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उल्लुओं को तस्करों से बचाने के लिए आउल आईडी बना
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उल्लुओं को तस्करों से बचाने के लिए आउल आईडी बना
संकटग्रस्त 16 प्रकार के उल्लुओं की पहचान वन अधिकारी कर सकेंगे
महराजगंज। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के शिवपुर यूनिट के सीमावर्ती वाल्मीकि टाइगर रिर्जव में उल्लुओं को तस्करों से बचाने के लिए आउल आईडी अर्थात सूचनात्मक पोस्टर बनाया गया है। इसके माध्यम से संकटग्रस्त 16 प्रकार के उल्लुओं की पहचान वन अधिकारी कर सकेंगे। डब्लूडब्लूएफ इंडिया के स्टेट हेड कमलेश कुमार मौर्य ने बताया कि अवैध वन्यजीव व्यापार से संकटग्रस्त उल्लुओं की प्रजाति को बचाने के लिए सूचनात्मक पोस्टर तैयार किए गए हैं। इस पोस्टर से संकटग्रस्त उल्लुओं की पहचान में आसानी होगी। उन्होंने बताया कि इंफॉर्मेटरी पोस्टर को वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के सभी वन अधिकारियों को भेज दिया गया है। इसके अलावा चितवन नेशनल पार्क, परसा नेशनल पार्क, सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग, दुधवा आदि के वन अधिकारियों को भी यह पोस्टर भेजा गया है। डॉ. साकेत बडोला और डॉ. मारवीन फर्नांडिस द्वारा तैयार पोस्टर से तस्करी के कारण संकटग्रस्त घोषित 16 प्रकार के उल्लुओं की पहचान में मदद मिलेगी। मालूम हो कि अंधविश्वास के नाम पर तांत्रिक क्रियाओं के लिए अधिकांशत: उल्लुओं का उपयोग होता है। इसके साथ ही उल्लू के अंगों की भी तस्करी होती है।
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संकटग्रस्त 16 में तीन प्रजाति वीटीआर में
भारत में कुल 36 प्रकार के उल्लू पाये जाते हैं। इनमें 16 प्रकार के उल्लुओं को संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। इन सभी 16 प्रकार के उल्लुओं का पहचान पत्र तैयार किया गया है। इनमें से तीन वाल्मीकि टाइगर रिजर्व व आसपास के क्षेत्र में पाये जाते हैं। बार्न आउल, ओरिएन्टल स्कोप्स आउल व स्पॉटेड ओव्लेट टाइगर रिजर्व व आसपास के क्षेत्र में मिलते हैं। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के शिवपुर यूनिट के रेंज अधिकारी अनूप कुमार वर्मा ने बताया कि शिवपुर रेन्ज में छोटे उल्लू ज्यादा मिलते हैं।
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संकटग्रस्त 16 प्रकार के उल्लुओं की पहचान वन अधिकारी कर सकेंगे
महराजगंज। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के शिवपुर यूनिट के सीमावर्ती वाल्मीकि टाइगर रिर्जव में उल्लुओं को तस्करों से बचाने के लिए आउल आईडी अर्थात सूचनात्मक पोस्टर बनाया गया है। इसके माध्यम से संकटग्रस्त 16 प्रकार के उल्लुओं की पहचान वन अधिकारी कर सकेंगे। डब्लूडब्लूएफ इंडिया के स्टेट हेड कमलेश कुमार मौर्य ने बताया कि अवैध वन्यजीव व्यापार से संकटग्रस्त उल्लुओं की प्रजाति को बचाने के लिए सूचनात्मक पोस्टर तैयार किए गए हैं। इस पोस्टर से संकटग्रस्त उल्लुओं की पहचान में आसानी होगी। उन्होंने बताया कि इंफॉर्मेटरी पोस्टर को वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के सभी वन अधिकारियों को भेज दिया गया है। इसके अलावा चितवन नेशनल पार्क, परसा नेशनल पार्क, सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग, दुधवा आदि के वन अधिकारियों को भी यह पोस्टर भेजा गया है। डॉ. साकेत बडोला और डॉ. मारवीन फर्नांडिस द्वारा तैयार पोस्टर से तस्करी के कारण संकटग्रस्त घोषित 16 प्रकार के उल्लुओं की पहचान में मदद मिलेगी। मालूम हो कि अंधविश्वास के नाम पर तांत्रिक क्रियाओं के लिए अधिकांशत: उल्लुओं का उपयोग होता है। इसके साथ ही उल्लू के अंगों की भी तस्करी होती है।
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संकटग्रस्त 16 में तीन प्रजाति वीटीआर में
भारत में कुल 36 प्रकार के उल्लू पाये जाते हैं। इनमें 16 प्रकार के उल्लुओं को संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। इन सभी 16 प्रकार के उल्लुओं का पहचान पत्र तैयार किया गया है। इनमें से तीन वाल्मीकि टाइगर रिजर्व व आसपास के क्षेत्र में पाये जाते हैं। बार्न आउल, ओरिएन्टल स्कोप्स आउल व स्पॉटेड ओव्लेट टाइगर रिजर्व व आसपास के क्षेत्र में मिलते हैं। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के शिवपुर यूनिट के रेंज अधिकारी अनूप कुमार वर्मा ने बताया कि शिवपुर रेन्ज में छोटे उल्लू ज्यादा मिलते हैं।
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