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Maharajganj News: क्षत्रिय समाज ही नहीं, समस्त भारत के लिए प्रेरणास्रोत हैं महाराणा प्रताप

Fri, 09 May 2025 07:24 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Fri, 09 May 2025 07:24 PM IST
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Maharana Pratap is a source of inspiration not only for the Kshatriya community but for the entire India
महराजगंज। अखिल क्षत्रिय महासभा ने शुक्रवार को नगर के एक मैरिज हॉल में महाराणा प्रताप की 485वीं जयंती धूमधाम से मनाई। कार्यक्रम का शुभारंभ महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष अभय सिंह ने की, जबकि संचालन जिला महामंत्री श्रीराम शाही कर रहे थे।
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जिलाध्यक्ष ने कहा की महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को राजस्थान के कुंभलगढ़ में हुआ था। उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर मातृभूमि, धर्म व स्वाधीनता की रक्षा की। मुगल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकारने से उन्होंने हमेशा इन्कार किया और आजीवन संघर्ष करते रहे। जंगलों में रहकर घास की रोटी खाना, नदी का पानी पीना और पत्थरों पर सोना उनकी देशभक्ति का परिचायक है।
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जिला महामंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप न केवल क्षत्रिय समाज, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष के लिए प्रेरणास्रोत हैं। मेवाड़ का आदिवासी भील समुदाय उन्हें अपना पुत्र मानता था। अकबर भी उनकी वीरता से भयभीत रहता था और उनके निधन पर वह भी भावुक हो गया था। इस दौरान अभिषेक प्रताप सिंह, दिग्विजय सिंह, गोपाल सिंह, रितेश सिंह, बलवंत सिंह, प्रिंस सिंह, अमित सिंह, दयाशंकर सिंह, पंकज सिंह मौजूद रहे।
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चौक बाजार प्रतिनिधि के अनुसार, दिग्विजयनाथ इंटरमीडिएट कॉलेज चौक बाजार में मनाई गई महाराणा प्रताप जयंती समारोह में वक्ताओं ने कहा कि महाराणा प्रताप ने संस्कृति की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। मुख्य वक्ता के रूप में विद्यालय के शिक्षक अरविंद कुमार ने कहा इतिहास में महाराणा प्रताप का नाम अदम्य साहसी, पराक्रमी और दृढप्रतिज्ञ व्यक्तित्व के रूप में दर्ज है।

वहीं शिक्षक बिनोद कुमार विमल ने कहा कि महाराणा प्रताप ने जंगल में तमाम तरह की दुश्वारियां अपने परिवार को साथ लेकर झेली, लेकिन अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की। प्रधानाचार्य डॉ. हरीन्द्र यादव ने कहा कि उनकी जयंती पर हम सभी को उनके जीवन चरित से सीख लेनी होगी। कार्यक्रम का संयोजन विनोद कुमार विमल व रामसुखी यादव तथा संचालन डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने किया। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट तुलसी प्रसाद, रमेश कुमार सिंह, फूल बदन, आशुतोष कुमार, अखिलेश कुमार मिश्र मौजूद रहे।
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