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नेपाल : कामधंधा बंद होने पर घर की ओर बढ़े कदम
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नेपाल : कामधंधा बंद होने पर घर की ओर बढ़े कदम
सोनौली (महराजगंज)। नेपाल में लॉकडाउन के बाद भारतीय मजदूरों का नेपाल से पलायन मजबूरी हो गई है। नेपाल के दांग, पोखरा, काठमांडू, नारायण घाट, रूपनदेही जिले से मजदूर सड़कों पर चिलचिलाती धूप में नंगे पांव बस एवं ट्रक से सोनौली पहुंच रहे हैं। यह मजदूर, नेपाल के अलग-अलग राज्यों से परेशानी झेलने के बाद भूखे-प्यासे भारत नेपाल की सोनौली नो मेंस लैंड आ पहुंचे हैं।
नेपाल से लौट रहे भारतीय नागरिक ये वे लोग हैं, जो नेपाल के विभिन्न राज्यों में व्यापार, नौकरी और ईंट- भठ्ठों पर मजदूरी करके अपना जीवन यापन करते हैं। लेकिन कोरोना के बढ़ते संक्रमण और लॉकडाउन से नौकरी व्यापार सब बंद हो जाने के बाद सभी अपने घर के लिए निकाल पड़े हैं। सोमवार की रात से मंगलवार की सुबह तक नेपाल से भारत में जाने वालों का सिलसिला चलता रहा। इसमें ज्यादातर लखीमपुर, गोरखपुर, पडरौना, बस्ती, महराजगंज के साथ बिहार के लोग आए हैं। पिछले 14 माह से भारत नेपाल की सीमा सील है। लेकिन नेपाल में फंसे और काम कर रहे भारतीय मजदूरों को सरहद से प्रवेश दिया जा रहा है। जहां से वह बस और अन्य साधनों से अपने घरों को लौट रहे हैं।
बिरजू ,लखिबा, बिंदु, माया निवासी लखीमपुर ने बताया कि समूह के साथ नेपाल आए थे। काम नहीं होने से क्या खाएंगे अब घर लौट कर वहीं कोई काम किया जाएगा।
दो हजार लोगों ने भारत में किया प्रवेश
नेपाल में तीसरे चरण के लॉकडाउन के बढ़ने के बाद करीब दस दिनों में करीब दो हजार भारतीय कामगार, मजदूर और छोटे-मोटे कारोबार करने वाले भारतीय नागरिकों ने सोनौली सीमा से भारत में प्रवेश किया है।
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रूपनदेही और कपिलवस्तु के सबसे ज्यादा मजदूर
भारतीय मजदूरों में सबसे ज्यादा ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले मजदूर हैं। जो नेपाल के ईंट-भट्ठों पर रह कर मजदूरी करते थे। और समय पूर्व वे घर जाने को विवश हैं। मजदूर शेष नाथ निवासी बिहार ने बताया कि हम लोगों के 45 लोगों का समूह है। पिछले दिसंबर में यहां आए थे। अभी जुलाई तक का काम था लेकिन लॉकडाउन के कारण भट्ठे बंद हो गए हैं। घर जाना मजबूरी है। इन सभी नागरिकों का नौ मेंस लैंड पर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड या किसी भी परिचय पत्र की जांच के बाद उन्हें भारत में जाने दिया जा रहा है। कोतवाल दिनेश कुमार तिवारी ने सोनौली सीमा से भारतीय मजदूरों को नेपाल से आने की पुष्टि की।
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सोनौली (महराजगंज)। नेपाल में लॉकडाउन के बाद भारतीय मजदूरों का नेपाल से पलायन मजबूरी हो गई है। नेपाल के दांग, पोखरा, काठमांडू, नारायण घाट, रूपनदेही जिले से मजदूर सड़कों पर चिलचिलाती धूप में नंगे पांव बस एवं ट्रक से सोनौली पहुंच रहे हैं। यह मजदूर, नेपाल के अलग-अलग राज्यों से परेशानी झेलने के बाद भूखे-प्यासे भारत नेपाल की सोनौली नो मेंस लैंड आ पहुंचे हैं।
नेपाल से लौट रहे भारतीय नागरिक ये वे लोग हैं, जो नेपाल के विभिन्न राज्यों में व्यापार, नौकरी और ईंट- भठ्ठों पर मजदूरी करके अपना जीवन यापन करते हैं। लेकिन कोरोना के बढ़ते संक्रमण और लॉकडाउन से नौकरी व्यापार सब बंद हो जाने के बाद सभी अपने घर के लिए निकाल पड़े हैं। सोमवार की रात से मंगलवार की सुबह तक नेपाल से भारत में जाने वालों का सिलसिला चलता रहा। इसमें ज्यादातर लखीमपुर, गोरखपुर, पडरौना, बस्ती, महराजगंज के साथ बिहार के लोग आए हैं। पिछले 14 माह से भारत नेपाल की सीमा सील है। लेकिन नेपाल में फंसे और काम कर रहे भारतीय मजदूरों को सरहद से प्रवेश दिया जा रहा है। जहां से वह बस और अन्य साधनों से अपने घरों को लौट रहे हैं।
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बिरजू ,लखिबा, बिंदु, माया निवासी लखीमपुर ने बताया कि समूह के साथ नेपाल आए थे। काम नहीं होने से क्या खाएंगे अब घर लौट कर वहीं कोई काम किया जाएगा।
दो हजार लोगों ने भारत में किया प्रवेश
नेपाल में तीसरे चरण के लॉकडाउन के बढ़ने के बाद करीब दस दिनों में करीब दो हजार भारतीय कामगार, मजदूर और छोटे-मोटे कारोबार करने वाले भारतीय नागरिकों ने सोनौली सीमा से भारत में प्रवेश किया है।
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रूपनदेही और कपिलवस्तु के सबसे ज्यादा मजदूर
भारतीय मजदूरों में सबसे ज्यादा ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले मजदूर हैं। जो नेपाल के ईंट-भट्ठों पर रह कर मजदूरी करते थे। और समय पूर्व वे घर जाने को विवश हैं। मजदूर शेष नाथ निवासी बिहार ने बताया कि हम लोगों के 45 लोगों का समूह है। पिछले दिसंबर में यहां आए थे। अभी जुलाई तक का काम था लेकिन लॉकडाउन के कारण भट्ठे बंद हो गए हैं। घर जाना मजबूरी है। इन सभी नागरिकों का नौ मेंस लैंड पर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड या किसी भी परिचय पत्र की जांच के बाद उन्हें भारत में जाने दिया जा रहा है। कोतवाल दिनेश कुमार तिवारी ने सोनौली सीमा से भारतीय मजदूरों को नेपाल से आने की पुष्टि की।