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Maharajganj News: उत्साह में जमकर फोड़े पटाखे, 16 अंक बढ़ा एयर क्वालिटी इंडेक्स
Wed, 24 Jan 2024 06:12 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 24 Jan 2024 06:12 PM IST
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महराजगंज। दिवाली ही नहीं पटाखे जब भी जलते हैं इसका असर दिखने लगता है। पटाखे जलाने से चार दिन के अंदर 16 अंक एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ा है। रविवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स 150 रहा। वहीं बुधवार को बढ़कर 166 हो गया। ऐसे में शहर की आबोहवा एक बार फिर खराब हो गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जिले में सोमवार को जमकर आतिशबाजी हुई। इसके चलते प्रदूषण का स्तर अचानक बढ़ गया है। ऐसे में सुबह टहलने वालों की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। वहीं, डॉक्टर की सलाह है कि ऐसे समय हृदय और सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। पिछले चार दिनों से चल रहे पछुआ हवा के चलते वातावरण में नमी बनी हुई है। बावजूद इसके शहर में आबोहवा स्वच्छ श्रेणी में थी। शनिवार को एक्यूआई 130 था जो रविवार को 150 पहुंच गया था। इसके बाद सोमवार को श्रीराम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की खुशी में शहर में जमकर आतिशबाजी हुई। परिणाम स्वरूप सोमवार की रात में एक्यूआई बढ़कर 155 पहुंच गया। बुधवार की सुबह 10 बजे यह 166 पर पहुंच गया।
वायुमंडल में ऊपर नहीं जा पा रहे प्रदूषण के कण
जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज महराजगंज भूगोल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर दिवाकर सिंह ने बताया कि वातावरण में नमी के चलते प्रदूषण के कण वायुमंडल में ऊपर नहीं जा पा रहे हैं, जिससे कोहरा व धुंध बना हुआ है। हवा की रफ्तार धीमी होने के चलते कण निचले स्तर पर बने हुए हैं। शहर निर्माण कार्य बहुत कम रहे हैं, सोमवार को जमकर हुई आतिशबाजी से प्रदूषण के स्तर में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। शहर की हवा दिवाली जैसी एक बार फिर प्रदूषित हो गई है। दिवाली के समय निर्माण कार्य भी हो रहा था और जमकर अतिशबाजी भी हुई थी। तब एयर क्वालिटी इंडेक्स का स्तर 158 से लेकर 170 था, जबकि बुधवार को प्रदूषण का स्तर बढ़कर 166 हो गया।
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सप्ताहभर में यह रहे हालत
तारीख-- एक्यूआई का स्तर
18 जनवरी-- 80
19 जनवरी-- 108
20 जनवरी-- 130
21 जनवरी-- 150
22 जनवरी-- 155
23 जनवरी- 160
24 जनवरी-166
ऐसे मौसम में अगर कोई सांस का रोगी टहलने निकला तो उसे अस्थमा का अटैक भी आ सकता है। इसलिए खुद भी बचाएं और अपने तीन साल से कम उम्र के बच्चों को ठंड व प्रदूषण से बचाने का हर संभव प्रयास करें। इस वक्त ठंड के चलते बच्चे बहुत बीमार हो रहे हैं। इस मौसम में निमोनिया का असर अधिक होता है। ऐसे में प्रदूषण का स्तर चढ़ने से बच्चों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। इसके अलावा सांस के जो भी रोगी होंगे, उन्हें भी परेशानी होगी।
-डॉ. रंजन मिश्रा, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
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विशेषज्ञों के अनुसार, जिले में सोमवार को जमकर आतिशबाजी हुई। इसके चलते प्रदूषण का स्तर अचानक बढ़ गया है। ऐसे में सुबह टहलने वालों की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। वहीं, डॉक्टर की सलाह है कि ऐसे समय हृदय और सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। पिछले चार दिनों से चल रहे पछुआ हवा के चलते वातावरण में नमी बनी हुई है। बावजूद इसके शहर में आबोहवा स्वच्छ श्रेणी में थी। शनिवार को एक्यूआई 130 था जो रविवार को 150 पहुंच गया था। इसके बाद सोमवार को श्रीराम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की खुशी में शहर में जमकर आतिशबाजी हुई। परिणाम स्वरूप सोमवार की रात में एक्यूआई बढ़कर 155 पहुंच गया। बुधवार की सुबह 10 बजे यह 166 पर पहुंच गया।
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वायुमंडल में ऊपर नहीं जा पा रहे प्रदूषण के कण
जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज महराजगंज भूगोल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर दिवाकर सिंह ने बताया कि वातावरण में नमी के चलते प्रदूषण के कण वायुमंडल में ऊपर नहीं जा पा रहे हैं, जिससे कोहरा व धुंध बना हुआ है। हवा की रफ्तार धीमी होने के चलते कण निचले स्तर पर बने हुए हैं। शहर निर्माण कार्य बहुत कम रहे हैं, सोमवार को जमकर हुई आतिशबाजी से प्रदूषण के स्तर में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। शहर की हवा दिवाली जैसी एक बार फिर प्रदूषित हो गई है। दिवाली के समय निर्माण कार्य भी हो रहा था और जमकर अतिशबाजी भी हुई थी। तब एयर क्वालिटी इंडेक्स का स्तर 158 से लेकर 170 था, जबकि बुधवार को प्रदूषण का स्तर बढ़कर 166 हो गया।
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सप्ताहभर में यह रहे हालत
तारीख
18 जनवरी
19 जनवरी
20 जनवरी
21 जनवरी
22 जनवरी
23 जनवरी- 160
24 जनवरी-166
ऐसे मौसम में अगर कोई सांस का रोगी टहलने निकला तो उसे अस्थमा का अटैक भी आ सकता है। इसलिए खुद भी बचाएं और अपने तीन साल से कम उम्र के बच्चों को ठंड व प्रदूषण से बचाने का हर संभव प्रयास करें। इस वक्त ठंड के चलते बच्चे बहुत बीमार हो रहे हैं। इस मौसम में निमोनिया का असर अधिक होता है। ऐसे में प्रदूषण का स्तर चढ़ने से बच्चों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। इसके अलावा सांस के जो भी रोगी होंगे, उन्हें भी परेशानी होगी।
-डॉ. रंजन मिश्रा, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल