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Maharajganj News: रानीपुर रजवाहा पर बनेंगे पांच पुल...संवरेंगी पटरियां
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रजवाहा नहर पर स्थित बैदा गांव के पोखरहवा टोले में बना पुल जर्जर।
महराजगंज। लंबे समय से उपेक्षित रानीपुर रजवाहा का अब पुनर्निर्माण और सीमांकन होगा। शासन ने इस परियोजना को स्वीकृति प्रदान कर दी। इसमें क्षतिग्रस्त आठ पुलों का मरम्मत कार्य, पटरियों का इंटरलाकिंग, जमीनों की तारबंदी, पांच नए छोटे पुलों का निर्माण शामिल है। परियोजना पर लगभग दो करोड़ 73 लाख रुपये खर्च होंगे।
जानकारी के अनुसार, जिले के रानीपुर राजवाहा के पुनर्स्थापना और सीमांकन तहत 11.800 किमी लंबी नहर के किनारे सीमांकन कर पिलर लगाए जाएंगे। इसके अलावा, 5.5 किमी लंबी पटरी पर इंटरलॉकिंग कार्य किया जाएगा, जिससे नहर के किनारे की राह मजबूत और सुगम हो सके।
इस परियोजना में पांच नए पुलों का निर्माण शामिल है, जो क्षेत्र में आवागमन को सुगम बनाएंगे। साथ ही, आठ पुराने और जर्जर हो चुके पुलों की मरम्मत की जाएगी और इन पर रेलिंग का निर्माण भी होगा। सभी पुलों की रंगाई कर उन्हें नया रूप दिया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनके खेतों तक पहुंचने में सुविधा प्रदान करना और नहर के किनारे की भूमि का सटीक सीमांकन कर भूमि विवादों को कम करना है। इंटरलाॅकिंग कार्य से नहर के किनारे की राह मजबूत होगी, जिससे किसानों को अपने खेतों तक उपकरण और सामान ले जाने में आसानी होगी। इसके अलावा, नए और मरम्मत किए गए पुल आवागमन को सुगम बनाएंगे, जिससे न केवल किसानों को लाभ होगा, बल्कि क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
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ग्रामीण विजय ने बताया कि पुराने पुलों की स्थिति इतनी खराब है कि उन पर चलना जोखिम भरा हो गया है। गुड्डू ने कहा कि जर्जर पुलों के कारण कई बार भारी उपकरणों को खेतों तक ले जाना मुश्किल हो जाता है। जयहिंद कुमार ने कहा कि हर समय यह डर बना रहता है कि कहीं पुल धंस न जाए।
रणजीत, राम-लखन का कहना है कि इस परियोजना के पूरा होने से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि खेतों तक पहुंचने में लगने वाला समय और मेहनत भी कम होगी। इसके अलावा, नहर के किनारे इंटरलाॅकिंग और पिलर लगने से खेतों की सीमाएं स्पष्ट होंगी, जिससे भूमि विवादों में कमी आएगी। यह परियोजना स्थानीय किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
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जानकारी के अनुसार, जिले के रानीपुर राजवाहा के पुनर्स्थापना और सीमांकन तहत 11.800 किमी लंबी नहर के किनारे सीमांकन कर पिलर लगाए जाएंगे। इसके अलावा, 5.5 किमी लंबी पटरी पर इंटरलॉकिंग कार्य किया जाएगा, जिससे नहर के किनारे की राह मजबूत और सुगम हो सके।
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इस परियोजना में पांच नए पुलों का निर्माण शामिल है, जो क्षेत्र में आवागमन को सुगम बनाएंगे। साथ ही, आठ पुराने और जर्जर हो चुके पुलों की मरम्मत की जाएगी और इन पर रेलिंग का निर्माण भी होगा। सभी पुलों की रंगाई कर उन्हें नया रूप दिया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनके खेतों तक पहुंचने में सुविधा प्रदान करना और नहर के किनारे की भूमि का सटीक सीमांकन कर भूमि विवादों को कम करना है। इंटरलाॅकिंग कार्य से नहर के किनारे की राह मजबूत होगी, जिससे किसानों को अपने खेतों तक उपकरण और सामान ले जाने में आसानी होगी। इसके अलावा, नए और मरम्मत किए गए पुल आवागमन को सुगम बनाएंगे, जिससे न केवल किसानों को लाभ होगा, बल्कि क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
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ग्रामीण विजय ने बताया कि पुराने पुलों की स्थिति इतनी खराब है कि उन पर चलना जोखिम भरा हो गया है। गुड्डू ने कहा कि जर्जर पुलों के कारण कई बार भारी उपकरणों को खेतों तक ले जाना मुश्किल हो जाता है। जयहिंद कुमार ने कहा कि हर समय यह डर बना रहता है कि कहीं पुल धंस न जाए।
रणजीत, राम-लखन का कहना है कि इस परियोजना के पूरा होने से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि खेतों तक पहुंचने में लगने वाला समय और मेहनत भी कम होगी। इसके अलावा, नहर के किनारे इंटरलाॅकिंग और पिलर लगने से खेतों की सीमाएं स्पष्ट होंगी, जिससे भूमि विवादों में कमी आएगी। यह परियोजना स्थानीय किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।