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Maharajganj News: अभी नहीं जागे तो खतौनी कराएगी बवाल
Sun, 28 Apr 2024 01:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 28 Apr 2024 01:32 AM IST
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सदर तहसील में खतौनी के लिए लगी भीड़।संवाद
-रियल टाइम खतौनी में अंश निर्धारण के बाद खतौनी में हेक्टेयर में दर्ज किया जा रहा रकबा, वर्ग-मीटर या वर्ग फुट में हुए बैनामे में पूरा नहीं हो पा रहा पूरा अंश
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। रियल टाइम खतौनी से जुड़ी समस्या बढ़ती जा रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद का कारण बन सकती है। तहसीलों में लोग समस्याओं का समाधान कराने के लिए अधिवक्ताओं से संपर्क कर रहे हैं। रियल टाइम खतौनी में अंश निर्धारण के बाद खतौनी में हेक्टेयर में रकबा दर्ज किया जा रहा है, जिसमें वर्ग-मीटर या वर्ग फुट में हुए बैनामे में पूरा अंश दर्ज नहीं हो पा रहा है।
शनिवार को सदर व निचलौल तहसील में पहुंचे लोगों ने बताया कि पहले खतौनी में आदेश दर्ज हो जाता था और अंश निर्धारण नहीं होता था। राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत खातेदार आवेदन करते थे तो उसका अंश बताया जाता था। रियल टाइम खतौनी में अंश निर्धारण हो रहा है और अमलदरामद में 2-4 वर्ग फिट जमीन खतौनी में दर्ज होने से छूट जा रही है।
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एक ही खाते में पूरी जमीन बिक जाने के रियल टाइम खतौनी में बैनामे के बाद अंश निर्धारण भी किया जा रहा है, ताकि सभी खातेदारों का हिस्सा स्पष्ट हो जाए। इससे विवादों में कमी लाने की योजना है, क्योंकि कोई भी खातेदार उतनी ही जमीन बेच पाएगा, जितना अंश उसके खाते में दर्ज होगा।
अधिवक्ताओं ने की माने तो टुकड़े इकट्ठे हो जाएंगे तो वह हिस्सा मूल खातेदार के अंश में दिखेगा और उसे वह बेच देगा तो विवादों की नौबत आएगी। रजिस्ट्री विभागों में हर माह 100-120 बैनामे हो रहे हैं, जिसमें 60 प्रतिशत बैनामे छोटे भूखंड के होते हैं।
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निचलौल क्षेत्र के गुलरभार निवासी सुख्खू ने बताया की उन्होंने कनमिसवा गांव के सिवान में एक व्यक्ति की 20 डिस्मिल भूमि खरीदी थी। खारिज दाखिल भी हो गया था। खतौनी में नाम भी चढ़ गया था। फिर रियल टाइम खतौनी निकालने पर उक्त गाटा संख्या में उनका हिस्सा नहीं दिखा रहा है। ऐसे में वह काफी परेशान हैं। सदर क्षेत्र के डॉ. डीसी कुशवाहा ने चौपरिया में चार डिस्मिल जमीन खरीदी है। 1744 वर्ग फीट जमीन है। रियल टाइम खतौनी में रकबा पहले के जमीन मालिक का ही दिखा रहा है।
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हेक्टेयर जमीन की बड़ी इकाई है, जबकि वर्ग मीटर या वर्ग फिट छोटी इकाई है। छोटे प्लाट का बैनामा वर्ग मीटर में होता है। रियल टाइम खतौनी में गाटे का क्षेत्रफल हेक्टेयर में होना चाहिए, लेकिन कॉलम नंबर आठ में खातेदार का अंश दर्ज करने की इकाई वर्ग मीटर होनी चाहिए। इससे बैनामा और खतौनी में दर्ज रकबा का अंतर नहीं होगा।
-अरविंद मिश्रा, अधिवक्ता
