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अगरबत्ती बनाकर समूह की महिलाएं बढ़ा रही आमदनी
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अगरबत्ती बनाकर समूह की महिलाएं बढ़ा रहीं आमदनी
परतावल (महराजगंज )। क्षेत्र के रूद्रापुर गांव में बने स्वयं सहायता समूह की अगरबत्ती की खुशबू दूर-दूर तक पहुंच रही है। इस कारोबार में महिलाओं को होने वाली आमदनी से उनकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हो रहा है। प्रशिक्षण में मिले ज्ञान का प्रयोग करने से मुश्किल दूर हो जाती है।
मां वैष्णो स्वयं सहायता समूह से 5 तथा मां काली स्वयं सहायता समूह से भी 5 महिलाओं ने मिलकर अगरबत्ती बनाने का काम शुरू की। अगरबत्ती बनाने के लिए कच्चा माल, लिक्विड, सेंट, पेपर, तिल्ली, रैपर, पॉलिथीन आदि की खरीदारी गोरखपुर से की जाती है। एक पैकेट की लागत लगभग 2.50 रुपये आती है। व्यापारियों को पैकेट 8 रुपये में दिया जाता है। घर पर ही खरीदार आ जाते हैं। सस्ता एवं बेहतर उत्पाद होने के कारण व्यापारी भी पसंद करते हैं। फुटकर में अगरबत्ती के एक पैकेट का मूल्य 10 रुपये रखा गया है।
मांग के अनुसार सामग्री की खरीदारी करने के बाद अगरबत्ती तैयार की जाती है। महिलाएं घरेलू कामकाज के बाद इस काम को आसानी से कर लेती हैं। इससे मिलने वाली रकम से उन्हें घर चलाने में मदद मिलती है। समूह की गीता देवी कहती हैं कि सभी महिलाएं मिलकर अगरबत्ती तैयार करती हैं। समूह की महिलाएं एक दिन में दो घंटे काम करके 70 पैकेट अगरबत्ती तैयार कर लेती हैं। प्रत्येक महिला को 70 से 100 रुपये प्रतिदिन आय होती है।
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पूजा ने कहा कि काम में कोई मुश्किल नहीं है। गीता चौरसिया, राजमति, मंशा, सावित्री, सरोज, तारा, सुशीला, विंदू आदि ने कहा कि समूह में काम करने से होने वाली आय घरेलू समस्याओं को दूर करने में मददगार हो रही है।
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समूह की महिलाएं काम कर रही हैं। अगरबत्ती की खपत बढ़ने पर आय में बढ़ोत्तरी होगी। महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। अगरबत्ती बना रहे समूह को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
हृदयानंद द्विवेदी, ब्लाक मिशन प्रबंधक
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परतावल (महराजगंज )। क्षेत्र के रूद्रापुर गांव में बने स्वयं सहायता समूह की अगरबत्ती की खुशबू दूर-दूर तक पहुंच रही है। इस कारोबार में महिलाओं को होने वाली आमदनी से उनकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हो रहा है। प्रशिक्षण में मिले ज्ञान का प्रयोग करने से मुश्किल दूर हो जाती है।
मां वैष्णो स्वयं सहायता समूह से 5 तथा मां काली स्वयं सहायता समूह से भी 5 महिलाओं ने मिलकर अगरबत्ती बनाने का काम शुरू की। अगरबत्ती बनाने के लिए कच्चा माल, लिक्विड, सेंट, पेपर, तिल्ली, रैपर, पॉलिथीन आदि की खरीदारी गोरखपुर से की जाती है। एक पैकेट की लागत लगभग 2.50 रुपये आती है। व्यापारियों को पैकेट 8 रुपये में दिया जाता है। घर पर ही खरीदार आ जाते हैं। सस्ता एवं बेहतर उत्पाद होने के कारण व्यापारी भी पसंद करते हैं। फुटकर में अगरबत्ती के एक पैकेट का मूल्य 10 रुपये रखा गया है।
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मांग के अनुसार सामग्री की खरीदारी करने के बाद अगरबत्ती तैयार की जाती है। महिलाएं घरेलू कामकाज के बाद इस काम को आसानी से कर लेती हैं। इससे मिलने वाली रकम से उन्हें घर चलाने में मदद मिलती है। समूह की गीता देवी कहती हैं कि सभी महिलाएं मिलकर अगरबत्ती तैयार करती हैं। समूह की महिलाएं एक दिन में दो घंटे काम करके 70 पैकेट अगरबत्ती तैयार कर लेती हैं। प्रत्येक महिला को 70 से 100 रुपये प्रतिदिन आय होती है।
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पूजा ने कहा कि काम में कोई मुश्किल नहीं है। गीता चौरसिया, राजमति, मंशा, सावित्री, सरोज, तारा, सुशीला, विंदू आदि ने कहा कि समूह में काम करने से होने वाली आय घरेलू समस्याओं को दूर करने में मददगार हो रही है।
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समूह की महिलाएं काम कर रही हैं। अगरबत्ती की खपत बढ़ने पर आय में बढ़ोत्तरी होगी। महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। अगरबत्ती बना रहे समूह को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
हृदयानंद द्विवेदी, ब्लाक मिशन प्रबंधक