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Maharajganj News: सती के मन में उत्पन्न आशंका से आहत होकर महादेव ने किया परित्याग

Sat, 02 Mar 2024 08:57 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 02 Mar 2024 08:57 PM IST
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Hurt by the apprehension that arose in Sati's mind, Mahadev abandoned her.
घुघली। सती के मन में उत्पन्न हुए आशंका से आहत भगवान शंकर ने सती का परित्याग कर एकांत समाधि में लीन हो गए, इसके पहले भगवान शंकर ने सती को बताया था की आप परीक्षा मेरी मां का रूप बन कर की है। अब मैं आपको उसी रूप में देखूंगा। उक्त बातें हरखा प्यास में आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा के दूसरे दिन राजन महाराज ने कही।
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उन्होंने कहा कि एक बार भगवान शिव माता सती दोनों वन में अगस्त ऋषि के पास कथा सुनने गए थे। ऋषि ने दोनों लोगों को देखा तो मन ही मन प्रणाम किया और उसी दौरान माता को दिव्य आसन देकर पूजा अर्चना कर राम कथा सुनाने लगे। माता को आश्चर्य हुआ की यह तो हमारी पूजा कर रहे हैं, हमसे कम ज्ञानी है क्या, बाबा इनके पास क्यों लेकर आए हैं। माता के मन में अनेक प्रकार के आशंका उत्पन्न होने लगी।
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राजन महराजगंज ने श्रोताओं को कथा का रसपान कराते हुए कहा कि समय त्रेता युग में भगवान श्रीराम भी वन में माता सीता व लक्ष्मण के साथ रह रहे थे। माता सीता के बियोग में भगवान इधर उधर ढूंढ़ रहे थे। माता सती ने कहा की यह कैसे भगवान है जो पत्नी के वियोग में इधर उधर भटक रहे हैं। इधर बाबा माता के मन में उत्पन्न हुए आशंका को समझ गए। तभी माता सती ने बाबा से कहा कि मैं इनकी परीक्षा लेना चाहती हूं। वह माता सीता का वेष बदल कर उनके रास्ते से आने जाने लगीं। इस लीला को भगवान राम देख रहे थे। इस दौरान लक्ष्मण की निगाहे माता सती पर गई तो उन्होंने भाप लिया और मन ही मन प्रणाम कर राम से माता की तरफ इशारा किया। जब भगवान राम की निगाहे माता पर पड़ी तो वहीं रूककर प्रणाम किया। यह बात बता के समझ में आ गई, लेकिन यही से माता व बाबा के अलग होने का रास्ता भी बन गया। महादेव ने तो माता के त्याग करने का मन बना लिया, उन्होंने माता से कहा कि अब आप सती नहीं है, क्योंकि हमारी जब भी निगाहें आप पर पड़ती हैं तो माता का चेहरा नजर आता है। उसी समय सती के पिता हिमाचल ने एक बहुत बड़ा यज्ञ करवाने का मन बना लिया। सबको निमंत्रण मिला सती व महादेव को निमंत्रण नहीं मिला। सती बिना बुलाए महादेव के आज्ञा से उस यज्ञ में गई। किसी के पूछने पर यज्ञ में अपने शरीर की आहुति दे दी। इस दौरान वरुण पांडेय, शंकर पांडेय, नीरज, वेद प्रकाश आदि मौजूद रहे।
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