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Maharajganj News: पहाड़ी नदियों के पानी के दबाव को नहीं झेल पाएंगे कमजोर व जर्जर बंधे
Fri, 09 Jun 2023 12:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 09 Jun 2023 12:20 AM IST
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सोनराडीह गांव के पास जर्जर बांध।संवाद
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मानसून आने में कुछ ही दिन बचे, बंधे की जर्जर हालत देख ग्रामीण भयभीत
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। नौतनवां क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा, बांधों के जर्जर व क्षतिग्रस्त होने से लोगों को बाढ़ की आशंका सताने लगी है। चानकी से रघुनाथपुर 16 किमी लंबे बंधे की स्थिति कई जगहों पर कमजोर दिखने से ग्रामीणों की बेचैनी बढ़ गई है। उनका कहना है कि बरसात में पहाड़ी नदियों के दबाव को कमजोर और जर्जर बंधे झेल नहीं पाएंगे।
ग्रामीणों का आरोप है कि जर्जर व क्षतिग्रस्त बंधे की मरम्मती शुरू नहीं कराई गई है। जबकि मानसून आने में कुछ दिन बचे हैं। उन्होंने बताया कि बांध टूटने से सैकड़ों गांवों में भारी तबाही मचती है। हजारों लोग बेघर हो जाते हैं। लोग सरकारी मदद के लिए इधर-उधर धक्का खाते हैं। बावजूद इसके जिला प्रशासन बंधे की मरम्मत नहीं करा रहा है।
नेपाल के पहाड़ों से निकली रोहिन नदी नौतनवां तहसील के सैकड़ों गांवों से होकर गुजरती है। 16 किमी लंबा बांध बीरबल टोला, आराजी सुबाइन, जगपुर, रघुनाथपुर, अमहवा, कुड़िया, सोनराडीह, कुड़िअहवा, भसहवा, सेमरहवा जर्जर हालत में हैं। सदर व नौतनवा तहसील के सैकड़ों गांवों में भारी तबाही लेकर आती है। बाढ़ से जगपुर, सलामतगढ़, पिपरहवा, आराजी सुबाइन, सोनराडीह, जिगिनिअहवा, मंगरहिया, कुड़िया, खालिकगढ़, बैरिअहवा आदि गांव बाढ़ से तबाह हो जाते हैं।
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कब-कब आई बाढ़, कहां-कहां टूटे बांध
नौतनवां तहसील क्षेत्र के लक्ष्मीपुर ब्लॉक के सैकड़ों गांव के लोग बरसात के दिनों में बाढ़ का सामना करते-करते थक चुके हैं। वर्ष 1998, 2001, 2007, 2021 एवं 2022 में आई बाढ़ ने सैकड़ों गांव के लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया था। लोग बताते हैं कि वर्ष 1998 में जब बाढ़ आई तो पूरे इलाके में पानी भर गया था। सैकड़ों मवेशी बाढ़ में बह गए थे। रघुनाथपुर, बसहवा, आराजी सुबाइन, पिपरहवा आदि स्थानों पर बांध टूटने से जन धन की खूब हानि हुई थी।
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बाढ़ के समय टापू बन जाते हैं दो दर्जन गांव
रोहिन नदी के जर्जर व क्षतिग्रस्त बांध के कारण बाढ़ व बरसात के दिनों में यहां के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। बाढ़ आने के बाद नौतनवां तहसील के दो दर्जन से अधिक ऐसे गांव है जो चारों ओर से पानी से घिर जाते हैं। रोहिन नदी नेपाल से निकलकर रघुनाथपुर से होकर बहती है। प्रधान के प्रतिनिधि चंद्रवास साहनी, अवधेश वर्मा, लालू यादव, बासमती, लीलावती, दुर्गावती, कपिलदेव, जितेंद्र चौधरी, श्यामसुंदर, रामआशीष, प्रगट निषाद, जोखू, कैलाश विश्वकर्मा ने बताया कि दर्जनों स्थानों पर बांध जर्जर व क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन मरम्मत का कार्य शुरू नहीं कराया गया है। लोगों ने बताया कि समय रहते प्रशासनिक स्तर पर तैयारी नहीं की गई तो बरसात के दिनों में हालत दयनीय हो जाएगी।
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फोटो
चानकी से रघुनाथपुर तक बंधे की स्थिति बदतर है। बंधे की मरम्मत नहीं कराई गई तो बाढ़ की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता है। बंधे की मरम्मत के लिए जिला प्रशासन गंभीर नहीं हुआ तो जनता के साथ जनआंदोलन किया जाएगा।
सुरेश चंद सहानी, किसान नेता
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जब-जब बंधे पर रेन कट होता है, विभाग के लोग मरम्मत कराने में लापरवाही करते है। इससे बंधा कमजोर होता जा रहा है। बाढ़ व बरसात आने पर क्षेत्रीय जनता के लिए मुसीबत का सबब बन जाता है।
धमेंद्र मौर्य, ग्राम प्रधान, सलामतगढ़
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पूर्व में आई बाढ़ एवं रेन कट से बंधे जर्जर व कमजोर हो गए हैं। सिंचाई विभाग बंधे की मरम्मत के लिए ठोस कार्य नहीं करता। इससे हर साल हम लोगों को बाढ़ की समस्या से जूझना पड़ता है।
जोगिंदर सहानी, पूर्व प्रधान
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बंधे की सुरक्षा के लिए विभाग समय रहते कोई इंतजाम नहीं करता। हर साल विभागीय लापरवाही के कारण समस्या झेलना मजबूरी होती है। समय रहते अगर बंधे की सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई तो फिर से घर वार छोड़ना मजबूरी होगी।
संतलाल, खलिकगढ़
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कोट
