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नवरात्र : माता चंद्रघंटा की आराधना के लिए मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु

Wed, 14 Oct 2026 02:44 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 14 Oct 2026 02:44 AM IST
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On the third day of Navaratri, the Goddess was worshipped with due rituals.
महराजगंज। नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ पूजा-अर्चना की गई। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों में नवरात्र की धूम रही और मंदिरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ हुआ। खनुआ प्रतिनिधि के अनुसार, शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन सीमावर्ती क्षेत्र के गांवो के दुर्गा मंदिरों और पंडालों में माता के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई। मंगलवार सुबह से भारत नेपाल के सीमावर्ती गांव खनुआ, कैथवलिया उर्फ बरगदही, हरदीडाली, सुंडी आदि ग्रामीण क्षेत्रों में बने पूजा पंडालों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। माता का भव्य श्रृंगार कर फूल-मालाओं से दरबार सजाया गया था।
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मंदिर के पुजारी पंडित सूरज मिश्रा ने बताया कि तीसरे दिन की अधिष्ठात्री देवी मां चंद्रघंटा हैं। माता के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, जिसके कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनका रूप शांतिदायक और कल्याणकारी है, वहीं इनके घंटे की ध्वनि से असुरी शक्तियां भयभीत होती हैं। यह रूप शौर्य और साहस का प्रतीक माना जाता है। इनकी आराधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं।
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सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहां सुरक्षा के भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। स्थानीय पुलिस मंदिरों व पाडांल के आसपास गश्त कर रही है। दिनभर मंदिरों में घंटे-घड़ियाल और देवी गीतों से माहौल भक्तिमय बना रहा।
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दशहरा पर हेटौंडा के पाथीभरा मंदिर में गुप्त शतचंडी पाठ : सोनौली प्रतिनिधि के अनुसार, दशहरा के अवसर पर नेपाल के हेटौंडा उपमहा नगरपालिका-1 स्थित भैरवडांडा के पाथीभरा मंदिर में गुप्त शतचंडी पाठ पारायण का आयोजन किया गया है।
घटस्थापना के दिन से शुरू हुआ यह धार्मिक अनुष्ठान महानवमी तक चलेगा। इसमें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की आराधना की जा रही है। मंदिर के संस्थापक गुरु देवीदास ने बताया कि गुप्त शतचंडी पाठ पारायण एक उच्च कोटि का वैदिक अनुष्ठान है। इसे देवी दुर्गा के तीन स्वरूपों महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।

दशहरा के अवसर पर मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं। हेटौंडा के भैरवडांडा स्थित पाथीभरा मंदिर में ताप्लेजुंग के प्रसिद्ध पाथीभरा मंदिर से लाई गई पवित्र शिला, त्रिशूल और कलश स्थापित किए गए हैं। इन्हीं की स्थापना के बाद मंदिर का निर्माण कराया गया। यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना होती है। मंदिर में 13 अक्टूबर, 2008 से अखंड हवन भी जारी है।
नेपाल के ताप्लेजुंग स्थित पाथीभरा मंदिर तक पहुंचने में असमर्थ श्रद्धालुओं के लिए हेटौंडा का यह मंदिर आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।
यहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर देवी का दर्शन करते हैं। दशहरा के अवसर पर गुप्त शतचंडी पाठपारायण से मंदिर का धार्मिक माहौल भक्तिमय बना हुआ है।
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