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Maharajganj News: लखनऊ का दोस्त फर्जीवाड़े के खेल का मास्टर माइंड
Sun, 13 Jul 2025 12:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 13 Jul 2025 12:03 AM IST
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महराजगंज। फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने वाले आरोपी कोल्हुई के एसड़वा गांव के रामकुमार यादव का चालान कर दिया गया है। उसका एक दोस्त लखनऊ में रहता है। इस फर्जीवाड़े के खेल का मास्टर माइंड उसे ही बताया जा रहा है। फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाकर इसने कहां-कहां भेजा है। इसकी जांच की जा रही है। आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए टीम बन चुकी है।
पुलिस की पूछताछ में कई अहम जानकारी मिली है। पांच हजार रुपये लेकर एक आयुष्मान कार्ड बनाया जाता था। इसकी पोल तब खुली जब भिटौली थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर देउरवा गांव की अमीना का आयुष्मान कार्ड फर्जी मिला। अमीना इलाज कराने के लिए अस्पताल में गई थीं तो वहां कार्ड को फर्जी करार देते हुए लौटा दिया गया।
एक जुलाई को कार्ड बनाने वाले रामकुमार ने इसके बारे में जानकारी दी। उसने बताया की रकम वापस कर दो। कार्ड फर्जी है यह किसी काम का नहीं है। उसने कई बार रकम देने का अनुरोध किया, लेकिन उसने बात नहीं सुनी। धमकी देते हुए राजकुमार ने भगा दिया। इसके बाद पीड़ित अमीना को गांव के एक व्यक्ति ने साइबर थाने में शिकायत करने का सुझाव दिया।
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इसके बाद 10 जुलाई को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराईं। साइबर थाने की पुलिस ने शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस टीम आरोपी की तलाश में जुटी थी। शुक्रवार को आरोपी रामकुमार को उसके घर से ही गिरफ्तार साइबर थाने लाया गया।
उससे गहन पूछताछ की गई। जिले में उसने कितने लोगों का आयुष्मान कार्ड बनाया है। इसके बारे में अभी कुछ खास जानकारी नहीं मिली है। क्योंकि आरोपी जवाब बदल बदल कर दे रहा था।
सूत्रों की माने ताे आरोपी रामकुमार को पूरा विवरण लखनऊ में रहने वाला उसका दोस्त मुहैया कराता था। वहीं अपने नेटवर्क में शामिल लोगों को आयुष्मान कार्ड देता था। किसी को इसकी भनक भी नहीं लगती थी। कार्ड बनाने के लिए अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था आरोपी किए थे।
आयुष्मान कार्ड बनाने के बाद उसकी पीडीएफ फाइल लखनऊ भेजता था। रामकुमार के गांव के लोग भी इसके फर्जीवाड़े से अनभिज्ञ रहे। खास बात यह है कि गांव के लोगों का फर्जी कार्ड इसने नहीं बनाया है। धोखाधड़ी की पोल खुलने से बचने के लिए उसने आसपास के गांव के लोगों को निशाना नहीं बनाया था। सूत्रों की मानें तो फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाकर मोटा रकम बनाया गया है।
पात्रता के आधार पर बनाया गया आयुष्मान कार्ड ही मान्य होता
आयुष्मान भारत योजना के नोडल डॉ. नीरज के अनुसार, आयुष्मान भारत वेबसाइट पर जाकर या अपने नज़दीकी आयुष्मान मित्र से संपर्क करके अपने आयुष्मान कार्ड की वैधता की जांच कर सकते हैं। आयुष्मान कार्ड नंबर प्रदान करना होगा और अपने कार्ड की वर्तमान वैधता स्थिति की जांच करने के लिए वेबसाइट या मित्र द्वारा बताई गई प्रक्रिया का पालन करना होगा। सरकार की तरफ से तय की गई पात्रता के आधार पर बनाया गया आयुष्मान कार्ड ही मान्य होता है।
गलत तरीके से फर्जी आयुष्मान न बनवाएं
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सरकार आयुष्मान भारत योजना चला रही है, जिसके तहत लाभार्थियों को पांच लाख रुपये तक का फ्री इलाज मिलता है। योजना के तहत आयुष्मान कार्ड जारी किया जाता है। इसमें रजिस्टर्ड सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में फ्री इलाज मिलता है। गलत तरीके से फर्जी आयुष्मान न बनवाएं। इससे कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। अगर कोई फर्जी तरीके से पैसे देकर अपना आयुष्मान कार्ड बनवाता है और फ्री इलाज की सुविधा का लाभ लेता है तो ऐसे में सरकार उतने ही पैसों की वसूली कर सकती है। इसके साथ ही अलग से जुर्माना भी लगा सकती है।
आयुष्मान कार्ड के लिए क्या है पात्रता
-आयुष्मान भारत योजना के तहत 2011 की जनगणना में सूचीबद्ध परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है।
-बीपीएल कार्डधारक हो।
-भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक।
-आयुष्मान कार्ड के लिए कोई विशेष आयु सीमा नहीं है, लेकिन 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को अतिरिक्त लाभ मिलता है।
