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दुधराई बीट में दिखा बाघ, सुरक्षा बढ़ी
अमर उजाला ब्यूराे
Updated Thu, 19 Jan 2017 12:44 AM IST
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tiger
- फोटो : amar ujala
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निचलौल। सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग के मधवलियां रेंज के दुधराई बीट के जंगल में बुधवार की सुबह एक बाघ देखे जाने की सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों ने दर्जन भर स्थानों पर बाघ के पदचिह्न देखा और पीओपी की मदद से पदचिह्नों का नमूना भी लिया। लोगों से इन दिनों जंगल की ओर न जाने की अपील करते हुए रेंजर ने मातहतों को सुरक्षा के व्यापक प्रबंध करने का निर्देश दिया।
दुधराई बीट के जंगलों में बाघ की दस्तक से वन विभाग में खुशी का माहौल है। बुधवार सुबह जलौनी के इंतजाम के लिए जंगल में घुसे कुछ लोगों ने बाघ को देखा तो उनके होश फाख्ता हो गए। लोगों ने इसकी सूचना वनकर्मियों को दी। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों ने दर्जन भर स्थानों पर मिले बाघ के पदचिह्नों को देखा और उसकी फोटोग्राफी भी कराई। यही नहीं, पीओपी की मदद से बाघ के फुटप्रिंट के नमूने भी लिए गए। जंगल की सुरक्षा बढ़ाने के साथ विशेष निगरानी को लेकर रेंजर ने मातहतों को हिदायत दी। साथ ही ग्रामीणों से भी इन दिनों जंगल की ओर न जाने की बात कहते हुए सुरक्षा में सहयोग की अपील की है।
इस संबंध में रेंजर डीएस तिवारी का कहना है कि जंगल में बाघ पहले से ही मौजूद हैं। कोहरे की वजह से रास्ता भटक कर वह किनारे आ गया है। जंगल किनारे कुछ स्थानों पर उसके पदचिह्न भी मिले हैं। धुंध छटते ही वह पुन: अपने मूल स्थान की ओर चला जाएगा। इस दौरान उन्होंने लोगों से जंगल की ओर न जाने की अपील की और कहा कि बाघ या कोई भी जानवर जंगल की हद से बाहर दिखे तो तत्काल उसकी सूचना विभाग को दें।
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दुधराई बीट के जंगलों में बाघ की दस्तक से वन विभाग में खुशी का माहौल है। बुधवार सुबह जलौनी के इंतजाम के लिए जंगल में घुसे कुछ लोगों ने बाघ को देखा तो उनके होश फाख्ता हो गए। लोगों ने इसकी सूचना वनकर्मियों को दी। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों ने दर्जन भर स्थानों पर मिले बाघ के पदचिह्नों को देखा और उसकी फोटोग्राफी भी कराई। यही नहीं, पीओपी की मदद से बाघ के फुटप्रिंट के नमूने भी लिए गए। जंगल की सुरक्षा बढ़ाने के साथ विशेष निगरानी को लेकर रेंजर ने मातहतों को हिदायत दी। साथ ही ग्रामीणों से भी इन दिनों जंगल की ओर न जाने की बात कहते हुए सुरक्षा में सहयोग की अपील की है।
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इस संबंध में रेंजर डीएस तिवारी का कहना है कि जंगल में बाघ पहले से ही मौजूद हैं। कोहरे की वजह से रास्ता भटक कर वह किनारे आ गया है। जंगल किनारे कुछ स्थानों पर उसके पदचिह्न भी मिले हैं। धुंध छटते ही वह पुन: अपने मूल स्थान की ओर चला जाएगा। इस दौरान उन्होंने लोगों से जंगल की ओर न जाने की अपील की और कहा कि बाघ या कोई भी जानवर जंगल की हद से बाहर दिखे तो तत्काल उसकी सूचना विभाग को दें।
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