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पोषाहार से बने व्यंजन व सहजन से होगा कुपोषण पर वार
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पोषाहार से बने व्यंजन व सहजन से होगा कुपोषण पर वार
बाल विकास विभाग ने 32 हजार कुपोषित व 4,200 अति कुपोषित बच्चों को किया चिह्नित
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने सहजन व पोषण युक्त व्यंजन के माध्यम से कुपोषण पर वार करने का प्रयास शुरू कर दिया है। विभाग ने अति कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए उनके घर के पास सहजन के पौधे लगवाना भी शुरू कर दिया है।
जिले में करीब 32,000 कुपोषित एवं 4,200 अति कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए हैं। इन सभी कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने उनके अभिभावकों को साफ-सफाई व स्वच्छता पर ध्यान देने तथा आंगनबाड़ी केंद्रों से मिलने वाले पोषाहार से विभिन्न प्रकार का व्यंजन बनवाकर उन्हें खिलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बच्चों की नियमित निगरानी भी की जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व मुख्य सेविकाओं द्वारा समय-समय पर उनकी काउंसिलिंग भी कराई जाती है। प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बच्चों की जांच भी कराई जाती है। अति कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है। जिला कार्यक्रम अधिकारी बृजेन्द्र कुमार जायसवाल ने बताया कि सहजन का प्रयोग कुपोषण से बचाव में मददगार है। सभी कुपोषित बच्चों को नियमित रूप से इसका सेवन कराया जाना चाहिए।
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4,265 जगहों पर लगवाए जा रहे सहजन के पौधे
जिले के सभी 4,265 अति कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इन सभी बच्चों के घर के आसपास सहजन के पौधे लगवाए जा रहे हैं। बच्चों को सहजन के फल एवं पत्ती का सेवन कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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सहजन की पत्ती में मिलते हैं ये तत्व
सहजन की पत्ती व फल में कैल्शियम, आयरन, विटामिन ए, बी एवं सी मिलती है। पत्ती का जूस जीवाणु रोधी है। जिसमें एंटीबायोटिक गुण है। सहजन से कुपोषण की समस्या से निजात पाई जा सकती है।
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बाल विकास विभाग ने 32 हजार कुपोषित व 4,200 अति कुपोषित बच्चों को किया चिह्नित
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने सहजन व पोषण युक्त व्यंजन के माध्यम से कुपोषण पर वार करने का प्रयास शुरू कर दिया है। विभाग ने अति कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए उनके घर के पास सहजन के पौधे लगवाना भी शुरू कर दिया है।
जिले में करीब 32,000 कुपोषित एवं 4,200 अति कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए हैं। इन सभी कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने उनके अभिभावकों को साफ-सफाई व स्वच्छता पर ध्यान देने तथा आंगनबाड़ी केंद्रों से मिलने वाले पोषाहार से विभिन्न प्रकार का व्यंजन बनवाकर उन्हें खिलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बच्चों की नियमित निगरानी भी की जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व मुख्य सेविकाओं द्वारा समय-समय पर उनकी काउंसिलिंग भी कराई जाती है। प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बच्चों की जांच भी कराई जाती है। अति कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है। जिला कार्यक्रम अधिकारी बृजेन्द्र कुमार जायसवाल ने बताया कि सहजन का प्रयोग कुपोषण से बचाव में मददगार है। सभी कुपोषित बच्चों को नियमित रूप से इसका सेवन कराया जाना चाहिए।
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4,265 जगहों पर लगवाए जा रहे सहजन के पौधे
जिले के सभी 4,265 अति कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इन सभी बच्चों के घर के आसपास सहजन के पौधे लगवाए जा रहे हैं। बच्चों को सहजन के फल एवं पत्ती का सेवन कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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सहजन की पत्ती में मिलते हैं ये तत्व
सहजन की पत्ती व फल में कैल्शियम, आयरन, विटामिन ए, बी एवं सी मिलती है। पत्ती का जूस जीवाणु रोधी है। जिसमें एंटीबायोटिक गुण है। सहजन से कुपोषण की समस्या से निजात पाई जा सकती है।