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Maharajganj News: जंकफूड बच्चों में मधुमेह का बढ़ा रहा जोखिम
Wed, 04 Jun 2025 12:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 04 Jun 2025 12:50 AM IST
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महराजगंज। आधुनिक जीवनशैली और जंक फूड किशोर व कम आयु वाले बच्चों में मधुमेह का जोखिम बढ़ा रहा है। इन दिनों आठ से 10 की संख्या में ऐसे पीड़ित पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि शारीरिक श्रम कम होने से यह अधिक प्रभावी हो रहा है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में 768 मरीजों का उपचार हुआ। टाइप-2 मधुमेह के 10 मरीज रहे, जिनकी आयु 18 वर्ष से कम रही। मधुमेह रोग विशेषज्ञ डाॅ. पवन कुमार सिंह ने बताया कि किशोरों में पहले टाइप-1 डायबिटीज के मामले मिलते थे, लेकिन दिनचर्या के चलते टाइप-2 देखने को मिल रहा है। ऐसे आठ से 10 मरीज रोजाना आ रहे हैं।
किशोर जंक फूड और चॉकलेट तो खाते ही हैं व्यायाम से भी दूर रखते हैं। इन कारणों से बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज बढ़ा है। बताया कि इसमें इंसुलिन बनती है, लेकिन कार्य नहीं करती। पहले बच्चे मैदान में खेलते थे, अब मोबाइल की लत से इससे भी दूर हो रहे हैं।
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उपचार के लिए आने वाले किशोरों के अभिभावक को उक्त बातों से अवगत कराकर बदलाव के लिए प्रेरित किया जा रहा, जिससे कम उम्र में दवा की जरूरत से किशोर बचे रहे। सीएमएस डाॅ. एके द्विवेदी ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में काम कम और आराम ज्यादा किया जा रहा। इसका प्रभाव कम उम्र में देखा जा रहा। आने वाले मरीजों को जांच के बाद खानपान और जीवनशैली में बदलाव की हिदायत दी जा रही।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में 768 मरीजों का उपचार हुआ। टाइप-2 मधुमेह के 10 मरीज रहे, जिनकी आयु 18 वर्ष से कम रही। मधुमेह रोग विशेषज्ञ डाॅ. पवन कुमार सिंह ने बताया कि किशोरों में पहले टाइप-1 डायबिटीज के मामले मिलते थे, लेकिन दिनचर्या के चलते टाइप-2 देखने को मिल रहा है। ऐसे आठ से 10 मरीज रोजाना आ रहे हैं।
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किशोर जंक फूड और चॉकलेट तो खाते ही हैं व्यायाम से भी दूर रखते हैं। इन कारणों से बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज बढ़ा है। बताया कि इसमें इंसुलिन बनती है, लेकिन कार्य नहीं करती। पहले बच्चे मैदान में खेलते थे, अब मोबाइल की लत से इससे भी दूर हो रहे हैं।
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उपचार के लिए आने वाले किशोरों के अभिभावक को उक्त बातों से अवगत कराकर बदलाव के लिए प्रेरित किया जा रहा, जिससे कम उम्र में दवा की जरूरत से किशोर बचे रहे। सीएमएस डाॅ. एके द्विवेदी ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में काम कम और आराम ज्यादा किया जा रहा। इसका प्रभाव कम उम्र में देखा जा रहा। आने वाले मरीजों को जांच के बाद खानपान और जीवनशैली में बदलाव की हिदायत दी जा रही।