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Maharajganj News: प्रति क्विंटल 1500 रुपये मुनाफा के चक्कर में धान सरहद पार कर रहे धंधेबाज

Thu, 20 Feb 2025 12:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Thu, 20 Feb 2025 12:51 AM IST
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In order to earn a profit of Rs 1500 per quintal, the traders are crossing the border with paddy
महराजगंज। मोटी रकम के चक्कर में तस्कर धान सरहद पार कर रहे हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर धान 2320 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकता है, जबकि बिचौलिए 1800 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से लेकर सरहद पार कर देते हैं।
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सीमापार होते ही इसकी कीमत 3500 रुपये हो जाती है। यानि हर बोरे पर करीब-करीब 1500 सौ रुपये तक का फायदा होता है। इसमें कैरियरों को प्रति बोरी महज 20 से 25 रुपये ही कमीशन मिल पाता है।
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भारत से चावल, गेहूं, धान नेपाल भेजने पर पाबंदी है। वहां जरूरत पूरी नहीं होने के कारण भारत से इसकी तस्करी होने लगती है। इस वजह से नेपाल में इन वस्तुओं का अच्छा रेट मिल जाता है। सूत्रों की माने तो पगडंडी से नेपाल में धान की तस्करी होती है और एक दिन में करीब 50 पिकअप से अधिक धान बॉर्डर पार हो जाता है।
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सीमावर्ती क्षेत्र में धान एक स्थान पर रखने के बाद मौका मिलने पर सरहद पार कर दिया जाता है। इसके बाद तस्कर नेपाल में अपने नेटवर्क के जरिए रेट तय करते हैं। धान की तस्करी के दो फायदे होते हैं। इससे चावल तो बनता ही है, चिवड़ा भी बन जाता है, जिसकी नेपाल में काफी डिमांड रहती है। नेपाल के सीमावर्ती गांव में राइस मिल लगी हैं। वहां धान की कुटाई हो जाती है। खास बात यह है कि धान बाॅर्डर से जितना आगे बढ़ेगा, रेट भी उतना ही बढ़ता जाता है। कैरियरों के माध्यम से धान सरहद पार करा दिया जाता है। तस्करों के अलावा सीमावर्ती इलाकों के किसान भी ज्यादा फायदे की चाह में कैरियरों की मदद से धान नेपाल पहुंचा देते हैं। लक्ष्मीपुर क्षेत्र के कनमिसवा में अन्य क्षेत्र से तस्कर सुरक्षा कर्मियों की नजर से बचते हुए आगे बढ़ जाते हैं। तस्करी का यह काम ज्यादातर भोर और देर रात में होता है। ्
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