समय से पहले सभी बंधों की सुरक्षा के लिए जरूरी कार्य कराने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
-सत्येंद्र कुमार, जिलाधिकारी
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मानसून आने में कुछ ही दिन बचे, बंधे की जर्जर हालत देख ग्रामीण भयभीत
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। नौतनवां क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा, बांधों के जर्जर व क्षतिग्रस्त होने से लोगों को बाढ़ की आशंका सताने लगी है। चानकी से रघुनाथपुर 16 किमी लंबे बंधे की स्थिति कई जगहों पर कमजोर दिखने से ग्रामीणों की बेचैनी बढ़ गई है। उनका कहना है कि बरसात में पहाड़ी नदियों के दबाव को कमजोर और जर्जर बंधे झेल नहीं पाएंगे।
ग्रामीणों का आरोप है कि जर्जर व क्षतिग्रस्त बंधे की मरम्मती शुरू नहीं कराई गई है। जबकि मानसून आने में कुछ दिन बचे हैं। उन्होंने बताया कि बांध टूटने से सैकड़ों गांवों में भारी तबाही मचती है। हजारों लोग बेघर हो जाते हैं। लोग सरकारी मदद के लिए इधर-उधर धक्का खाते हैं। बावजूद इसके जिला प्रशासन बंधे की मरम्मत नहीं करा रहा है।
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नेपाल के पहाड़ों से निकली रोहिन नदी नौतनवां तहसील के सैकड़ों गांवों से होकर गुजरती है। 16 किमी लंबा बांध बीरबल टोला, आराजी सुबाइन, जगपुर, रघुनाथपुर, अमहवा, कुड़िया, सोनराडीह, कुड़िअहवा, भसहवा, सेमरहवा जर्जर हालत में हैं। सदर व नौतनवा तहसील के सैकड़ों गांवों में भारी तबाही लेकर आती है। बाढ़ से जगपुर, सलामतगढ़, पिपरहवा, आराजी सुबाइन, सोनराडीह, जिगिनिअहवा, मंगरहिया, कुड़िया, खालिकगढ़, बैरिअहवा आदि गांव बाढ़ से तबाह हो जाते हैं।
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कब-कब आई बाढ़, कहां-कहां टूटे बांध
नौतनवां तहसील क्षेत्र के लक्ष्मीपुर ब्लॉक के सैकड़ों गांव के लोग बरसात के दिनों में बाढ़ का सामना करते-करते थक चुके हैं। वर्ष 1998, 2001, 2007, 2021 एवं 2022 में आई बाढ़ ने सैकड़ों गांव के लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया था। लोग बताते हैं कि वर्ष 1998 में जब बाढ़ आई तो पूरे इलाके में पानी भर गया था। सैकड़ों मवेशी बाढ़ में बह गए थे। रघुनाथपुर, बसहवा, आराजी सुबाइन, पिपरहवा आदि स्थानों पर बांध टूटने से जन धन की खूब हानि हुई थी।
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बाढ़ के समय टापू बन जाते हैं दो दर्जन गांव
रोहिन नदी के जर्जर व क्षतिग्रस्त बांध के कारण बाढ़ व बरसात के दिनों में यहां के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। बाढ़ आने के बाद नौतनवां तहसील के दो दर्जन से अधिक ऐसे गांव है जो चारों ओर से पानी से घिर जाते हैं। रोहिन नदी नेपाल से निकलकर रघुनाथपुर से होकर बहती है। प्रधान के प्रतिनिधि चंद्रवास साहनी, अवधेश वर्मा, लालू यादव, बासमती, लीलावती, दुर्गावती, कपिलदेव, जितेंद्र चौधरी, श्यामसुंदर, रामआशीष, प्रगट निषाद, जोखू, कैलाश विश्वकर्मा ने बताया कि दर्जनों स्थानों पर बांध जर्जर व क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन मरम्मत का कार्य शुरू नहीं कराया गया है। लोगों ने बताया कि समय रहते प्रशासनिक स्तर पर तैयारी नहीं की गई तो बरसात के दिनों में हालत दयनीय हो जाएगी।
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चानकी से रघुनाथपुर तक बंधे की स्थिति बदतर है। बंधे की मरम्मत नहीं कराई गई तो बाढ़ की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता है। बंधे की मरम्मत के लिए जिला प्रशासन गंभीर नहीं हुआ तो जनता के साथ जनआंदोलन किया जाएगा।
सुरेश चंद सहानी, किसान नेता
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जब-जब बंधे पर रेन कट होता है, विभाग के लोग मरम्मत कराने में लापरवाही करते है। इससे बंधा कमजोर होता जा रहा है। बाढ़ व बरसात आने पर क्षेत्रीय जनता के लिए मुसीबत का सबब बन जाता है।
धमेंद्र मौर्य, ग्राम प्रधान, सलामतगढ़
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पूर्व में आई बाढ़ एवं रेन कट से बंधे जर्जर व कमजोर हो गए हैं। सिंचाई विभाग बंधे की मरम्मत के लिए ठोस कार्य नहीं करता। इससे हर साल हम लोगों को बाढ़ की समस्या से जूझना पड़ता है।
जोगिंदर सहानी, पूर्व प्रधान
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बंधे की सुरक्षा के लिए विभाग समय रहते कोई इंतजाम नहीं करता। हर साल विभागीय लापरवाही के कारण समस्या झेलना मजबूरी होती है। समय रहते अगर बंधे की सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई तो फिर से घर वार छोड़ना मजबूरी होगी।
संतलाल, खलिकगढ़
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समय से पहले सभी बंधों की सुरक्षा के लिए जरूरी कार्य कराने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
-सत्येंद्र कुमार, जिलाधिकारी