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Maharajganj News: लोगों को भा रहे हल्के मखमली कंबल, ठंड बढ़ने से बढ़ी मांग
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रंग-बिरंगे, आकर्षक डिजाइन वाले कंबलों को ग्राहक देते हैं तरजीह
लुधियाना-अमृतसर और पानीपत से मंगाए जाते हैं कंबल
महाराजगंज। कड़ाके की ठंड के चलते बाजार में कंबलों की मांग में भी तेजी आई है। अलग-अलग डिजाइन, वैरायटी और गुणवत्ता के कंबल चार सौ से लेकर आठ हजार रुपये तक बाजार में उपलब्ध हैं। ठंड के मौसम में लोग भारी-भरकम रजाइयों की अपेक्षा कंबलों को अधिक पसंद कर रहे हैं। वजन में हल्के मखमली गर्म कंबलों की ओर लोग आकर्षित हो रहे हैं।
वैसे तो बाजाराें में कंबलों की बिक्री छठ पर्व बीतने के बाद ही शुरू हो जाती है। जैसे-जैसे ठंड बढ़ती जाती है इसकी मांग में भी बढ़ोतरी होती जाती है। पिछले कुछ दिनों से तापमान में आई गिरावट से कंबलों और रजाई की बिक्री में तेजी आई है। खरीदार हल्के और मखमली कंबलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। लोग जयपुरिया, राजस्थानी और लुधियाना के कंबल पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा ब्रांडेड कंबल भी बाजार में मौजूद हैं ये भी ग्राहकों को लुभाते हैं। जिनके पास अधिक बजट होता है वे लोकल कंबलों की जगह ब्रांडेड कंबलों को खरीदना अधिक पसंद करते हैं।
व्यापारियों का कहना है कि अब ग्राहक केवल गर्माहट ही नहीं बल्कि कंबल की गुणवत्ता, डिजाइन और रंगों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। रंग-बिरंगे, मोटे और आकर्षक डिजाइन वाले कंबलों की मांग सबसे अधिक है। शहर के स्टेशन रोड स्थित कंबल विक्रेता सिद्वांत गोयनका बताते हैं कि उनके दुकान पर 100 रुपये से लेकर 3500 रुपये तक के कंबलों की बिक्री होती है। जिसका जैसा बजट होता है, वैसा ही कंबल खरीदता है। आजकल सबसे अधिक मांग मखमली कंबलों की है। ये देखने में आकर्षक होते हैं और वजन में भी हल्के होते हैं साथ ही गर्माहट भी देते हैं। ठंड अधिक पड़ने के कारण इस बार कंबलों की अच्छी बिक्री हो रही है।
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स्टेशन रोड पर ही ऊनी कपड़ों के व्यवसायी आकाश ने बताया कि वे लोग सीजन के पहले ही लुधियाना, अमृतसर और पानीपत से कंबल मंगा लेते हैं और पूरे सीजन उनकी बिक्री होती रहती है। उन्होंने बताया कि लोकल कंपनी के साथ-साथ ब्रांडेड कंबलों की बिक्री भी अच्छी होती है। नामी गिरामी कंपनियों के अधिकतर ब्रांडेड कंबल मुंबई से आते हैं। हनुमागढ़ी रोड पर स्थित ऊनी कपड़ों के व्यवासायी संतोष कुमार अग्रहरी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से अचानक ठंड में आई तेजी के कारण कंबलों की बिक्री में इजाफा हुआ है। कंबलों की यह बिक्री खिचड़ी के बाद तक जारी रहती है।
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लुधियाना-अमृतसर और पानीपत से मंगाए जाते हैं कंबल
महाराजगंज। कड़ाके की ठंड के चलते बाजार में कंबलों की मांग में भी तेजी आई है। अलग-अलग डिजाइन, वैरायटी और गुणवत्ता के कंबल चार सौ से लेकर आठ हजार रुपये तक बाजार में उपलब्ध हैं। ठंड के मौसम में लोग भारी-भरकम रजाइयों की अपेक्षा कंबलों को अधिक पसंद कर रहे हैं। वजन में हल्के मखमली गर्म कंबलों की ओर लोग आकर्षित हो रहे हैं।
वैसे तो बाजाराें में कंबलों की बिक्री छठ पर्व बीतने के बाद ही शुरू हो जाती है। जैसे-जैसे ठंड बढ़ती जाती है इसकी मांग में भी बढ़ोतरी होती जाती है। पिछले कुछ दिनों से तापमान में आई गिरावट से कंबलों और रजाई की बिक्री में तेजी आई है। खरीदार हल्के और मखमली कंबलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। लोग जयपुरिया, राजस्थानी और लुधियाना के कंबल पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा ब्रांडेड कंबल भी बाजार में मौजूद हैं ये भी ग्राहकों को लुभाते हैं। जिनके पास अधिक बजट होता है वे लोकल कंबलों की जगह ब्रांडेड कंबलों को खरीदना अधिक पसंद करते हैं।
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व्यापारियों का कहना है कि अब ग्राहक केवल गर्माहट ही नहीं बल्कि कंबल की गुणवत्ता, डिजाइन और रंगों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। रंग-बिरंगे, मोटे और आकर्षक डिजाइन वाले कंबलों की मांग सबसे अधिक है। शहर के स्टेशन रोड स्थित कंबल विक्रेता सिद्वांत गोयनका बताते हैं कि उनके दुकान पर 100 रुपये से लेकर 3500 रुपये तक के कंबलों की बिक्री होती है। जिसका जैसा बजट होता है, वैसा ही कंबल खरीदता है। आजकल सबसे अधिक मांग मखमली कंबलों की है। ये देखने में आकर्षक होते हैं और वजन में भी हल्के होते हैं साथ ही गर्माहट भी देते हैं। ठंड अधिक पड़ने के कारण इस बार कंबलों की अच्छी बिक्री हो रही है।
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स्टेशन रोड पर ही ऊनी कपड़ों के व्यवसायी आकाश ने बताया कि वे लोग सीजन के पहले ही लुधियाना, अमृतसर और पानीपत से कंबल मंगा लेते हैं और पूरे सीजन उनकी बिक्री होती रहती है। उन्होंने बताया कि लोकल कंपनी के साथ-साथ ब्रांडेड कंबलों की बिक्री भी अच्छी होती है। नामी गिरामी कंपनियों के अधिकतर ब्रांडेड कंबल मुंबई से आते हैं। हनुमागढ़ी रोड पर स्थित ऊनी कपड़ों के व्यवासायी संतोष कुमार अग्रहरी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से अचानक ठंड में आई तेजी के कारण कंबलों की बिक्री में इजाफा हुआ है। कंबलों की यह बिक्री खिचड़ी के बाद तक जारी रहती है।