Maharajganj News: हत्या को आत्महत्या का शक्ल देने के लिए खेत में फेंक दिया था शव, आरोपियों की तलाश जारी
प्रिया ने बताया कि पिता अनिल प्रसाद सात साल पहले एक व्यक्ति का मिक्सर मशीन से छत लगाने गए थे। जहां वह छत से नीचे गिर गए थे। उनका पैर टूट गया था। उस वक्त अरुण कक्षा आठ में था। परिवार का पालन-पोषण करने में समस्या हो रही थी।
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महराजगंज जिले में पनियरा थाना क्षेत्र के ग्राम सभा खैंचा में अरुण भारती की हत्या करने के बाद आरोपियों ने घटना को आत्महत्या की शक्ल देने की कोशिश की। अरुण के गले में साड़ी बांधकर शव को खेत में फेंक दिया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी गांव छोड़कर भाग गए। गांव में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है। गांव में सन्नाटा पसरा है। एएसपी आतिश कुमार सिंह, सीओ सदर अनुज कुमार सिंह और फोरेंसिक टीम ने घटना स्थल की जांच साक्ष्य जुटाए।
पुलिस के अनुसार, हत्यारोपियों ने युवक की हत्या करने के बाद लोगों को गुमराह करने के लिए उसके गले में साड़ी बांधकर शव को एक के घर के बगल में खेत में फेंक दिया था। एसओजी और सर्विलांस टीम ने आरोपियों को पकड़ने के लिए उनके रिश्तेदारों के घर पर छापे मार रही है। कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।
अरुण की मां सोनी देवी बेटे की हत्या के बाद रो रोकर अचेत हो जा रही हैं। सोनी देवी ने बताया कि पट्टीदार के घर पर मुंडन संस्कार था। रात में आर्केस्ट्रा चल रहा था। शोर शराबा ज्यादा हो रहा था। रात करी 12 बजे घर पर बेटे का दोस्त आया और उसे घूमाने के लिए बाहर जाने की बात कही। मना भी किया कि इतनी रात को मेरा बेटा कहीं नहीं जाएगा।
अरुण की मां का कहना है कि बेटे ने बात नहीं सुनी और दोस्त के साथ चला गया। मुझे शक है कि बेटे को मारने की पहले से योजना बनाई गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि योजनाबद्ध तरीके से बेटे की पीट पीटकर हत्या करने के बाद शव को खेत में फेंक दिया गया। उन्होंने बताया कि आर्केस्ट्रा देखने के दौरान एक युवक खेत में लघु शंका करने गया तो देखा कि अरुण का शव पड़ा है। उसके शोर मचाने पर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए।
बहन बोली-भाई ने गुनाह किया था तो पुलिस से शिकायत करते
अरुण की बहन प्रिया ने बताया कि भाई ने यदि गुनाह किया था तो उसकी पुलिस से शिकायत करनी चाहिए थी। बड़े भाई अमिताभ भारती की 15 वर्ष पहले ही नहर में डूबकर मौत हो गई है। अरुण ही माता-पिता और तीनों बहनों का आंखों का तारा था।
प्रिया ने बताया कि पिता अनिल प्रसाद सात साल पहले एक व्यक्ति का मिक्सर मशीन से छत लगाने गए थे। जहां वह छत से नीचे गिर गए थे। उनका पैर टूट गया था। उस वक्त अरुण कक्षा आठ में था। परिवार का पालन-पोषण करने में समस्या हो रही थी। वह माता-पिता से कहने लगा परिवार का खर्चा चलाने में दिक्कत हो रही है। अब हम पढ़ाई नहीं करेंगे, बाहर जाकर मजदूरी कर परिवार का परवरिश करेंगे।
कुछ दिनों के बाद वह पूना कमाने चला गया। पूना में पेंट पालिश करते हुए अच्छा खासा कमाने लगा था। घर की सारी जिम्मेदारी उसके कंधों पर थी। समय-समय पर माता-पिता के खातों में रुपये भेजता रहता था। माता-पिता और तीन बहनों का जीवन का गुजर बसर करने वाला एक सहारा था। लोगों ने बड़े बेरहमी से उसकी हत्या कर दी। तीनों बहनों को रोते-बिलखते देखकर गांव के लोगों की आंखें नम हो गईं।