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Maharajganj News: बिना सुपर एसएमएस वाले हार्वेस्टर सीज किए जाएंगे
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महराजगंज। पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (सुपर एसएमएस) या निर्धारित पराली प्रबंधन व्यवस्था के चलने वाले कंबाइन हार्वेस्टर को सीज किया जाएगा। वहीं, पराली जलाने वाले किसानों पर नियमानुसार जुर्माना लगाया जाएगा।
जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्चस्तरीय बैठक कर अधिकारियों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।
डीएम ने उपजिलाधिकारियों को लेखपालों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए। कृषि विभाग के सचल दलों को सक्रिय कर न्याय पंचायत स्तर पर जागरूकता गोष्ठियां आयोजित करने और प्रचार माध्यमों से किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की जानकारी देने को कहा। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
उन्होंने सभी तहसीलों में उपजिलाधिकारियों और थानों पर थानाध्यक्षों की अध्यक्षता में हार्वेस्टर मालिकों के साथ बैठक कराने के निर्देश दिए। साथ ही राजस्व, पुलिस और कृषि विभाग की रोस्टरवार टीमें गठित कर लगातार निगरानी करने को कहा। थानाध्यक्षों को क्षेत्र में भ्रमण कर पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने और उल्लंघन मिलने पर संबंधित किसान व हार्वेस्टर स्वामी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
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डीएम ने खंड विकास अधिकारियों को ग्राम प्रधानों के सहयोग से पराली गोशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित कराने को कहा। कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों को हार्वेस्टर में सुपर एसएमएस लगवाने या कटाई के बाद कृषि यंत्रों से फसल अवशेषों का प्रबंधन करने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि पराली जलाने की रोकथाम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी, मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र सिंह, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. प्रशांत कुमार, उप कृषि निदेशक सहित सभी उपजिलाधिकारी, पुलिस क्षेत्राधिकारी और खंड विकास अधिकारी मौजूद रहे।
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जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्चस्तरीय बैठक कर अधिकारियों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।
डीएम ने उपजिलाधिकारियों को लेखपालों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए। कृषि विभाग के सचल दलों को सक्रिय कर न्याय पंचायत स्तर पर जागरूकता गोष्ठियां आयोजित करने और प्रचार माध्यमों से किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की जानकारी देने को कहा। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
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उन्होंने सभी तहसीलों में उपजिलाधिकारियों और थानों पर थानाध्यक्षों की अध्यक्षता में हार्वेस्टर मालिकों के साथ बैठक कराने के निर्देश दिए। साथ ही राजस्व, पुलिस और कृषि विभाग की रोस्टरवार टीमें गठित कर लगातार निगरानी करने को कहा। थानाध्यक्षों को क्षेत्र में भ्रमण कर पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने और उल्लंघन मिलने पर संबंधित किसान व हार्वेस्टर स्वामी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
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डीएम ने खंड विकास अधिकारियों को ग्राम प्रधानों के सहयोग से पराली गोशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित कराने को कहा। कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों को हार्वेस्टर में सुपर एसएमएस लगवाने या कटाई के बाद कृषि यंत्रों से फसल अवशेषों का प्रबंधन करने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि पराली जलाने की रोकथाम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी, मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र सिंह, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. प्रशांत कुमार, उप कृषि निदेशक सहित सभी उपजिलाधिकारी, पुलिस क्षेत्राधिकारी और खंड विकास अधिकारी मौजूद रहे।