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Maharajganj News: जल्द अमीर बनने की चाहत में पकड़ी अपराध की राह...पहुंच गए जेल
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शुक्रवार को पैसा दोगुना करने का झांसा देने वाले गिरोह के छह सदस्यों को पुलिस ने किया था गिरफ्तार
गिरोह के सभी सदस्य हैं शिक्षित, इंटरमीडिएट से लेकर बीकॉम तक हैं शिक्षित
निचलौल। पिछले आठ महीने से सक्रिय साइबर ठगी गिरोह के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई के बाद मामले में जांच लगातार आगे बढ़ा रही है। जांच में सामने आया है कि गिरोह में शामिल आरोपी रवि प्रताप सिंह, आकाश पटेल, विजय कुमार मौर्य, आशीष पांडेय के साथ ही कार्तिकेय पटेल शिक्षित हैं। सभी आरोपियों ने इंटरमीडिएट से लेकर बीकॉम तक की शिक्षा प्राप्त की है। इसके बावजूद नौकरी करने की बजाए उन्होंने जल्द अमीर बनने की लालच में साइबर अपराध का रास्ता चुना। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य मुख्य रूप से बैंक खातों की व्यवस्था करते थे। ये लोग जरूरतमंद या अनजान लोगों के नाम पर खाते खुलवाते थे। इतना ही नहीं कुछ खातों को जनसेवा केंद्र से उपलब्ध करा लेते थे। फिर उन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम का लेन-देन किया जाता था। जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह पिछले आठ महीने से सक्रिय था। इस बीच कई लोगों को निशाना भी बना चुका था। इस गिरोह में एक जनसेवा केंद्र संचालक की संलिप्तता भी सामने आई है, जो तकनीकी जानकारी और दस्तावेजी प्रक्रिया में अन्य आरोपियों की मदद करता था। सूत्रों का मानना है कि इसी कारण गिरोह इतनी तेजी से सक्रिय होकर लोगों को ठगने में सफल रहा।
आरोपियों के जानने वाले कुछ लोगों ने नाम न उजागर होने की शर्त पर बताया कि वे जल्द अमीर बनने की चाह रखते थे। महंगी गाड़ियां खरीदने और ब्रांडेड कपड़े पहनने का शौक उन्हें इस रास्ते तक ले आया। पुलिस आरोपियों की संपत्ति और बैंक खातों की जांच कर रही है ताकि ठगी से अर्जित रकम का पूरा ब्योरा सामने आ सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है और जल्द ही मामले में और खुलासे हो सकते हैं। साथ ही आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने बैंक खातों की जानकारी किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करें।
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एक गैंग से जुड़ाव रखता था आरोपी कार्तिकेय पटेल
साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तार आरोपियों का एक संगठित गैंग से जुड़ाव भी सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक आरोपी कार्तिकेय पटेल का नाम गंगवार क्षेत्र में सक्रिय आपराधिक गतिविधियों में सामने भी आ चुका है। आरोपी कार्तिकेय पटेल के खिलाफ पूर्व में भी मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें मारपीट सहित कई अन्य आपराधिक धाराएं शामिल हैं। पुलिस अब उसके पुराने आपराधिक नेटवर्क और वर्तमान गिरोह के बीच संबंधों की गहन जांच कर रही है।
साइबर अपराध पर नकेल कस रहा प्रतिबिंब एप
साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रतिबिंब एप पुलिस के लिए बहुत ही उपयोगी साबित हो रहा है। टेलीग्राम एप के जरिये ग्रुप बनाकर ठगी करने वालों को पकड़ने में भी इस एप ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। चूंकि साइबर अपराधी सीमाओं की परवाह नहीं करते, यह एप विभिन्न राज्यों की पुलिस को डेटा साझा करने और संयुक्त कार्रवाई करने में मदद करता है। साइबर क्राइम थाना के निरीक्षक सजनू यादव ने बताया कि प्रतिबिंब एप साइबर अपराधों में शामिल संदिग्ध मोबाइल नंबरों के भौगोलिक स्थानों को दृश्य रूप से मानचित्र पर दर्शाता है। यह एप पोर्टल एफआईआर, मोबाइल टावर डेटा, आईपी पते, वित्तीय लेनदेन और व्यवहार पैटर्न जैसे विभिन्न डेटा को एकीकृत करता है। इससे अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड, फोन और बैंक खातों का शीघ्र पता चलता है।
वर्जन
