{"_id":"6611a5155a840783e20037d7","slug":"maharajganj-is-becoming-a-hub-of-fish-farming-maharajganj-news-c-206-1-sgkp1021-119424-2024-04-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: मछली पालन का हब बन रहा महराजगंज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: मछली पालन का हब बन रहा महराजगंज
Sun, 07 Apr 2024 01:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 07 Apr 2024 01:10 AM IST
विज्ञापन
महराजगंज। मत्स्य पालन में जिला आत्मनिर्भर ही नहीं मिनी बंगाल की तर्ज पर विकसित भी हो रहा है। 3400 तालाबों में मछली पालन और हेचरी का कारोबार हो रहा है।
मत्स्य विभाग के अनुसार जिले में प्रति माह एक हजार टन तक मछलियों का उत्पादन हो रहा है। इसकी सप्लाई प्रदेश के झांसी सहित अन्य जनपदों तक हो रही है। रोहू, कामन, बैखी, पापलेट, सिल्वर की प्रजातियों का उत्पादन खूब हो रहा है। विभाग पंजीकृत मछुआरों को चारा आदि सस्ते दर पर उपलब्ध कराता है। मछली उत्पादन के अलावा हेचरी में मछलियों की विभिन्न प्रजाति के बच्चे तैयार कर भी आसपास के जिलों तक बिक्री की जा रही है। इसके लिए 97 हेचरियां विभाग में पंजीकृत हैं।
राप्ती और रोहिन नदी यहां मानसूनी सीजन में उफनाकर कृषि क्षेत्र को प्रभावित जरूर करती हैं, लेकिन इन्हीं की बदौलत पूरे जिले में भूगर्भ जल का तल काफी ऊंचा रहता है। 50 से 60 फीट पर यहां पंपिंग सेट पानी पकड़ लेते हैं। जिले से बहने वाली नहरें भी इसमें अपना योगदान देती हैं, जिसके कारण मछली पालन के लिए जिला मुफीद बनता जा रहा है। मछली पालन के लिए निजी अथवा ग्राम पंचायतों के तालाब में पानी कम भरना पड़ता है।
विज्ञापन
3400 पंजीकृत तालाबों में से 1700 पट्टे के तालाब हैं जो कई हेक्टेयर में फैले हैं। इन तालाबों में सिर्फ मछलियां पाली जाती हैं तथा उत्पादन का ग्राफ 4500 किग्रा तक प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मिलता है। इस आंकड़े के अनुसार लगभग 1000 टन मछली हर दो माह में निकाली जाती है। इसके अलावा छोटे तालाब का उपयोग हेचरी के रूप में मछलियों के बच्चे पालने और बिक्री के लिए हो रहा है। जिले के मछली उत्पादक किसान मछली के साथ मत्स्य पालन के लिए बच्चे बेचकर दोहरा लाभ कमा रहे हैं।
विज्ञापन
मत्स्य विभाग के अनुसार जिले में प्रति माह एक हजार टन तक मछलियों का उत्पादन हो रहा है। इसकी सप्लाई प्रदेश के झांसी सहित अन्य जनपदों तक हो रही है। रोहू, कामन, बैखी, पापलेट, सिल्वर की प्रजातियों का उत्पादन खूब हो रहा है। विभाग पंजीकृत मछुआरों को चारा आदि सस्ते दर पर उपलब्ध कराता है। मछली उत्पादन के अलावा हेचरी में मछलियों की विभिन्न प्रजाति के बच्चे तैयार कर भी आसपास के जिलों तक बिक्री की जा रही है। इसके लिए 97 हेचरियां विभाग में पंजीकृत हैं।
विज्ञापन
राप्ती और रोहिन नदी यहां मानसूनी सीजन में उफनाकर कृषि क्षेत्र को प्रभावित जरूर करती हैं, लेकिन इन्हीं की बदौलत पूरे जिले में भूगर्भ जल का तल काफी ऊंचा रहता है। 50 से 60 फीट पर यहां पंपिंग सेट पानी पकड़ लेते हैं। जिले से बहने वाली नहरें भी इसमें अपना योगदान देती हैं, जिसके कारण मछली पालन के लिए जिला मुफीद बनता जा रहा है। मछली पालन के लिए निजी अथवा ग्राम पंचायतों के तालाब में पानी कम भरना पड़ता है।
विज्ञापन
3400 पंजीकृत तालाबों में से 1700 पट्टे के तालाब हैं जो कई हेक्टेयर में फैले हैं। इन तालाबों में सिर्फ मछलियां पाली जाती हैं तथा उत्पादन का ग्राफ 4500 किग्रा तक प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मिलता है। इस आंकड़े के अनुसार लगभग 1000 टन मछली हर दो माह में निकाली जाती है। इसके अलावा छोटे तालाब का उपयोग हेचरी के रूप में मछलियों के बच्चे पालने और बिक्री के लिए हो रहा है। जिले के मछली उत्पादक किसान मछली के साथ मत्स्य पालन के लिए बच्चे बेचकर दोहरा लाभ कमा रहे हैं।