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लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर: करोड़ों की इमारत तैयार, सड़क का इंतजार

Thu, 06 Aug 2026 01:43 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2026 01:43 AM IST
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Leopard Rescue Center: Building worth crores ready, waiting for road
बढ़ते वन्य जीव संघर्ष के साथ आगे बढ़ती जा रही है सेटंर शुरू होने की तारीख
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वन विभाग ने 10 किमी सड़क और बिजली के लिए भेजा है पांच करोड़ का प्रस्ताव

नीलोत्पल दुबे

महाराजगंज। सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष, तेंदुओं की मौत और हमलों के बीच मधवलिया में 15 करोड़ रुपये की लागत से बना लैपर्ड रेस्क्यू सेंटर बन कर तैयार हो गया है। सेंटर तक पहुंचने के लिए 10 किलोमीटर पक्की सड़क और बिजली कनेक्शन नहीं होने से इसका संचालन शुरू नहीं हो पा रहा है। वन विभाग ने करीब पांच करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है।

वर्ष 2021 में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) ने मधवलिया रेंज के 10 हेक्टेयर क्षेत्र में लैपर्ड रेस्क्यू सेंटर की मंजूरी दी थी। वर्ष 2023 में दो किस्तों में 15 करोड़ रुपये जारी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ। सेंटर का निर्माण दिसंबर 2025 तक पूरा कर संचालन शुरू किया जाना था। समय से काम पूरा नहीं हो सका। विभाग का कहना है कि सेंटर का संचालन तभी हो सकेगा जब निचलौल -ठूठीबारी मार्ग से सेंटर तक लगभग 10 किलोमीटर पक्की सड़क और बिजली कनेक्शन का काम पूरा हो। रेस्क्यू सेंटर में आवास, चहारदीवारी, क्वारंटीन सेल, पोस्टमार्टम हाउस, आंतरिक सड़क, जल निकासी, ट्यूबवेल, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और अन्य आवश्यक ढांचे का निर्माण पूरा हो चुका है। बाकी काम भी अक्तूबर तक पूरा हो जाएगा।
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बढ़ती संख्या के बीच सुरक्षा की चुनौती

सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग में तेंदुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। विभाग की फरवरी 2026 की गणना के अनुसार यहां 118 तेंदुए हैं। वर्ल्ड वाइल्ड टीम के मैनेजर डॉ. अरशद हुसैन ने बताया कि इस वन्य प्रभाग में तेंदुओं की संख्या अच्छी है। सेंटर शुरू होने से तेंदुओं के आबादी के बीच जाने से उत्पन्न होने वाले खतरों पर नियंत्रण संभव होगा। सेंटर निर्माण का पहला उद्देश्य यही था कि इसके जरिये जंगल के आसपास निर्मित मानव बस्तियों में सतर्कता अभियान चलाया जाए। साथ ही ऐसे तेंदुए जो अक्सर आबादी की तरफ आ रहे हैं उन्हें रेस्क्यू सेंटर में लाकर क्वारंटीन किया जाए और घायल तेंदुए का उपचार कराने के साथ ही असमय मृत्यु पर पोस्टमार्टम यहीं कर लिया जाए।
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बीते दिनों वन्यजीव संघर्ष के कई मामले सामने आए

- 01 अगस्त 2026: मिश्रौलिया गांव में गन्ने के खेत में एक साल का तेंदुआ मृत मिला, आपसी संघर्ष में मौत

- 24 मई 2026 को लक्ष्मीपुर रेंज बीट अचलगढ़ से आठ वर्षीय तेंदुआ मृत मिला।

- 20 जुलाई 2025 : बंसौली बीट के सुकरहर गांव में से 13 वर्षीय मादा तेंदुआ का शव मिला।

- 15 अगस्त 2025 को बसंतपुर मरचहवां में चारा काटने गई सोहगीबरवा की किशोरी ममता पर बाघ ने हमला कर घायल किया।

- 17 जनवरी 2025 बढ़या गेठियहवां की रहने वाली सैरुननिशां पर तेंदुए ने हमला कर दिया था, उसकी मौत हो गई।

- 10 जनवरी 2025 सोहगीबरवा की गुड्डी जंगल से लकड़ी लेने गई थी। तेंदुए के हमले में उसकी मौत हो गई।



वर्जन

मधवलिया रेंज में लैपर्ड रेस्क्यू सेंटर लगभग बनकर तैयार है। यहां तक आने-जाने के लिए 10 किमी पक्की सड़क व बिजली पहुंचाने का कार्य शेष है। शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। अक्तूबर तक इसे संचालित करने की योजना है।

-निरंजन सुर्वे, डीएफओ, महराजगंज।
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