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Maharajganj News: जिला अस्पताल में पहली बार घुटने और स्पाइन का हुआ ऑपरेशन

Mon, 16 Jun 2025 12:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Mon, 16 Jun 2025 12:36 AM IST
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For the first time, knee and spine operations were conducted in the district hospital
महराजगंज। जिला अस्पताल ने ऑपरेशन मामले में उपलब्धि हासिल की है। अधेड़ की घुटने की टूटे सभी धागों को दूरबीन विधि से जोड़कर उसे चलने योग्य बना दिया गया। बाइक की ठोकर से रीढ़ की हड्डी फ्रैक्चर होने के बाद किशोर के दोनों पैर सुन्न पड़ गए।
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किशोर के स्पाइन का ऑपरेशन कर उसे चलने योग्य बना दिया। कूल्हे का प्रत्यारोपण के बाद बुजुर्ग ने जब चलना शुरू किया तो परिवार के लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। तीनों पीड़ितों को चलने योग्य होने पर उनके चेहरे पर खुशी लौट गई। अस्पताल प्रशासन ने अस्पताल में पहली बार घुटने व स्पाइन का सफल ऑपरेशन पर खुशी जाहिर कर ऑर्थों सर्जन डॉ. विकास कुमार और उनकी टीम को बधाई दी है। घुघली क्षेत्र के भरवलिया निवासी आरती (50) घर के आंगन में फिसलकर गिर गईं। उनके घुटने में काफी चोटें आ गईं। इससे वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गईं। घरवाले उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। ऑर्थो सर्जन डॉ. विकास कुमार ने डिजिटल एक्स-रे के बाद एमआरआई कराया। एमआरआई रिपोर्ट में उनके घुटने के सभी धागे टूट मिले। डॉक्टर ने ऑपरेशन कराने की सलाह दी। घरवालों ने धन की कमी से ऑपरेशन कराने में असमर्थता जताया।
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परिजनों ने बताया कि आयुष्मान कार्ड है। डॉक्टर ने तत्काल आयुष्मान योजना के तहत दूरबीन विधि से घुटने के टूटे सभी धागों को जोड़ दिया। ऑन बेड पड़ी आरती अब अपने पैर पर पूरी तरह खड़ा हो जा रही है। तीन दिन में चलने लगेंगी। दूरबीन विधि से अस्पताल में पहली बार घुटने का ऑपरेशन कर टूटे धागों को जोड़ा गया है। पनियरा क्षेत्र के खैचा निवासी प्यारे (80) पैर फिसलने से गिर गए। इस घटना में उनकी कूल्हा टूट गया। कूल्हा टूटने से चलने-फिरने में असमर्थ हो गए। घर वाले उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे।
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डिजिटल एक्स-रे जांच में कूल्हा टूटा मिला। डॉक्टर ने प्यारे का जिला अस्पताल में आयुष्मान मित्र के पास भेज आयुष्मान कार्ड बनवाया गया। 26 मई को प्यारे का कूल्हे का प्रत्यारोपण हुआ। 15 दिन तक भर्ती कर इलाज हुआ। 10 जून को जब प्यारे बेड से उठकर टहलने लगे तो उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके पहले ऑर्थों सर्जन ने 10 बुजुर्गों का कूल्हा प्रत्योपण कर उन्हें चलने योग्य बना दिया।
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