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खातेदारों का अंश वर्ग मीटर में दर्ज हो तो हिस्सा छूटने की समस्या नहीं होगी। खतौनी में हेक्टेयर में रकबा दर्ज किया जा रहा है, जिसमें दशमलव के बाद चार अंकों को लिया जाता है। इसे वर्ग मीटर में परिवर्तित करना आसान है, लेकिन पहले ही दशमलव होने के कारण वर्ग मीटर या फिट के दशमलव वाले अंक छूट जा रहे हैं।
-सरयू पांडेय, अधिवक्ता
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। रियल टाइम खतौनी से जुड़ी समस्या बढ़ती जा रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद का कारण बन सकती है। तहसीलों में लोग समस्याओं का समाधान कराने के लिए अधिवक्ताओं से संपर्क कर रहे हैं। रियल टाइम खतौनी में अंश निर्धारण के बाद खतौनी में हेक्टेयर में रकबा दर्ज किया जा रहा है, जिसमें वर्ग-मीटर या वर्ग फुट में हुए बैनामे में पूरा अंश दर्ज नहीं हो पा रहा है।
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शनिवार को सदर व निचलौल तहसील में पहुंचे लोगों ने बताया कि पहले खतौनी में आदेश दर्ज हो जाता था और अंश निर्धारण नहीं होता था। राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत खातेदार आवेदन करते थे तो उसका अंश बताया जाता था। रियल टाइम खतौनी में अंश निर्धारण हो रहा है और अमलदरामद में 2-4 वर्ग फिट जमीन खतौनी में दर्ज होने से छूट जा रही है।
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एक ही खाते में पूरी जमीन बिक जाने के रियल टाइम खतौनी में बैनामे के बाद अंश निर्धारण भी किया जा रहा है, ताकि सभी खातेदारों का हिस्सा स्पष्ट हो जाए। इससे विवादों में कमी लाने की योजना है, क्योंकि कोई भी खातेदार उतनी ही जमीन बेच पाएगा, जितना अंश उसके खाते में दर्ज होगा।
अधिवक्ताओं ने की माने तो टुकड़े इकट्ठे हो जाएंगे तो वह हिस्सा मूल खातेदार के अंश में दिखेगा और उसे वह बेच देगा तो विवादों की नौबत आएगी। रजिस्ट्री विभागों में हर माह 100-120 बैनामे हो रहे हैं, जिसमें 60 प्रतिशत बैनामे छोटे भूखंड के होते हैं।
निचलौल क्षेत्र के गुलरभार निवासी सुख्खू ने बताया की उन्होंने कनमिसवा गांव के सिवान में एक व्यक्ति की 20 डिस्मिल भूमि खरीदी थी। खारिज दाखिल भी हो गया था। खतौनी में नाम भी चढ़ गया था। फिर रियल टाइम खतौनी निकालने पर उक्त गाटा संख्या में उनका हिस्सा नहीं दिखा रहा है। ऐसे में वह काफी परेशान हैं। सदर क्षेत्र के डॉ. डीसी कुशवाहा ने चौपरिया में चार डिस्मिल जमीन खरीदी है। 1744 वर्ग फीट जमीन है। रियल टाइम खतौनी में रकबा पहले के जमीन मालिक का ही दिखा रहा है।
हेक्टेयर जमीन की बड़ी इकाई है, जबकि वर्ग मीटर या वर्ग फिट छोटी इकाई है। छोटे प्लाट का बैनामा वर्ग मीटर में होता है। रियल टाइम खतौनी में गाटे का क्षेत्रफल हेक्टेयर में होना चाहिए, लेकिन कॉलम नंबर आठ में खातेदार का अंश दर्ज करने की इकाई वर्ग मीटर होनी चाहिए। इससे बैनामा और खतौनी में दर्ज रकबा का अंतर नहीं होगा।
-अरविंद मिश्रा, अधिवक्ता
खातेदारों का अंश वर्ग मीटर में दर्ज हो तो हिस्सा छूटने की समस्या नहीं होगी। खतौनी में हेक्टेयर में रकबा दर्ज किया जा रहा है, जिसमें दशमलव के बाद चार अंकों को लिया जाता है। इसे वर्ग मीटर में परिवर्तित करना आसान है, लेकिन पहले ही दशमलव होने के कारण वर्ग मीटर या फिट के दशमलव वाले अंक छूट जा रहे हैं।
-सरयू पांडेय, अधिवक्ता