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Maharajganj News: धनुष तोड़ते ही पंडाल में गूंजा हर-हर महादेव
Wed, 05 Feb 2025 06:52 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 05 Feb 2025 06:52 PM IST
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मिठौरा। क्षेत्र के ग्राम सभा मिठौरा में श्री रुद्र मृत्युंजय महायज्ञ के चौथे दिन बुधवार को अयोध्या के रामलीला मंडल के कलाकारों ने धनुष यज्ञ, बाणासुर-रावण संवाद के साथ परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन किया। इस दौरान श्रीराम द्वारा भगवान शिव का धनुष तोड़ते ही पूरा पंडाल हर-हर महादेव, जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। वहीं रावण-बाणासुर व परशुराम-लक्ष्मण संवाद के मंचन ने लोगों को रोमांचित कर दिया।
मिथिला के राजा जनक के आमंत्रण पर राम व लक्ष्मण विश्वामित्र के साथ राजा जनक के यहां सीता स्वयंवर में पहुंचते हैं। राम व लक्ष्मण के सौंदर्य को देखकर वहां सभी मोहित हो जाते हैं। इसी बीच लंकाधिपति बिना आमंत्रण सीता स्वयंवर में पहुंचता है। यह देखकर बाणासुर ने रावण का परिचय पूछा। परिचय पूछने पर रावण क्रोध से तमतमा उठता है। यहीं से रावण-बाणासुर संवाद शुरू होता है।
रावण सीता स्वयंवर के लिए आमंत्रण न मिलने पर राजा जनक पर क्रोधित होता है। निमंत्रण न दिए जाने का कारण पूछता है। जनक कहते हैं कि समुद्र पार लंका जाना संभव नहीं था, इसलिए निमंत्रण नहीं भेज सका, तो रावण और क्रोधित हो जाता है और कहता है कि यदि आप ने समुद्र में एक पत्र भी डाल दिया होता तो समुद्र में इतना साहस नहीं होता कि हम तक वह न पहुंचा देता। इसके बाद सीता स्वयंवर में आए रावण सहित तमाम राजाओं ने धनुष तोड़ने की पूरी कोशिश कि पर कोई हिला नहीं सका। राज जनक की चिंता बढ़ जाती है और कहा कि हे देश देश भूपतिगण, हम कहे किसे बलशाली है। संवाद
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मिथिला के राजा जनक के आमंत्रण पर राम व लक्ष्मण विश्वामित्र के साथ राजा जनक के यहां सीता स्वयंवर में पहुंचते हैं। राम व लक्ष्मण के सौंदर्य को देखकर वहां सभी मोहित हो जाते हैं। इसी बीच लंकाधिपति बिना आमंत्रण सीता स्वयंवर में पहुंचता है। यह देखकर बाणासुर ने रावण का परिचय पूछा। परिचय पूछने पर रावण क्रोध से तमतमा उठता है। यहीं से रावण-बाणासुर संवाद शुरू होता है।
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रावण सीता स्वयंवर के लिए आमंत्रण न मिलने पर राजा जनक पर क्रोधित होता है। निमंत्रण न दिए जाने का कारण पूछता है। जनक कहते हैं कि समुद्र पार लंका जाना संभव नहीं था, इसलिए निमंत्रण नहीं भेज सका, तो रावण और क्रोधित हो जाता है और कहता है कि यदि आप ने समुद्र में एक पत्र भी डाल दिया होता तो समुद्र में इतना साहस नहीं होता कि हम तक वह न पहुंचा देता। इसके बाद सीता स्वयंवर में आए रावण सहित तमाम राजाओं ने धनुष तोड़ने की पूरी कोशिश कि पर कोई हिला नहीं सका। राज जनक की चिंता बढ़ जाती है और कहा कि हे देश देश भूपतिगण, हम कहे किसे बलशाली है। संवाद
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