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किसानों ने गन्ने में आग लगाई
अमर उजाला ब्यूरो/महराजगंज
Updated Sun, 06 Dec 2015 12:55 AM IST
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किसानों के प्रति सरकार की बेरुखी व मिल प्रशासन द्वारा किसानों के गन्ना बकाया भुगतान से आहत क्षेत्र के किसान अपने खेत में गन्ना जला कर शासन व प्रशासन का विरोध शुरू कर दिए हैं।
तहसील क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला एक किसान शुक्रवार को अपना गन्ना जला कर सरकार की नीतियों का विरोध किया।
निचलौल थाना क्षेत्र के महेशपुर कबेलवा निवासी काशीनाथ सिंह ने अपने 75 डिसमिल खेत में लगे गन्ने को जला दिया। किसान ने बताया कि सरकार की नीतियों के चलते अभी तक उसका पुराना बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं हुआ। मिल प्रबन्धन की तानाशाही रवैये के चलते दो माह से मिल कर्मचारी हड़ताल पर चल रहे थे। जिसके कारण क्षेत्र के किसान गन्ना औने पौने दामों पर क्रेशर पर बेचने को मजबूर हैं।
सरकार किसी मिल मालिक पर सख्ती कर किसानों का गन्ना मूल्य का बकाया भुगतान नहीं करा पाई। उसका कहना है कि वह छोटा किसान है। खेती ही उसके आय मुख्य साधन है। अभी पिछला गन्ना मूल्य करीब 26 हजार बकाया है। गन्ने की खेती कर वह परेशानी झेल रहा है। दिसम्बर का पहला पखवारा बीतने के कगार पर है परन्तु अब तक मिल प्रबन्धन द्वारा मिल चलाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। सरकार व प्रशासन की यही रवैया रही तो कर्ज में डूबे क्षेत्र के किसान आत्म हत्या करने को मजबूर होंगे।
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तहसील क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला एक किसान शुक्रवार को अपना गन्ना जला कर सरकार की नीतियों का विरोध किया।
निचलौल थाना क्षेत्र के महेशपुर कबेलवा निवासी काशीनाथ सिंह ने अपने 75 डिसमिल खेत में लगे गन्ने को जला दिया। किसान ने बताया कि सरकार की नीतियों के चलते अभी तक उसका पुराना बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं हुआ। मिल प्रबन्धन की तानाशाही रवैये के चलते दो माह से मिल कर्मचारी हड़ताल पर चल रहे थे। जिसके कारण क्षेत्र के किसान गन्ना औने पौने दामों पर क्रेशर पर बेचने को मजबूर हैं।
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सरकार किसी मिल मालिक पर सख्ती कर किसानों का गन्ना मूल्य का बकाया भुगतान नहीं करा पाई। उसका कहना है कि वह छोटा किसान है। खेती ही उसके आय मुख्य साधन है। अभी पिछला गन्ना मूल्य करीब 26 हजार बकाया है। गन्ने की खेती कर वह परेशानी झेल रहा है। दिसम्बर का पहला पखवारा बीतने के कगार पर है परन्तु अब तक मिल प्रबन्धन द्वारा मिल चलाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। सरकार व प्रशासन की यही रवैया रही तो कर्ज में डूबे क्षेत्र के किसान आत्म हत्या करने को मजबूर होंगे।
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