-योजना मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए है।
-दिसंबर 2018 के पहले जिन अंत्योदय कार्डधारकों के परिजनों की संख्या छह सदस्य या फिर उससे अधिक हो वह पात्र हैं।
-अंत्योदय कार्ड संशोधित न किया गया हो।
-अंत्योदय कार्ड नंबर आयुष्मान की साइड पर खुलना चाहिए।
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पुलिस की पूछताछ में कई अहम जानकारी मिली है। पांच हजार रुपये लेकर एक आयुष्मान कार्ड बनाया जाता था। इसकी पोल तब खुली जब भिटौली थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर देउरवा गांव की अमीना का आयुष्मान कार्ड फर्जी मिला। अमीना इलाज कराने के लिए अस्पताल में गई थीं तो वहां कार्ड को फर्जी करार देते हुए लौटा दिया गया।
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एक जुलाई को कार्ड बनाने वाले रामकुमार ने इसके बारे में जानकारी दी। उसने बताया की रकम वापस कर दो। कार्ड फर्जी है यह किसी काम का नहीं है। उसने कई बार रकम देने का अनुरोध किया, लेकिन उसने बात नहीं सुनी। धमकी देते हुए राजकुमार ने भगा दिया। इसके बाद पीड़ित अमीना को गांव के एक व्यक्ति ने साइबर थाने में शिकायत करने का सुझाव दिया।
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इसके बाद 10 जुलाई को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराईं। साइबर थाने की पुलिस ने शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस टीम आरोपी की तलाश में जुटी थी। शुक्रवार को आरोपी रामकुमार को उसके घर से ही गिरफ्तार साइबर थाने लाया गया।
उससे गहन पूछताछ की गई। जिले में उसने कितने लोगों का आयुष्मान कार्ड बनाया है। इसके बारे में अभी कुछ खास जानकारी नहीं मिली है। क्योंकि आरोपी जवाब बदल बदल कर दे रहा था।
सूत्रों की माने ताे आरोपी रामकुमार को पूरा विवरण लखनऊ में रहने वाला उसका दोस्त मुहैया कराता था। वहीं अपने नेटवर्क में शामिल लोगों को आयुष्मान कार्ड देता था। किसी को इसकी भनक भी नहीं लगती थी। कार्ड बनाने के लिए अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था आरोपी किए थे।
आयुष्मान कार्ड बनाने के बाद उसकी पीडीएफ फाइल लखनऊ भेजता था। रामकुमार के गांव के लोग भी इसके फर्जीवाड़े से अनभिज्ञ रहे। खास बात यह है कि गांव के लोगों का फर्जी कार्ड इसने नहीं बनाया है। धोखाधड़ी की पोल खुलने से बचने के लिए उसने आसपास के गांव के लोगों को निशाना नहीं बनाया था। सूत्रों की मानें तो फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाकर मोटा रकम बनाया गया है।
पात्रता के आधार पर बनाया गया आयुष्मान कार्ड ही मान्य होता
आयुष्मान भारत योजना के नोडल डॉ. नीरज के अनुसार, आयुष्मान भारत वेबसाइट पर जाकर या अपने नज़दीकी आयुष्मान मित्र से संपर्क करके अपने आयुष्मान कार्ड की वैधता की जांच कर सकते हैं। आयुष्मान कार्ड नंबर प्रदान करना होगा और अपने कार्ड की वर्तमान वैधता स्थिति की जांच करने के लिए वेबसाइट या मित्र द्वारा बताई गई प्रक्रिया का पालन करना होगा। सरकार की तरफ से तय की गई पात्रता के आधार पर बनाया गया आयुष्मान कार्ड ही मान्य होता है।
गलत तरीके से फर्जी आयुष्मान न बनवाएं
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सरकार आयुष्मान भारत योजना चला रही है, जिसके तहत लाभार्थियों को पांच लाख रुपये तक का फ्री इलाज मिलता है। योजना के तहत आयुष्मान कार्ड जारी किया जाता है। इसमें रजिस्टर्ड सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में फ्री इलाज मिलता है। गलत तरीके से फर्जी आयुष्मान न बनवाएं। इससे कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। अगर कोई फर्जी तरीके से पैसे देकर अपना आयुष्मान कार्ड बनवाता है और फ्री इलाज की सुविधा का लाभ लेता है तो ऐसे में सरकार उतने ही पैसों की वसूली कर सकती है। इसके साथ ही अलग से जुर्माना भी लगा सकती है।
आयुष्मान कार्ड के लिए क्या है पात्रता
-आयुष्मान भारत योजना के तहत 2011 की जनगणना में सूचीबद्ध परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है।
-बीपीएल कार्डधारक हो।
-भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक।
-आयुष्मान कार्ड के लिए कोई विशेष आयु सीमा नहीं है, लेकिन 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को अतिरिक्त लाभ मिलता है।
-योजना मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए है।
-दिसंबर 2018 के पहले जिन अंत्योदय कार्डधारकों के परिजनों की संख्या छह सदस्य या फिर उससे अधिक हो वह पात्र हैं।
-अंत्योदय कार्ड संशोधित न किया गया हो।
-अंत्योदय कार्ड नंबर आयुष्मान की साइड पर खुलना चाहिए।