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Maharajganj News: बिक गई अरबों की जमीन, वक्फ ने नहीं लिया संज्ञान

Fri, 19 Jun 2026 02:14 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jun 2026 02:14 AM IST
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Land worth billions sold; Waqf did not take cognizance.
खुटहां में खूनीपुर मस्जिद की बची 3.49 हेक्टेयर जमीन पर दुकान बनाकर वसूला जाता किराया 
उम्मीद पोर्टल पर ब्यौरा दर्ज करने के दौरान पकड़ में आया मामला
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2022 में तत्कालीन एसडीएम ने बोर्ड को भेजी थी आख्या
नीलोत्पल दुबे
महराजगंज। जनपद में गोरखपुर के खूनीपुर मस्जिद, साहबगंज (वक्फ संख्या 85) की 500 एकड़ भूमि बिक गई लेकिन वक्फ बोर्ड ने संज्ञान नहीं लिया। उम्मीद पोर्टल पर वक्फ की संपत्तियों को दर्ज करने के दौरान यह राजफाश होने के बाद डीएमओ ने शासन व प्रदेश वक्फ ट्रिब्यूनल को आख्या भेजकर मामले की जानकारी दी है। इन जमीनों कीमतों एक अरब से अधिक बताई जा रही है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के रिकार्ड के मुताबिक, मुड़िला निवासी जुम्मन अंसारी ने 500 एकड़ (775 बीघा) जमीन, दो मंजिला मकान व दो एकड़ बाग वक्फ के नाम 1986 में दान की थी। जिसे गोरखपुर खूनीपुर के नाम से वक्फ मिल्कियत के तौर पर दर्ज किया गया था। लेकिन दो वर्ष बाद ही यह जमीनें पहले तैनात मुतवल्ली के परिजनों के नाम चढ़ी फिर धीरे-धीरे करके बेंच दी गईं। जबकि वक्फ की मिल्कियत न तो किसी के नाम दर्ज हो सकती और न ही बिक सकती है। आरोप है कि अभिलेखों में हेराफेरी कर इस प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।
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मुतवल्ली खलील के बाद वंशजों ने किया खेल
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के द्वारा शासन को भेजे के रिपोर्ट के मुताबिक, दान के बाद वक्फ के स्थानीय संरक्षक हुसैनी और उनके बाद की जिम्मेदारी उनके पुत्र खलील को मिली। खलील तक वक्फ की संपत्ति पर किसी तरह का अतिक्रमण नहीं था और वक्फ का ही दखल था। लेकिन 1998 के बाद वक्फ की जमीन जिस मुतवल्ली के संरक्षण में गई उन्होंने 1985 के एक फर्जी चकबंदी आदेश के सहारे पूरी जमीन अपने और परिवार के नाम कराकर धीरे-धीरे बेंच डाली। मौजूदा समय में यहां 500 एकड़ दान की जमीन में से मात्र 3.49 हेक्टेयर ही खूनीपुर मस्जिद के नाम शेष बची हुई है। इस पर दुकानों का निर्माण कराकर मौजूदा मुतवल्ली मो. शकील ने किराए पर दे रखा है।
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बदलती मिल्कियत से अंजान नहीं था वक्फ बोर्ड
जनपद में लगभग 26 वर्ष तक खूनीपुर मस्जिद के नाम दर्ज मिल्कियत का स्वामित्व बदलता रहा। ऐसा भी नहीं कि यह गुप्त तौर पर हुआ। जानकारी अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के साथ जिला प्रशासन को हुई लेकिन वक्फ संपत्ति पर प्रशासन के सीमित अधिकार के कारण प्रशासन या विभाग कुछ भी नहीं कर सका लेकिन इसे वक्फ बोर्ड के संज्ञान में लाया गया था। 2022 में आयोग ने फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ केस दर्ज कराने के निर्देश दिए, लेकिन प्रशासन ने अपने सीमित अधिकार का हवाला देकर दखल नहीं दिया और अधिकार पात्रता का हवाला दिया। आज तक मुतवल्ली पर धोखाधड़ी व जमीन बिक्री करने की प्राथमिकी नहीं दर्ज हो सकी।
जनपद में वक्फ 301 संपत्ति

जनपद में सुन्नी वक्फ बोर्ड की कुल कुल 301 संपत्तियां हैं। इसमें ईदगाह, मस्जिद, कब्रिस्तान आदि शामिल हैं। सभी संपत्तियों का ब्यौरा 12 दिसम्बर 2025 को उम्मीद पोर्टल पर अपलोड किया गया था। हालांकि 23 वक्फ संपत्तियां रिजेक्ट हो गईं। इन्हें अपलोड करने के लिए दोबारा समय दिया गया है। जनपद में शिया वक्फ बोर्ड की कोई संपत्ति नहीं है।

वर्जन
वक्फ संपत्ति से होने वाली आय मस्जिद व मदरसों के प्रबंधन में खर्च होती है। लेकिन खुटहा में 775 बीघा वक्फ संपत्ति में इसका अनुपालन नहीं हुआ, जमीन मुतवल्लियों ने बेंच दी। 2022 की प्रशासनिक आख्या का संज्ञान भी बोर्ड ने नहीं लिया। उक्त तथ्यों को संदर्भित करते हुए प्रदेश वक्फ ट्रिब्यूनल व शासन को रिपोर्ट भेजी गई। आगे क्या होगा यह प्राप्त आदेश पर निर्भर है। जो भी आदेश आएगा उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
- तन्मय पांडेय, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, महराजगंज
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