सोमवार को जिला मुख्यालय पर राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। शासन से अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के लिए निर्देश जारी करने की मांग की। परिषद के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम से जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर अपने मांगों से अवगत कराया। निषाद समाज को भारतीय संविधान में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के सूची में वर्णित मझवार, बेलदार, खरवार, खरोट, तुरैहा के पर्यायवाची जाति केवट, मल्लाह, मांझी, मुजाविर, आदि को उनकी मूलजाति के समान अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र नहीं मिल रहा है। जबकि वहीं इनके मूल जाति चमार, जाटव आदि को आसानी से मिल रहा है। ऐसे में इसके पर्यायवाची जातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र नहीं मिलने से संविधान और भारत सरकार के निर्देशों का खुला उल्लंघन माना जा रहा है। जो गैर कानूनी है। इससे ये सभी लोग संवैधानिक अधिकारों से वंचित हो जा रहे हैं। परिषद के प्रदेश अध्यक्ष मंजुलता निषाद ने बताया कि इस संबंध में 2016 में सभी जिलाधिकारियों को शासन द्वारा निर्देश भी जारी किया गया है। जिसे कोर्ट ने भी आदेशित किया है। इसके बाद भी तहसीलों से अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र नहीं जारी हो रहा है। उन्होंने शासन से सभी पर्यायवाची जातियों को उनके मूल जाति के अनुसार ही अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र देने की मांग किया। इसके अलावा उन्होंने पूर्व में बसपा सरकार द्वारा निषाद समाज के जिविकोपार्जन के संसाधनों मुख्यत: तालाब, ताल, पोखरी आदि का पट्टा निरस्त कर दिया गया। उन्होंने इस पट्टे को बहाल करते हुए पट्टाधाकर का नाम संक्रमणीय भूमिधर के रूप में दर्ज करने भी मांग किया। उन्होंने यह भी कहा कि नदी, ताल, बालू घाट की निलामी मत्स्य जीवी सहकारी समितियों को ही दिया जाए। इस दौरान जिलाध्यक्ष लीलावती निषाद, जिला संयोजक डा.अनिल कुमार निषाद, ईश्वरशरण निषाद, रामप्रीत निषाद, रामनाथ, राममिलन, इन्द्रेश, सुवाष, बरखू निषाद, सुनैना, बिन्दा, शकुन्तला, आदि मौजूद रहे।