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Maharajganj News: संस्थागत प्रसव की रफ्तार सुस्त, जननी सुरक्षा में चार ब्लॉक फिसड्डी
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- रतनपुर में 44.5, फरेंदा में 47.6 फीसदी उपलब्धि, पनियरा और मिठौरा भी 53 फीसदी से नीचे
- जनपद में लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 63.5 प्रतिशत कराया जा सका संस्थागत प्रसव
महराजगंज। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जननी सुरक्षा योजना से लेकर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान तक कई योजनाएं संचालित हैं। आशा व एएनएम के माध्यम से गर्भवतियों को सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए लगातार प्रेरित करने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद जनपद संस्थागत प्रसव के लक्ष्य का मात्र 63.5 प्रतिशत हासिल कर सका है। इसमें चार ब्लॉकों में संस्थागत प्रसव की स्थिति चिंताजनक है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2026 से अगस्त तक जिले में 16,023 संस्थागत प्रसव का लक्ष्य था। इसके सापेक्ष 10,172 प्रसव हुए हैं। जिले की उपलब्धि 63.5 प्रतिशत रही। वहीं रतनपुर में लक्ष्य 1,673 के मुकाबले 744 प्रसव हुए और उपलब्धि 44.5 प्रतिशत रही। फरेंदा में 1,249 के सापेक्ष 594 प्रसव होने से उपलब्धि 47.6 प्रतिशत रही।
इसी तरह मिठौरा में 1,484 के लक्ष्य के मुकाबले 767 प्रसव हुए। यहां उपलब्धि 51.7 प्रतिशत है। पनियरा में 1,343 के सापेक्ष 711 प्रसव दर्ज किए गए हैं और उपलब्धि 52.9 प्रतिशत रही। यानी इन चारों ब्लॉकों में आधे के आसपास ही लक्ष्य हासिल हो सका है।
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रिपोर्ट में धानी ब्लॉक ने 74.8 प्रतिशत उपलब्धि के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। डीसीएच-शहरी क्षेत्र की उपलब्धि 68.2, सिसवा की 67, घुघली की 64.3 और परतावल की 63.6 प्रतिशत रही। निचलौल में 62.4, बृजमनगंज में 58.8, लक्ष्मीपुर में 56.9 और महराजगंज में 54 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज हुई।
कम प्रगति वाले ब्लॉकों की होगी समीक्षा
सीएमओ डॉ. सुरेंद्र चौधरी ने बताया कि संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए सभी ब्लॉकों को निर्देश दिए गए हैं। कम उपलब्धि वाले ब्लॉकों में समीक्षा कर आशा और एएनएम के माध्यम से गर्भवती महिलाओं से संपर्क बढ़ाने, उन्हें संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करने और प्रसव से पहले जरूरी जांच सुनिश्चित कराने पर जोर दिया जा रहा है। लक्ष्य के अनुरूप प्रगति नहीं करने वाली इकाइयों की भी समीक्षा की जाएगी।
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- जनपद में लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 63.5 प्रतिशत कराया जा सका संस्थागत प्रसव
महराजगंज। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जननी सुरक्षा योजना से लेकर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान तक कई योजनाएं संचालित हैं। आशा व एएनएम के माध्यम से गर्भवतियों को सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए लगातार प्रेरित करने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद जनपद संस्थागत प्रसव के लक्ष्य का मात्र 63.5 प्रतिशत हासिल कर सका है। इसमें चार ब्लॉकों में संस्थागत प्रसव की स्थिति चिंताजनक है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2026 से अगस्त तक जिले में 16,023 संस्थागत प्रसव का लक्ष्य था। इसके सापेक्ष 10,172 प्रसव हुए हैं। जिले की उपलब्धि 63.5 प्रतिशत रही। वहीं रतनपुर में लक्ष्य 1,673 के मुकाबले 744 प्रसव हुए और उपलब्धि 44.5 प्रतिशत रही। फरेंदा में 1,249 के सापेक्ष 594 प्रसव होने से उपलब्धि 47.6 प्रतिशत रही।
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इसी तरह मिठौरा में 1,484 के लक्ष्य के मुकाबले 767 प्रसव हुए। यहां उपलब्धि 51.7 प्रतिशत है। पनियरा में 1,343 के सापेक्ष 711 प्रसव दर्ज किए गए हैं और उपलब्धि 52.9 प्रतिशत रही। यानी इन चारों ब्लॉकों में आधे के आसपास ही लक्ष्य हासिल हो सका है।
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रिपोर्ट में धानी ब्लॉक ने 74.8 प्रतिशत उपलब्धि के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। डीसीएच-शहरी क्षेत्र की उपलब्धि 68.2, सिसवा की 67, घुघली की 64.3 और परतावल की 63.6 प्रतिशत रही। निचलौल में 62.4, बृजमनगंज में 58.8, लक्ष्मीपुर में 56.9 और महराजगंज में 54 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज हुई।
कम प्रगति वाले ब्लॉकों की होगी समीक्षा
सीएमओ डॉ. सुरेंद्र चौधरी ने बताया कि संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए सभी ब्लॉकों को निर्देश दिए गए हैं। कम उपलब्धि वाले ब्लॉकों में समीक्षा कर आशा और एएनएम के माध्यम से गर्भवती महिलाओं से संपर्क बढ़ाने, उन्हें संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करने और प्रसव से पहले जरूरी जांच सुनिश्चित कराने पर जोर दिया जा रहा है। लक्ष्य के अनुरूप प्रगति नहीं करने वाली इकाइयों की भी समीक्षा की जाएगी।