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आलू में झुलसा और सरसों की फसल में बढ़ा माहो का खतरा
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आलू में झुलसा और सरसों की फसल में बढ़ा माहो का खतरा
मौसम में बदलाव के चलते आलू व सरसों के प्रति किसान चिंतित
संवाद न्यूज एजेंसी
परतावल। मौसम के बदले रुख के चलते आलू और सरसों की फसल को लेकर किसान चिंतित हैं। चार दिनों से लगातार सर्द हवाएं चल रहीं हैं। जानकारों का कहना है कि सर्द हवाओं का असर आलू व सरसों की फसल पर ज्यादा देखने को मिल रहा है। आलू की अगेती फसल बड़ी हो गई है, जबकि पछेती फसल में आलू का पनपना जारी है। ऐसे में कड़ाके की ठंड फसल को प्रभावित कर रही है। कोहरा हुआ तो सरसों की फसल को ज्यादा नुकसान हो सकता है।
सर्द हवाओं के ठहराव के साथ कोहरे की चपेट में आने से सरसों की फसल में नुकसान की आशंका बढ़ गई है। रबी की फसल में सबसे अधिक आलू, सरसों, गेहूं और दलहन फसलों की बुआई की जाती है। इन फसलों पर घने कोहरे और पाले का असर पड़ता है। पिछले चार दिनों से क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। ग्राम सभा पचदेऊरी के विमलेश पटेल ने बताया कि यदि इसी तरह ठंड रही तो सरसों की फसल पर माहो का जोखिम बढ़ जाएगा। इससे पौधे की पत्ती, फूल आदि भागों में संक्रमण होने की वजह से फल नहीं आता। वहीं, पाला पड़ने से आलू की फसल में झुलसा रोग लग जाता है। इस बीमारी से पौधा पूरी तरह से सूख जाता है और फसल तबाह हो जाती है। चंद्रिका का कहना है कि ठंड से गेहूं की फसल का तो नहीं, लेकिन दलहन फसलों पर भारी असर पड़ता है। पाला के कारण फसलों की पैदावार गिर जाती है। एडीओ एजी राकेश सिंह ने बताया कि हवा के करवट लेने के साथ गलन बढ़ी है। एक-दो दिन में मौसम में और ज्यादा परिवर्तन हुआ है। किसानों को खेतों में पानी का भराव रखना जरूरी है, जिससे इन फसलों पर पड़ने वाले कुप्रभाव से बचाव हो सके।
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मौसम में बदलाव के चलते आलू व सरसों के प्रति किसान चिंतित
संवाद न्यूज एजेंसी
परतावल। मौसम के बदले रुख के चलते आलू और सरसों की फसल को लेकर किसान चिंतित हैं। चार दिनों से लगातार सर्द हवाएं चल रहीं हैं। जानकारों का कहना है कि सर्द हवाओं का असर आलू व सरसों की फसल पर ज्यादा देखने को मिल रहा है। आलू की अगेती फसल बड़ी हो गई है, जबकि पछेती फसल में आलू का पनपना जारी है। ऐसे में कड़ाके की ठंड फसल को प्रभावित कर रही है। कोहरा हुआ तो सरसों की फसल को ज्यादा नुकसान हो सकता है।
सर्द हवाओं के ठहराव के साथ कोहरे की चपेट में आने से सरसों की फसल में नुकसान की आशंका बढ़ गई है। रबी की फसल में सबसे अधिक आलू, सरसों, गेहूं और दलहन फसलों की बुआई की जाती है। इन फसलों पर घने कोहरे और पाले का असर पड़ता है। पिछले चार दिनों से क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। ग्राम सभा पचदेऊरी के विमलेश पटेल ने बताया कि यदि इसी तरह ठंड रही तो सरसों की फसल पर माहो का जोखिम बढ़ जाएगा। इससे पौधे की पत्ती, फूल आदि भागों में संक्रमण होने की वजह से फल नहीं आता। वहीं, पाला पड़ने से आलू की फसल में झुलसा रोग लग जाता है। इस बीमारी से पौधा पूरी तरह से सूख जाता है और फसल तबाह हो जाती है। चंद्रिका का कहना है कि ठंड से गेहूं की फसल का तो नहीं, लेकिन दलहन फसलों पर भारी असर पड़ता है। पाला के कारण फसलों की पैदावार गिर जाती है। एडीओ एजी राकेश सिंह ने बताया कि हवा के करवट लेने के साथ गलन बढ़ी है। एक-दो दिन में मौसम में और ज्यादा परिवर्तन हुआ है। किसानों को खेतों में पानी का भराव रखना जरूरी है, जिससे इन फसलों पर पड़ने वाले कुप्रभाव से बचाव हो सके।
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