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Maharajganj News: नियमित दवा और बीमारी से लड़ने का दमखम है तो जीत जाएंगे कैंसर से जंग

Sun, 04 Feb 2024 03:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Sun, 04 Feb 2024 03:05 AM IST
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If you have the strength to take regular medicines and fight the disease, you will win the battle against cancer.
महराजगंज। नियमित दवा, दुआ और बीमारी से लड़ने का दमखम है तो कैंसर से भी जंग जीती जा सकती है। रोगी में दृढ़ इच्छाशक्ति है तो यह शरीर को बीमारी से टूटने नहीं देती और दवाओं का असर बढ़ जाता है। विश्व कैंसर जागरुकता दिवस रविवार को है। इस मौके पर ऐसे कैंसर रोगियों से बात की गई है, जो बीमारी से पूरे दमखम से लड़े, खुश रहे और जिंदगी की जंग जीत ली।
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जानकारी के अनुसार, जिले में कैंसर के इलाज की व्यवस्था नहीं है। रोगियों को इलाज कराने में बाहर जाना पड़ता है। जागरूकता के आभाव में लोगों की बीमारी बढ़ जाती है। डॉक्टरों के अनुसार जिसे समय से जानकारी हो जाती है, उसे समस्या ज्यादा नहीं होती है। कैंसर का प्रभाव अधिक होने पर इलाज कराने में दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है।
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कैंसर को हराकर अपने लोगों के बीच मे जिंदा हूं
चौक क्षेत्र के सोहगौरा निवासी जाकिर अहमद उर्फ बेचन प्रधान (63) ने बताया कि ठेकेदारी करता हूं। गांव का प्रधान भी रहा। तंबाकू खाने का बहुत शौकीन था। मुंह में पहले घाव हुआ। करीब दो वर्षों तक मेडिकल स्टोर तथा झोलाछाप से दवा लेकर खाता रहा। कभी-कभी बेतहाशा दर्द होता था। पूरी रात दर्द से कराहते बीतता था। जब घाव से बदबू आने लगी तब गोरखपुर जाकर निजी चिकित्सक को दिखाया। चिकित्सक ने जबड़े का मांस का टुकड़ा काटकर दिल्ली और मुंबई जांच के लिए भेजा। पंद्रह दिन बाद जब रिपोर्ट आई तो जांच में कैंसर होने की पुष्टि हो गई। राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट जाकर डॉक्टर को दिखाया तो वहां ऑपेरशन किया गया। आपरेशन कराने के बाद कैंसर पूरी तरह से ठीक हो गया। प्रत्येक छह महीने में चिकित्सक को दिखाने दिल्ली जाता हूं। मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि कैंसर को हराकर अपने लोगों के बीच में जिंदा हूं।
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तंबाकू से हुआ था कैंसर अब ठीक हो गया
मिठौरा ब्लाॅक के खजुरिया निवासी शैलेंद्र मिश्रा मार्केटिंग के क्षेत्र में नौकरी करते थे। भाग दौड़ भरी जिंदगी में समय से जगना और सोना नहीं हो पता था। किसी ने उनको सलाह दी कि गुटका, पान, तंबाकू खाने से नींद नहीं आती है। रात में भी जाग सकते हैं। फिर क्या था उन्होंने बिना सोचे समझे गुटका तंबाकू का सेवन करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे ऊपरी दांत के ऊपर मसूड़े में घाव हो गया। शैलेंद्र मिश्रा ने घाव होने की बात किसी से नहीं बताया और झोलाछाप से दर्द का दवा लेकर खाते रहे। करीब तीन महीने दवा खाने के बाद जब घाव ठीक नहीं हुआ तब उन्होंने राममनोहर लोहिया मेडिकल कालेज में इलाज कराया। जांच में पता चला कि घाव कैंसर का रूप ले चुका है। बिना ऑपरेशन के इलाज संभव नहीं है। चिकित्सक ने सेकाई के लिए कहा व कुछ दवा देकर घर भेज दिया। कुछ दिन दवा खाने के बाद पुनः चिकित्सक को दिखने पहुंचे तो ऑपरेशन कराया, तब जाकर किसी तरह उनकी जान बची। शैलेंद्र मिश्रा ने बताया कि किसी तरह जान बच गई। अभी भी दवा चल रही है। सतर्क रहने के लिए चिकित्सक ने बताया है। अब कभी भी तंबाकू सेवन नहीं करूंगा।

इन बातों का रखें ध्यान

- रोग जब पता चले तो तुरंत जाकर डॉक्टर को दिखाएं।

- घबराएं नहीं, योग, व्यायाम, ध्यान, पूजा-पाठ करें, जिससे मन शांत रहे।

- घरवालों का सहयोग जरूरी है, घर वाले रोगी को रोगी न समझें।

- रोगी को खूब प्यार दें, जिससे वह अवसाद में न जाने पाए।

- दवाओं में लापरवाही न बरतें, समय से दवाएं लेते रहें।

- सादा, पौष्टिक खाना लें और मस्त रहें।
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