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Maharajganj News: नवजात शिशु इकाई में बढ़े मरीज, ओपीडी में लंबी कतार
Sat, 09 Aug 2025 12:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 09 Aug 2025 12:23 AM IST
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जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती नवजात।
महराजगंज। शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी गई। पर्ची काउंटर से लेकर दवा वितरण काउंटर तक मरीजों की कतार लगी रही। नवजात शिशु देखभाल इकाई में क्षमता से अधिक मरीज भर्ती हैं।
डॉ. पवन कुमार सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव के चलते बुखार, उल्टी और दस्त जैसी समस्याओं से ग्रस्त मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्पताल में आने वाले अधिकांश मरीज इन्ही लक्षणों से पीड़ित मिले। इसके साथ ही अस्पताल परिसर में संचालित नवजात शिशु देखभाल इकाई (एनआईसीयू) में भी मरीजों की संख्या सामान्य से अधिक देखी गई।
32 बेड की क्षमता वाले इस केंद्र में वर्तमान में 52 नवजात शिशु भर्ती हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रमन इन बच्चों की देखरेख में जुटे हुए हैं। डॉ. पवन कुमार सिंह ने बताया कि मौसम में नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। उन्होंने लोगों से साफ-सफाई का ध्यान रखने, उबला पानी पीने और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की।
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नवजात शिशु देखभाल इकाई में भी संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। 32 बेड के मुकाबले 52 बच्चों की देखभाल के लिए प्रयास किया जा रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रमन ने बताया कि एक माह तक शिशु को सबसे ज्यादा गंभीर बीमारी का खतरा रहता है। देखभाल में थोड़ी सी भी लापरवाही बच्चों पर भारी साबित हो सकती है।
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डॉ. पवन कुमार सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव के चलते बुखार, उल्टी और दस्त जैसी समस्याओं से ग्रस्त मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्पताल में आने वाले अधिकांश मरीज इन्ही लक्षणों से पीड़ित मिले। इसके साथ ही अस्पताल परिसर में संचालित नवजात शिशु देखभाल इकाई (एनआईसीयू) में भी मरीजों की संख्या सामान्य से अधिक देखी गई।
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32 बेड की क्षमता वाले इस केंद्र में वर्तमान में 52 नवजात शिशु भर्ती हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रमन इन बच्चों की देखरेख में जुटे हुए हैं। डॉ. पवन कुमार सिंह ने बताया कि मौसम में नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। उन्होंने लोगों से साफ-सफाई का ध्यान रखने, उबला पानी पीने और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की।
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नवजात शिशु देखभाल इकाई में भी संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। 32 बेड के मुकाबले 52 बच्चों की देखभाल के लिए प्रयास किया जा रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रमन ने बताया कि एक माह तक शिशु को सबसे ज्यादा गंभीर बीमारी का खतरा रहता है। देखभाल में थोड़ी सी भी लापरवाही बच्चों पर भारी साबित हो सकती है।