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Maharajganj News: संशोधित...यूट्यूब से सीखा खेल, ओडिशा कनेक्शन से बना रहे थे फर्जी तरीके से आधार

Sat, 14 Feb 2026 01:35 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 14 Feb 2026 01:35 AM IST
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Learned the game from YouTube, was making fake Aadhaar using Odisha connection
नौतनवा (महराजगंज)। अवैध तरीके से आधार कार्ड बनाने के मामले में पकड़े गए दो आरोपी सूर्यनारायण निवासी दुर्गापुर, थाना नौतनवां और धीरज चौरसिया एकमा, लक्ष्मीपुर थाना पुरंदरपुर शुक्रवार को जेल भेज दिए गए। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने यूट्यूब से आधार पंजीकरण की तकनीक सीखी और ओडिशा के एक व्यक्ति की मदद से फिंगर क्लोन के जरिए फर्जीवाड़ा कर रहे थे।
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मालूम हो कि क्षेत्र के बैरवा बनकटवा टोला मणि चौराहा स्थित एक ग्राहक सेवा केंद्र (सीएससी) पर चल रहे इस अवैध खेल का बृहस्पतिवार को भंडाफोड़ हुआ था। पुलिस छापेमारी में मौके से लैपटॉप, बायोमैट्रिक मशीन, आइरिस डिवाइस, वेबकैम, मोबाइल फोन, आधार स्लिप, ओटीजी एडॉप्टर, नकदी समेत कई उपकरण बरामद किए गए। पूछताछ में गिरफ्तार किए गए सूर्यनारायण ने बताया कि करीब दस दिन पहले वह यूट्यूब पर आधार कार्ड बनाने से संबंधित वीडियो देख रहा था। उस दौरान एक वीडियो आया, जिस पर एक नंबर था और आधार बनवाने के लिए संपर्क करने को कहा गया था। उस मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर मंटू कुमार नामक व्यक्ति ने खुद को जिला आधार अधिकारी बताते हुए सहयोग का आश्वासन दिया। पुलिस ने नंबर के बारे में पता किया तो वह ओडिशा का निकला।
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सूर्यनारायण के असुसार, सात दिन पहले मंटू ने उसे सोनौली बुलाया और उसके लैपटॉप (धीरज का) में दो एप डाउनलोड किए। उसने उसे रबर का एक फिंगर क्लोन दिया और ‘नारायण साहू’ नाम से रजिस्टर्ड आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया। साथ ही रबर के फिंगर क्लोन की मदद से बायोमैट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया को धोखा देने का तरीका भी बताया गया। सूर्यनारायण के अनुसार, इसके बाद वह धीरज के साथ मणि चौराहा स्थित सीएससी पहुंचा और उसके संचालक की मदद से आधार बनाने का खेल शुरू कर दिया।
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सूत्र बताते हैं कि इन लोगों ने एक व्यक्ति से नेपालियों को आधार बनवाने के लिए भेजने और बदले में कमीशन देने की बात कहकर उसे सेट किया था। छापेमारी वाले दिन भी पुलिस के पहुंचने से पहले युवकों ने दो नेपाली नागरिकों का आधार कार्ड बनाया था। पुलिस के अनुसार, प्रत्येक आधार कार्ड के लिए 500 से 1000 रुपये तक वसूले जाते थे। प्राप्त रकम का एक हिस्सा यूपीआई के जरिए मंटू कुमार को भेजा जाता था। अब तक करीब 20 लोगों के आधार फर्जी तरीके से बनाए जाने की बात सामने आई है।

नेपाली नागरिकों के आधार बनाने की भी आशंका

सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने कमीशन के लालच में कुछ लोगों को नेपाली नागरिकों का आधार बनवाने के लिए भी प्रेरित किया। छापेमारी के दिन दो नेपाली नागरिकों का आधार बनाए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।


इन धाराओं में दर्ज हुई प्राथमिकी

सीओ अंकुर गौतम ने बताया कि दोनों आरोपियों के विरुद्ध धोखाधड़ी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से छेड़छाड़, आपराधिक षड्यंत्र तथा आधार अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में संचालित अन्य आधार पंजीकरण केंद्रों की भी जांच की जाएगी। यदि कहीं फिंगर क्लोन या अन्य अवैध तरीके से आधार बनाने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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