रभाव से बचाने के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 फीसदी, डब्ल्यूपी 2.5 किग्रा, मैंकोजेब 64 फीसदी 600 से 700 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।
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-संजय कुमार रस्तोगी, जिला उद्यान अधिकारी।