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Maharajganj News: उप डाकघर में लाखों का घोटाला, नियम-कानून के पेच में उलझी जांच

Sat, 24 May 2025 01:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Sat, 24 May 2025 01:10 AM IST
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Lakhs of rupees worth scam in sub post office, investigation entangled in rules and regulations
महराजगंज। बृजमनगंज उप डाकघर में 9.50 लाख के वित्तीय अनियमितता मामला प्रकाश में आया है। धांधली में तत्कालीन डाक सहायक का नाम आ रहा है। जिन पर सरकारी धन को अपने निजी खाते में स्थानांतरित करने और विभागीय प्रणाली का दुरुपयोग कर सेवानिवृत्त कर्मचारियों की यूजर आईडी के माध्यम से लेन-देन करने के गंभीर आरोप लगे हैं। नियम कानून के पेंच में उलझी गुत्थी को लेकर जिम्मेदार किनारा कस ले रहे हैं।
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जानकारी के अनुसार, डाक विभाग की ओर से मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति में आनंदनगर उप-मंडल के निरीक्षक अनूप कुमार चौधरी को शामिल किया गया है, जबकि अन्य सदस्यों में महराजगंज सब-डिविजन के निरीक्षक सोने लाल पटेल और पोस्टमास्टर आशीष श्रीवास्तव शामिल हैं।
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समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी संबंधित दस्तावेजों को संरक्षित रखते हुए दोषियों की पहचान करें और उनसे बयान लेकर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। सूत्रों की माने तो प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि जून 2019 से दिसंबर 2019 के बीच ''डे एंड कलेक्शन'' रिपोर्ट और ''दैनिक लेनदेन'' रिपोर्ट के आधार पर कुल 1,99,945 रुपये की राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं की गई।
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इसके अलावा, डाक जीवन बीमा (पीएलआई) और ग्रामीण डाक जीवन बीमा (आरपीएलआई) योजनाओं के तहत हुए लेनदेन में एक सेवानिवृत कर्मचारी की यूजर आईडी का प्रयोग किया गया। यह न केवल विभागीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि संभावित धोखाधड़ी की ओर भी इशारा करता है।
सूत्रों की माने तो, आरोपी जांच से बचने के लिए साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने का भी प्रयास कर रहा है। विभागीय स्तर पर उचित निगरानी और कार्रवाई न होने के चलते उन्हें ऐसा करने का अवसर मिल रहा है, जिससे पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वहीं, जांच समिति के सदस्यों पर भी निष्पक्ष और पारदर्शी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दबाव है, क्योंकि अब यह मामला विभागीय उच्चाधिकारियों की साख से भी जुड़ गया है।
व्यक्तिगत बचत खाते में करीब 34 लाख रुपये की नकद राशि जमा की
सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह है की तत्कालीन डाक सहायक ने अक्तूबर 2021 से नवम्बर 2022 तक अपने व्यक्तिगत बचत खाते में करीब 34 लाख रुपये की नकद राशि जमा की, जबकि उनका मासिक वेतन मात्र 40 हजार रुपये के आसपास था। यह लेन-देन सामान्य आर्थिक व्यवहार से मेल नहीं खाता, जिससे उनके ऊपर लगे आरोप और भी गंभीर हो जाते हैं। डाक विभाग की आंतरिक जांच में यह भी सामने आया है कि तत्कालीन डाक सहायक के पूर्व कार्यों का अब तक कोई समुचित ऑडिट या सत्यापन नहीं किया गया था।
अचल संपत्तियों की जानकारी संबंधित राजस्व अधिकारियों से प्राप्त करें
जांच समिति को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे उनके और उनके निकट संबंधियों के नाम दर्ज अचल संपत्तियों की जानकारी संबंधित राजस्व अधिकारियों से प्राप्त करें, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं गबन की गई राशि का उपयोग जमीन-जायदाद खरीदने में तो नहीं किया गया है। वर्ष 2022 में उनकी ओर से खाताधारकों दूरपाती देवी और केशव प्रसाद के खाते में की गई हेराफेरी के चलते उन्हें विभागीय दंड दिया गया था। हालांकि, तब कोई कठोर कार्रवाई न होने की वजह से अन्य मामलों की जांच ठंडे बस्ते में चली गई थी। जनवरी 2025 में एक नई शिकायत आने पर जांच की प्रक्रिया फिर शुरू हुई और अब तक करीब 9.5 लाख रुपये के गबन होने की बात सामने आ रही है।
तत्कालीन डाक सहायक से बयान देने से इंकार कर दिया
चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायत आने और जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद भी अब तक तत्कालीन डाक सहायक को निलंबित नहीं किया गया है, न ही उनके खिलाफ कोई आपराधिक केस दर्ज हुआ है। डाक विभाग की यह निष्क्रियता अब खुद सवालों के घेरे में है। इसकी तुलना में गोरखपुर मंडल के ही उरुवा पोस्ट ऑफिस में चार लाख रुपये के दुरुपयोग पर वहां के पोस्टमास्टर को तत्काल निलंबित कर दिया गया था। इसी तरह, शिवनरायन नामक डाक सहायक को पासपोर्ट मिसिंग और आधार कार्यों में लापरवाही के चलते निलंबित कर दिया गया था। जांच अधिकारी ने 2 मई और 20 मई 2025 को तत्कालीन डाक सहायक से बयान लेने का प्रयास किया था, लेकिन उन्होंने बयान देने से इनकार कर दिया।

मामले में जांच की जा रही है। पूरी रिपोर्ट तैयार होने के बाद उच्चाधिकारियों को प्रेषित की जाएगी। कुछ जानकारी मिली है। उसे सार्वजनिक किया जा सकता है। जांच गोपनीय है। नियम के अनुसार जरूरी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
अनूप चौधरी, उप निरीक्षक, आनंदनगर उप-मंडल
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