रुपये दो गुना करने का झांसा देने के मामले में चार अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
-शक्ति मोहन अवस्थी, पुलिस अधीक्षक
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गिरोह के सभी सदस्य हैं शिक्षित, इंटरमीडिएट से लेकर बीकॉम तक हैं शिक्षित
निचलौल। पिछले आठ महीने से सक्रिय साइबर ठगी गिरोह के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई के बाद मामले में जांच लगातार आगे बढ़ा रही है। जांच में सामने आया है कि गिरोह में शामिल आरोपी रवि प्रताप सिंह, आकाश पटेल, विजय कुमार मौर्य, आशीष पांडेय के साथ ही कार्तिकेय पटेल शिक्षित हैं। सभी आरोपियों ने इंटरमीडिएट से लेकर बीकॉम तक की शिक्षा प्राप्त की है। इसके बावजूद नौकरी करने की बजाए उन्होंने जल्द अमीर बनने की लालच में साइबर अपराध का रास्ता चुना। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य मुख्य रूप से बैंक खातों की व्यवस्था करते थे। ये लोग जरूरतमंद या अनजान लोगों के नाम पर खाते खुलवाते थे। इतना ही नहीं कुछ खातों को जनसेवा केंद्र से उपलब्ध करा लेते थे। फिर उन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम का लेन-देन किया जाता था। जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह पिछले आठ महीने से सक्रिय था। इस बीच कई लोगों को निशाना भी बना चुका था। इस गिरोह में एक जनसेवा केंद्र संचालक की संलिप्तता भी सामने आई है, जो तकनीकी जानकारी और दस्तावेजी प्रक्रिया में अन्य आरोपियों की मदद करता था। सूत्रों का मानना है कि इसी कारण गिरोह इतनी तेजी से सक्रिय होकर लोगों को ठगने में सफल रहा।
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आरोपियों के जानने वाले कुछ लोगों ने नाम न उजागर होने की शर्त पर बताया कि वे जल्द अमीर बनने की चाह रखते थे। महंगी गाड़ियां खरीदने और ब्रांडेड कपड़े पहनने का शौक उन्हें इस रास्ते तक ले आया। पुलिस आरोपियों की संपत्ति और बैंक खातों की जांच कर रही है ताकि ठगी से अर्जित रकम का पूरा ब्योरा सामने आ सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है और जल्द ही मामले में और खुलासे हो सकते हैं। साथ ही आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने बैंक खातों की जानकारी किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करें।
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एक गैंग से जुड़ाव रखता था आरोपी कार्तिकेय पटेल
साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तार आरोपियों का एक संगठित गैंग से जुड़ाव भी सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक आरोपी कार्तिकेय पटेल का नाम गंगवार क्षेत्र में सक्रिय आपराधिक गतिविधियों में सामने भी आ चुका है। आरोपी कार्तिकेय पटेल के खिलाफ पूर्व में भी मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें मारपीट सहित कई अन्य आपराधिक धाराएं शामिल हैं। पुलिस अब उसके पुराने आपराधिक नेटवर्क और वर्तमान गिरोह के बीच संबंधों की गहन जांच कर रही है।
साइबर अपराध पर नकेल कस रहा प्रतिबिंब एप
साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रतिबिंब एप पुलिस के लिए बहुत ही उपयोगी साबित हो रहा है। टेलीग्राम एप के जरिये ग्रुप बनाकर ठगी करने वालों को पकड़ने में भी इस एप ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। चूंकि साइबर अपराधी सीमाओं की परवाह नहीं करते, यह एप विभिन्न राज्यों की पुलिस को डेटा साझा करने और संयुक्त कार्रवाई करने में मदद करता है। साइबर क्राइम थाना के निरीक्षक सजनू यादव ने बताया कि प्रतिबिंब एप साइबर अपराधों में शामिल संदिग्ध मोबाइल नंबरों के भौगोलिक स्थानों को दृश्य रूप से मानचित्र पर दर्शाता है। यह एप पोर्टल एफआईआर, मोबाइल टावर डेटा, आईपी पते, वित्तीय लेनदेन और व्यवहार पैटर्न जैसे विभिन्न डेटा को एकीकृत करता है। इससे अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड, फोन और बैंक खातों का शीघ्र पता चलता है।
वर्जन
रुपये दो गुना करने का झांसा देने के मामले में चार अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
-शक्ति मोहन अवस्थी, पुलिस अधीक्षक