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Maharajganj News: हाईवे निर्माण...हाथ से गई जमीन, रकम के लिए लगा रहे चक्कर
Fri, 15 Mar 2024 03:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 15 Mar 2024 03:07 AM IST
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महराजगंज। जिले में गोरखपुर से सोनौली और महराजगंज से नेपाल बॉर्डर तक हाईवे का निर्माण चल रहा है। दोनों सड़कों के दायरे में आने वाली जमीने सरकार ने ले ली है, लेकिन ज्यादातर लोग मुआवजे के लिए विभाग का चक्कर लगा रहे हैं। कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस समस्या से अवगत कराया है। मुआवजा न मिलने के कारण बीते दिनों लोगों ने ठूठीबारी हाईवे निर्माण कार्य रोक दिया था।
सोनौली जाने वाले हाईवे पर संपतिहा में उर्मिला देवी मिलीं। बातचीत में उन्होंने अपना दर्द साझा किया। बताया कि सात कमरे का तीन मंजिला मकान 2001 में बना था। इसमें किराने की दुकान संचालित होती थी। आठ वर्ष पूर्व पति दीपचंद की मौत हो गई। बेटा सोनू, बहु संगम, नाती आरोही, नातिन अनन्या, छोटा बेटा कृष्णा के साथ मकान में रहती थी। मुआवजा के लिए सात लाख 77 हजार रुपये का मूल्यांकन किया गया है, जो आज तक नहीं मिला।
भू अध्याप्ति अधिकारी के पास गुहार लगाई गई, लेकिन रकम नहीं मिली। अपने पास जो धन था उससे मजदूर रखकर ऊपर का छत तुड़वा दिया। किराए का घर खोज रही हूं, लेकिन एडवांस देने के लिए रकम नहीं है। परेशानी सुनने वाला कोई नहीं है। संपतिहा चौराहे पर ही आगे बढ़ने पर छेदीलाल अग्रहरी मिले। वह परेशान दिख रहे थे। उन्होंने बताया कि आठ कमरे का तीन मंजिला मकान था, जिसमें कपड़े की दुकान संचालित हो रही थी। पत्नी दुर्गावती देवी, बेटा संदीप कुमार, बहू दिव्या, नातिन विधि, छोटा बेटा राजकमल के साथ रहते थे। आठ लाख 29 हजार मूल्यांकन किया गया है। मुआवजे की रकम अब तक नहीं मिली है। अपने खर्चे से ऊपरी दो मंजिल तोड़ा गया। निचले मंजिल में परिवार है। दुकान किराए पर दूसरे के घर में शिफ्ट कर दिया है। मुआवजा की रकम मिल जाती तो कहीं रहने के लिए मकान की व्यवस्था करता। बताया कि बृहस्पतिवार को अधिकारी मौके पर आए। उन्होंने दो चार दिन में खाते में रकम आने की बात कही है। इन लोगों के अलावा चौराहे पर तमाम लोग मिले। रामपत चौरसिया, रामवृक्ष अग्रहरी, रंगनाथ पांडे, ओमप्रकाश भारती, जय किशुन वरुण, नेबुलाल चौरसिया मुआवजा पाने के लिए परेशान हैं। रमपत के अलावा इन सभी ने अपने मकान तोड़कर जमीन खाली कर दिया है।
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सोनौली जाने वाले हाईवे पर संपतिहा में उर्मिला देवी मिलीं। बातचीत में उन्होंने अपना दर्द साझा किया। बताया कि सात कमरे का तीन मंजिला मकान 2001 में बना था। इसमें किराने की दुकान संचालित होती थी। आठ वर्ष पूर्व पति दीपचंद की मौत हो गई। बेटा सोनू, बहु संगम, नाती आरोही, नातिन अनन्या, छोटा बेटा कृष्णा के साथ मकान में रहती थी। मुआवजा के लिए सात लाख 77 हजार रुपये का मूल्यांकन किया गया है, जो आज तक नहीं मिला।
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भू अध्याप्ति अधिकारी के पास गुहार लगाई गई, लेकिन रकम नहीं मिली। अपने पास जो धन था उससे मजदूर रखकर ऊपर का छत तुड़वा दिया। किराए का घर खोज रही हूं, लेकिन एडवांस देने के लिए रकम नहीं है। परेशानी सुनने वाला कोई नहीं है। संपतिहा चौराहे पर ही आगे बढ़ने पर छेदीलाल अग्रहरी मिले। वह परेशान दिख रहे थे। उन्होंने बताया कि आठ कमरे का तीन मंजिला मकान था, जिसमें कपड़े की दुकान संचालित हो रही थी। पत्नी दुर्गावती देवी, बेटा संदीप कुमार, बहू दिव्या, नातिन विधि, छोटा बेटा राजकमल के साथ रहते थे। आठ लाख 29 हजार मूल्यांकन किया गया है। मुआवजे की रकम अब तक नहीं मिली है। अपने खर्चे से ऊपरी दो मंजिल तोड़ा गया। निचले मंजिल में परिवार है। दुकान किराए पर दूसरे के घर में शिफ्ट कर दिया है। मुआवजा की रकम मिल जाती तो कहीं रहने के लिए मकान की व्यवस्था करता। बताया कि बृहस्पतिवार को अधिकारी मौके पर आए। उन्होंने दो चार दिन में खाते में रकम आने की बात कही है। इन लोगों के अलावा चौराहे पर तमाम लोग मिले। रामपत चौरसिया, रामवृक्ष अग्रहरी, रंगनाथ पांडे, ओमप्रकाश भारती, जय किशुन वरुण, नेबुलाल चौरसिया मुआवजा पाने के लिए परेशान हैं। रमपत के अलावा इन सभी ने अपने मकान तोड़कर जमीन खाली कर दिया है।
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